December 3, 2022

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चीन ने कैसे श्रीलंका और पकिस्तान की अर्थव्यवस्था को किया बर्बाद !

कैसे बर्बाद हुई सोने की लंका

कैसे बर्बाद हुई सोने की लंका

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चीन की एक बहुत ही पुरानी आदत है कि वो पहले अपने आस पास मजबूर देशों से दोस्ती करता है फिर उन्हें कर्ज देता है और जब वो देश कर्ज नहीं चुका पाते तो उन देशों को अपना गुलाम बना लेता है। मतलब ये की चीन अपने ही दोस्तों को भिखारी बनाकर छोड़ देता है। ये जानते हुए भी कई देश उससे कर्ज ले लेते हैं क्योंकि उसकी पॉलिसी ही कुछ ऐसी है। क्या करें भविष्य के लिए बुने गए सोने के जाल में हर कोई आसानी से फंस ही जाता है। इस कर्ज के जाल में कई देश घिर कर अब अपना सिर पीट रहे हैं। पाकिस्तान, नाइजीरिया, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया, यूएई और सिंगापुर जैसे देश भी चीन की साजिशों की गिरफ़्त में घिर चुके हैं। श्रीलंका ने अपने तरक्की करने की बेमिसाल जज़्बे से कभी पूरी दुनिया को हैरत में डालने का काम किया था। लेकिन हालात जब ख़राब होने शुरू हुए तो ऐसे हुए कि अब लोग सड़कों पर आ गए। एक तरफ़ दुनिया का सबसे ताकतवर देश अमेरिका अपनी डॉलर डिप्लोमेसी से गरीब देशों को अपने पक्ष में करने में लगा रहता है तो दूसरी तरफ़ चीन भी कम नहीं है जो किसी देश का नामों निशान तक मिटाने की कवायत में लगा रहता है। इस वक़्त श्रीलंका चीन के धोखे से त्रस्त है। मगर ये धोख़ा श्रीलंका को कोई आज नहीं मिला है बल्कि श्रीलंका बीते दो दशक से चीन से आर्थिक मदद ले रहा था।

अब हालत ये है कि श्रीलंका चीन के कर्ज में इस कदर डूबा है कि वो इससे कैसे उभरेगा इसका कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा है। आलम ये है कि दुकानों से सामान गायब है। डीज़ल पेट्रोल की कीमत आसमान छू रही हैं। देश भर में 15 -15 घंटे बिजली की कटौती की जा रही है। सड़कों पर तेल और जरुरी सामान के लिए लम्बी लाइन लगी हुई हैं। अब सुनिए शुरू से इस कर्ज की दास्ताँ। दरअसल ये शुरुवात हुई 2009 में जब तमिल अलगाववादियों के साथ श्रीलंका का संघर्ष तो ख़त्म हुआ मगर उसके बाद इसने चीन से कर्ज लिया। LTTE से संघर्ष के दौरान श्रीलंका भले ही कुंए में गिरने से बच गया हो मगर दूसरी तरफ़ तो बड़ी सी खाई उसका इंतज़ार कर रही थी। दरअसल श्रीलंका इतना ख़ूबसरत है कि हर साल लाखों पर्यटक दुनियाभर से यहां आते हैं। सोचिए यहां की जीडीपी में पर्यटन का हिस्‍सा करीब 12.5 फीसद तक है। मगर कोरोना के दौरान प्रतिबंधों ने इसको बेपटरी कर दिया। इसके बाद सरकार ने जो कदम उठाए उसने भी हालात और बद से बदतर कर दिए। श्रीलंका के राजस्‍व को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ टैक्स में ज़्यादा छूठ देने की वजह से, खुद वैश्विक क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों ने भी सवाल उठाए थे। इन हालातों का फायदा चीन ने उठाया और श्रीलंका चीन पर निर्भर होता चला गया। पहले से कर्ज के बोझ तले दबा ये देश और अधिक कर्जदार हो गया। कृषि क्षेत्र में लागू की गई गलत नीतियों का भी नुकसान इस सरकार को उठाना पड़ा। यही नहीं सरकार ने रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग पर भी बैन लगा दिया। इसका असर सीधेतौर पर खेती और अनाज भंडारण पर पड़ा। इस तरह आखिरकार चीन की चाल में फंस कर श्रीलंका ने 2017 में अपना हंबनटोटा पोर्ट 99 साल के लिए चीन के सुपुर्द कर दिया क्योंकि वो चीन का कर्ज नहीं चुका पाए थे। बर्बादी के मुहाने पर खड़ा ये वही श्रीलंका है जो लंबे समय तक गृहयुद्ध की चपेट में रहा है। इसके बाद भी इस देश ने कई देशों के मुकाबले अधिक तेजी से तरक्‍की की है। मगर इस वक़्त इसी श्रीलंका पर फिलहाल 45 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी कर्ज हो गया है। वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक इस देश का विदेशी कर्ज साल 2019 में जीडीपी का 70 फीसदी तक पहुंच गया, जबकि 2010 में ये केवल 39% था। यही नहीं श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार 5 अरब डॉलर से घटकर 1 अरब डॉलर का रह गया है। सिर्फ इतना ही नहीं श्रीलंका के ऊपर 5 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज़ है, जिसमें अकेले चीन का हिस्सा करीब 20 % है। विदेशी मुद्रा के रूप में सिर्फ 17.5 हजार करोड़ रुपये ही श्रीलंका के पास हैं. श्रीलंका कच्चे तेल और अन्य चीजों के आयात पर एक साल में खर्च 91 हजार करोड़ रुपये खर्च करता है. खर्च 91 हजार करोड़ रुपये का है, लेकिन श्रीलंका के पास सिर्फ 17.5 हजार करोड़ रुपये ही है। ये हाल सोचिए अकेले श्रीलंका का है मगर चीन ने तो करीब 45 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज बांट रखा है।

