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महिलाओं ने खुद बदली अपनी किस्मत, खोदा 107 मीटर लंबा पहाड़

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महिलाओं ने खुद बदली अपनी किस्मत, खोदा 107 मीटर लंबा पहाड़

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अंगरेठा गांव की 100 से ज्यादा महिलाओं ने मिलकर सिर्फ 18 महीनों के अंदर वो काम कर दिखाया है जिसके लिए सरकार बस आश्वासन ही देती रही है। दरअसल, इस गांव में बरसों से पानी की काफी समस्या है और हर पिछड़े इलाके की तरह यहां पर भी महिलाओं को ही पानी लेने करीब 3 किलोमीटर दूर पैदलचलकर जाना पड़ता है।

लेकिन इन महिलाओं की समस्या बस यहीं खत्म नहीं होती, 3 किलोमीटर दूर पैदल चलकर जाना और वहां एक लंबी कतार में बाकी महिलाओं के साथ अपनी बारी आने का इंतजार करना, घंटों खड़े रहने पर भी अगर पानी ना मिले तो घर वापस जाकर सास और पति के ताने सुनना, उनके शोषण का शिकार होना।

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इन सबसे परेशान होकर इस गांव की महिलाओं ने जल संवर्धन के क्षेत्र में परमार्थ समाज सेवी संस्थान के साथ मिलकर काम किया और 18 महीनों में 107 मीटर लंबे पहाड़ को काटने में सफलता हासिल की। इन महिलाओं की मेहनत का ही नतीजा है कि, आज इस गांव को पानी की कमी से छुटकारा मिल पाया है।

इसी के साथ इन महिलाओं ने इलाके में 400 पौधे भी लगाए हैं, जिनका संरक्षण भी वो खुद कर रही हैं। तालाब के भरने से सूखी हुई बछेड़ी नदी में फिर से पानी बहने की उम्मीद बंध गई है। लेकिन अफसोस इस बात का है कि, जो काम सरकार या प्रशासन को करना चाहिए वो काम करने पर महिलाओं को मजबूर होना पड़ रहा है।

इससे पहले भी हमने मांझी और लौंगी की कहानी पढ़ी है जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बस पहाड़ खोदने में लगा दी.. आज भले ही ये लोग अपनी मेहनत का नतीजा हासिल कर बाकी देशवासियों के लिए मिसाल बन गए हैं लेकिन साथ ही इनक मेहनत ने हमारी सरकार की नाकामी का प्रमाण भी दिया है।

 

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