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कभी एक वक्त की रोटी तक नहीं थी, आज स्वरोजगार से बदल दी अपनी किस्मत

माला देवी

माला देवी ने स्वयं सहायता समूह से बदली अपनी किस्मत, पेश की मिसाल

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उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के एक छोटे से गांव सिरसी की रहने वाली माला देवी आज अपने पूरे गांव की महिलाओं के लिए मिसाल बन चुकी है। और इसके पीछे वजह है माला देवी की मेहनत और लगन, आज से 8 साल पहले माला देवी के पास दो वक्त की रोटी के लिए पैसे नहीं थे। माला सिर्फ 8वीं पास थी और उनके पति बीए पास लेकिन इसके बावजूद भी रोजगार का कोई साधन नहीं था।

पैसों की तंगी के चलते घर में हर जिन झगड़े बढ़ने लगे थे तो माला ने भी पति को तलाक देने का मन बना लिया था कि इस बीच गांव की पंचायत सेक्रेटरी ने साल 2013 में स्वयं सहायता समूह का निर्माण किया। जिसमें गांव की अन्य 10 महिलाओं के साथ माला ने भी जुड़ने का फैसला लिया।

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माला देवी का समूह अच्छा प्रदर्शन कर रहा था जिसके चलते उन्हें बैंक से बड़ी आसानी से 3 लाख रूपये का लोन मिल गया। तो वहीं दूसरी ओर माला देवी ने अपने व्यवसाय के लिए 25 हजार रूपये का कर्ज लेकर सिलाई का काम शुरू किया। बाद में घर पर ही मनिहार की दुकान भी खोल ली। धीरे-धीरे माला ने बाजार से रेडिमेंट कपड़े खरीदे और उन्हें आस-पास के गांव में बेचने का काम अपने पति को सौंप दिया। माला देवी का पति रेडिमेंट कपड़ो के साथ-साथ माला के सिले कपड़े भी गांवों में जाकर बेचता है।

इस तरह आज माला ने अपनी मेहनत के बलबूते पर ना सिर्फ खुदका काम शुरू किया बल्कि, अपने घर की आर्थिक हालत को भी सुधार लिया है। बता दें कि, माला के समूह को इस साल बैंक से 5 लाख रूपये के लोन की मंजूरी मिल चुकी है। जिससे वो जल्द ही डेयरी और सिलाई सेंटर का काम शुरू करना चाहती है। गांव की बाकी महिलाएं माला देवी को अपनी प्रेरणा मानती है।

 

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