सुनकर हैरानी हुई ना अब सुनिए दूसरे देश की कहानी जो पहले ही आतंकवाद की वजह से बर्बाद है और अब तो चीन ने इसे भी पूरी तरह भिखारी ही बना दिया है। सही समझ गए आप में बात कर रही हूँ पाकिस्तान की। आईएमएफ की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के ऊपर 20 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है, जिसमें करीब 4 अरब डॉलर चीन का दिया हुआ है। पाकिस्तान को चीन को 56 मिलियन डॉलर चुकाने हैं, इनमें 45 मिलियन डॉलर है इसी साल के अंत तक देने हैं। मगर कर्ज चुकाना तो छोड़िए इस समय तो इन सब के चक्कर में पाकिस्तान में सत्ता की व्यवस्था ही चरमरा गई है और वहां अभी हाहाकार हो रहा है। इसके अलावा तीसरे नंबर पर है युगांडा सोचिए जिसके एकमात्र कंपाला के एन्टेबे एयरपोर्ट को चीन ने अपने कब्जे में ले लिया है। क्योंकि बेचारे युगांडा ने भी 2015 में 2% के ब्याज दर पर चीन से करीब 200 मिलियन डॉलर कर्ज लिया था। इसके बाद बारी आती है लाओस की जिसे चीन ने एक रेल नेटवर्क बनाकर फंसाया था। दरअसल चीन की बेल्ट एंड रोड पॉलिसी ऐसी है कि कमजोर देशों को विकास का सपना दिखाकर अपने षड्यंत्र में फंसाता है और फिर कर्ज़दार बना लेता है।

खैर श्रीलंका को जो झटका इस बार लगा है उसे अब समझ में आने लगा है उसका असली दोस्त भारत ही है। एक वक़्त ऐसा था जब श्रीलंका ने चीन के चलते भारत जैसे पुराने मित्र को ही दरकिनार कर दिया। अब जबकि श्रीलंका बदहाली के मुहाने पर खड़ा है तो चीन ने भी उसके लिए इससे बच निकलने का कोई दुसरा रास्ता नहीं छोड़ा है। मगर भारत ने भी अपना फर्ज बखूबी निभाया है। भारत ने जरूरी चीजों की आपूर्ति के लिए श्रीलंका को क्रेडिट लाइन उपलब्ध कराई है। भारत श्रीलंका में खाने-पीने का भी सामान भेज रहा है, जिसमें हजारों टन चावल और डीजल प्रेट्रोल भी शामिल है। भारत श्रीलंका को 6,500 करोड़ रुपये का कर्ज दे चुका है। इसके अलावा आने वाले दिनोंं में भारत श्रीलंका को 7,500 करोड़ रुपये का कर्ज और उपलब्ध कराएगा।

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