September 18, 2021

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ग्रामीण कार्य विभाग के 38 जूनियर इंजीनियरों ने किया करोड़ों का घपला, अब सैलरी व पेंशन से वसूली करेगा विभाग

ग्रामीण कार्य विभाग

ग्रामीण कार्य विभाग के 38 जूनियर इंजीनियरों ने किया करोड़ों का घपला

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हाल ही में बिहार से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें ग्रामीण कार्य विभाग के तीन दर्जन से ज्यादा जूनियर इंजीनियर करोड़ो रूपए एडवांस लेने के बाद फरार हो निकले हैं। दरअसल, ये पूरा मामले बिहार के ग्रामीण कार्य विभाग का है। यहां कुल 38 जूनियर इंजीनियरों ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के तहत अग्रम राशि की निकासी की जिसमें कुल 7 करोड़ 94 लाख के करीब राशि थी.. हैरान करने वाली बात ये है कि आरोपियों ने अब तक पैसे का हिसाब नहीं दिया है। लेकिन जब मामला सामने आया तो विभाग इन सभी की खोजबीन में जुट गया है..

बता दें कि, संबंधित अंचलों में इनका स्थायी पता उपलब्ध कराने का आदेश जारी कर दिया गया है ताकि राशि का समायोजन या वसूली की जा सके। वहीं ग्रामीण कार्य विभाग के अभियंता प्रमुख अशोक कुमार मिश्रा ने मामले को लेकर संबंधित कार्य अंचलों में एक पत्र भी लिखकर जारी कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, इन 38 में से कुल 20 जुनियर इंजीनियर सेवानिवृत हो चुके हैं, जबकि 15 अभी भी कार्यरत है। इसके अलावा विभाग द्वारा एक जूनियर इंजीनियर को छापेमारी में पकड़ लिया गया है। वहीं दो की मौत होने का मामला सामने आया है।

अब विभाग की सेवानिवृत हो चुके 20 इंजीनियरों की तलाश में जुटी है जबकि, जिसमें इंद्रदेव प्रसाद, घनश्याम दास, श्रीकांत प्रसाद, सुभाष चंद्र सिंह, रवींद्र कुमार सिंह, प्रभुजी साह, कैशर अली, कुंवर रवींद्र प्रसाद सिंह, नेशार अहमद, उमेश प्रसाद सिंह, फेराजुल हक, सिराज अहमद, कृष्ण देव प्रसाद, दिलीप कुमार, राजेंद्र कुमार, विरेंद्र कुमार मिश्रा, अनिल कुमार सिंह, तौकिर अहमद, रामस्वार्थ साह का नाम शामिल हैं. जबकि नवलेश प्रसाद सिंह छापेमारी में एजेंसी द्वारा गिरफ्तार किया गया है.

वहीं जिन दो लोगों की मौत हो चुकी है उनकी पहचान अरुण कुमार व विजय कुमार के तौर पर की गई है। इसके अलावा विभाग में कार्यरत जूनियर इंजीनियरों में नंदकिशोर शर्मा, अरविंद कुमार, छोटू प्रसाद, शंभूनाथ केसरी, विजय प्रताप सिंह, इंद्रदेव यादव, प्रमोद कुमार, व्यासमुनी राम, छोटू प्रसाद, प्रमोद कुमार विद्यार्थी, महेश रजक, कमल नारायण शर्मा और सदाब अनवर शामिल हैं.

अब मामला सामने आने पर सवाल ये उठता है कि, इन कर्मचारियों से विभाग वसूल कैसे करेंगा. तो आपको बता दें कि, अधिकारियों के अनुसार कार्यरत अभियंताओं से सैलरी के जरिए जबकि सेवानिवृत्त अभियंताओं से पेंशन के जरिए इस राशि की वसूली होगी. तो वहीं जिनकी मौत हो चुकी है, सरकार उनके पारिवारिक पेंशन के जरिए ये राशि वसूल करेगी.

जाहिर है कि, इतनी बड़ी राशि पचाने के बाद विभाग अब इन कर्मचारियों को बिना वसूली के छोड़ने वाला नहीं है। लेकिन जानकारी के लिए आपको बता दें कि, 38 जूनियर इंजीनियरों में सबसे कम राशि आठ हजार कृष्ण देव प्रसाद के नाम पर है, जबकि सबसे अधिक राशि एक करोड़ उमेश प्रसाद सिंह के नाम पर है.

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