बेरोजगार ग्रामीणों को रोजगार दिलाने के मकसद से मनरेगा योजना में संशोधन

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बेरोजगार ग्रामीणों

बेरोजगार ग्रामीणों को रोजगार दिलाने के मकसद से मनरेगा योजना में संशोधन

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देश में कोरोना की वजह से पिछले 3-4 महीनों से लॉकडाउन की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में लाखों की संख्या में शहरों में काम करने वाले प्रवासी मजदूर शहरों को छोड़कर वापस अपने गांव चले आए। ट्रेन, बसों के बंद होने की वजह से लाखों मजदूरों ने पैदल ही अपने घरों का रास्ता तय किया। ऐसे में अब लॉकडाउन की वजह से बेरोजगार ग्रामीणों की ज़िंदगी को दोबारा से पटरी पर लाने के लिए सरकार का फोकस ग्रामीण क्षेत्रों पर है। मजदूरों को काम मिलने में परेशानी न हो, इसके लिए अब पंचों को ये अधिकार दिया गया है, कि वो भी मजदूरों को काम दिला सकते हैं। साथ ही, मनरेगा योजना के माध्यम से मानसून में श्रमिकों को गांव में ही रोजगार मुहैया हो सकेगा।
इसके लिए पूर्व निर्धारित लेबर बजट में बढ़ोतरी कर अतिरिक्त लक्ष्य आवंटित किए गए हैं। जिसके लिए मनरेगा की कार्य योजना में संशोधन किया गया है। वहीं वित्तीय वर्ष 2020 – 21 में पूर्व निर्धारित लेबर बजट में भी बढ़ोतरी की गई है। जिससे अधिक से अधिक बेरोजगार ग्रामीणों को रोजगार प्राप्त हो सके।
मानसून अवधि में पौधरोपण के तहत सामुदायिक भूमि पर पौधरोपण, निजी भूमि पर फलोद्यान, मंदिर कुंज, हैबिटेट रेस्टोरेशन जैसे कार्य कराने और जल संरक्षण और संवर्धन के कार्यों के तहत कंटूर ट्रेंच, बोल्डर चेक डैम, गोबियन संरचना जैसे कार्यों को प्राथमिकता से कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं गांव में चारागाह विकास के कार्य भी प्राथमिकता से कराने के निर्देश दिए गए हैं।
यही नहीं आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सामुदायिक संरचना के कार्यों के तहत ग्राम पंचायत भवन, आंगनवाड़ी भवन, शासकीय भवनों के लिए अप्रोच रोड, शालाओं की बाउंड्रीवाल का निर्माण, नाडेप टांका, वर्मी कंपोस्ट पिट गौशालाओं का निर्माण जैसे कार्य भी मनरेगा योजना के अंतर्गत अब कराए जा सकेंगे। मजदूरों को इसके लिए पंच के पास जाकर बस एक फॉर्म भरना होगा। अगर फिर भी काम नहीं मिलता है तो मजदूर कॉल सेंटर में इसकी शिकायत कर सकते हैं।
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