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भारत में दिखेगा वैश्विक आर्थिक सुस्ती का असर : आईएमएफ़

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अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष

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पूरा विश्व आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। इस वैश्विक आर्थिक मंदी में दुनिया के अधिकतर देश इसका शिकार हो रहे हैं। दुनिया के विकसित देशों पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने इसको लेकर चेतावनी जारी की है। अमेरिका और चीन जैसे विकसित देशों में आर्थिक सुस्ती देखने को मिल रही है। यदि विकासशील देशों की बात करें तो विकासशील देशों में भी अधिक आर्थिक सुस्ती देखि जा सकती है। भारत विकासशील देशों की श्रेणी में आता है।

दुनिया के 90 फीसदी देश हो रहे  वैश्विक आर्थिक सुस्ती का शिकार 

यहाँ का मार्केट भी इस समय आर्थिक सुस्ती का शिकार हो रहा है। इसी को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष की हाल ही में चयनित प्रबंध निदेशक  क्रिस्टालिना जॉर्जिएवा  ने चेतावनी जारी की है। उन्होने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में आर्थिक सुस्ती देखी जा रही है, जिसके कारण 90 फीसदी देशों की विकास की रफ्तार धीमी रहेगी। तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था के कारण भारत में सबसे ज्यादा इसका असर देखा जाएगा।

क्रिस्टालिना ने कहा कि साल 2019 में दुनिया के 90 फीसदी देशों कि बढ़ोतरी दर सुस्त रहेगी ओर भारत तो एक तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था इसलिए वैश्विक आर्थिक सुस्ती का सबसे ज्यादा असर भारत पर देखने को मिलेगा। भारत में आर्थिक सुस्ती का असर पहले से ही नजर आ रहा हैं इसी बीच अगले एक हफ्ते में वर्ल्ड बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष कि एक सालाना बैठक का आयोजन होगा जिसमें वैश्विक सुस्ती पर दोनों संस्थाएं अपने अनुमान पेश करेगी। इस बैठक में दुनिया के शीर्ष बैंकर और वित्त मंत्री हिस्सा लेंगे। आईएफ़एम कि प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना ने कहा कि अब अमेरिका और जापान जैसे विकसित देशों कि भी आर्थिक गतिविधियां नरम पड़ी हुई है। भारत में भी इसका असर साफ़तौर पर देखने को मिल रहा है। भारत के साथ ब्राज़ील भी आर्थिक सुस्ती का असर दिख रहा है।

ज्ञात रहे आर्थिक सुस्ती के चलते ही भारत के ऑटो सैक्टर पर काफी असर पड़ा है। जिसके चलते कई कपनियों ने बड़ी संख्या में अपने कर्मचारियों को निकाल दिया था । इसी के कारण एफ़एमसीजी सैक्टर की कई कंपनियों ने भी आर्थिक सुस्ती के चलते अपने कर्मचारियों कंपनी से निकालने का फैसला लिया था। हालांकि बाद में केंद्र सरकार ने ऑटो सैक्टर में काम करने वाली कंपनियों को थोड़ी राहत दी थी। क्रिस्टीलिना ने कहा कि 2019-20 तक आर्थिक सुस्ती रहने का अंदेशा है। इस तरह के आउटलुक से उन देशों के लिए और मुश्किल होने वाली है जो पहले ही कठिनाई से गुजर रहे हैं. खासकर मुद्रा कोष कई देशों में कार्यक्रमों में समस्या आ सकती है

 

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