February 21, 2024

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History of 5th March- 1851 में ज्योलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की स्थापना

History of 5th March
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History of 5th March-

इतिहास के पन्नों में 05 मार्च का दिन बेहद खास है. 1931 में इसी दिन देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और तत्कालीन वाइसरॉय लॉर्ड इरविन के बीच एक अहम समझौता हुआ, जिसे इरविन पैक्ट कहा जाता है. गांधी और इरविन के बीच इस समझौते से पहले आठ बैठकें हुई. साल 1931 में पांच मार्च के दिन दोनों ने एक समझौते पर दस्तखत किए. इसमें तय किया गया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सविनय अवज्ञा आंदोलन खत्म करेगी और लंदन में होने वाले गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेगी. इसमें यह भी तय किया गया कि ब्रिटिश सरकार इंडियन नेशनल कांग्रेस की गतिविधियों पर रोक लगाने वाले सभी आदेश वापस ले लेगी।

आज ही के दिन 2010 में आंध्र प्रदेश के श्री हरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से नई पीढ़ी के उच्च क्षमता वाले साउंडिंग रॉकेट का परीक्षण किया गया था, जो कि सफल रहा। इसरो द्वारा विकसित तीन टन भार वहन क्षमता वाला यह राकेट देसी रॉकेटों में अब तक का सबसे भारी रॉकेट है। इसमें एयर ब्रीदिंग तकनीक युक्त स्क्रैमजेट इंजन मॉड्यूल का इस्तेमाल किया गया है। बता दें कि स्क्रैमजेट इंजन का प्रयोग केवल रॉकेट के वायुमंडलीय चरण के दौरान ही किया जाता है। इससे प्रक्षेपण पर आने वाले खर्च में भी कटौती की जा सकती है।

1699 में आज ही के दिन महाराजा जय सिंह द्वितीय अम्बर के सिंहासन पर बैठे। महाराजा जय सिंह अठारहवीं सदी में भारत में राजस्थान प्रान्त के आमेर के कछवाहा वंश के सर्वाधिक प्रतापी शासक थे। महाराजा जय सिंह को सवाई की मौखिक उपाधि औरंगजेब ने दी थी.

1851 में आज ही के दिन ज्योलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की स्थापना की गई थी। Geological Survey of India  भारत सरकार के खान मंत्रालय के अधीन कार्यरत एक संगठन है। इसका कार्य भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और अध्ययन करना है।

साल 1997 में भारत सहित 13 अन्य देशों ने इंडियन ओशन रिम एसोसियेशन के गठन की घोषणा की. यह संघ क्षेत्रीय सहयोग और अंतर्महाद्वीपीय व्यापार में तेजी लाने के उद्देश्य से हिंद महासागर के तीन प्रायद्वीपों- एशिया, अफ्रीका और आस्ट्रेलिया को एक मंच पर लाता है।

साल 1913 में आज ही के दिन भारतीय गायिका गंगूबाई हंगल का जन्म हुआ था. गंगूबाई हंगल हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की प्रख्यात गायिका थीं। उन्होने स्वतंत्र भारत में खयाल गायिकी की पहचान बनाने में खास भूमिका निभाई। उन्होंने संगीत के क्षेत्र में आधे से अधिक सदी तक अपना योगदान दिया। इनकी आत्मकथा ‘नन्ना बदुकिना हादु’ शीर्षक से प्रकाशित हुई है।

 

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