December 2, 2020

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कोरोना महामारी के दौरान बढ़ी मानसिक रोगों की गिनती

तनाव

तनाव कर सकता है दिमाग पर असर, कोरोना काल में बढ़े मानसिक रोगी

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अपनी भागमभाग भऱी जिन्दगी में हममें से किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि इतनी अवांछित छुट्टियों से साक्षात्कार होगा जो हजम भी न होंगी, ऐसी छुट्टियां जो उस निवाले सी लग रही हैं जिसे ना निगल सकते हैं न उगल सकते हैं। विश्व भर में कमोबेश हर जगह ऐसे ही हालात हैं, घर से बाहर जाना भी जरूरी है लेकिन स्वस्थ रहें इसके लिए घर में रहना उससे भी बड़ी मजबूरी, लेकिन घर में रहकर हम शारीरिक के साथ-साथ मानसिक रूप से स्वस्थ हैं या नहीं, तनाव में हैं या नहीं ये उससे भी बड़ा सवाल है।
कहीं ऐसा तो नहीं कि शारीरिक स्वास्थ्य को पर गंभीरता से सोचते हुए आप मानसिक तौर पर बीमार हो रहे हों, आशा है ऐसा न हो, लेकिन यदि ऐसा हो रहा है तो संभलिए और शरीर के साथ-साथ मन-मस्तिष्क भी स्वस्थ रहे इस पर भी विचार करें। आप नौकरीपेशा हैं या कारोबारी, किसान हैं या किसी कारखाने-फैक्ट्री के मजदूर।
बीते 4-5 महीनों में आर्थिक तौर पर इस कोरोना काल ने जितनी बुरी तरह हर आमोखास की जड़ें हिलाई हैं वो हम सभी जानते हैं। लेकिन जब जान पर बनी हो तब माल का ध्यान नहीं आता, हां जब जीवन यापन के लिए सीमित साधन भी दम तोड़ बैठें तो जान जोखिम में डालकर लोग जीने के साधन जुटाने घर से बाहर का रुख कर रहे हैं, इसी उधेड़बुन में काफी लोग तनाव और अवसाद जैसी मानसिक बीमारियों का शिकार भी हो रहे हैं।

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अनजान डर, बेचैनी, अजीब सी चिंता, घबराहट, चिड़चिड़ापन मानसनिक तनाव औऱ अवसाद के कुछ साधारण लक्षण हैं, इन समस्याओं से व्यक्ति जब दो-चार होने लगता है तो शुरुआत में उसे ये सामान्य बात लगती है लेकिन धीरे धीरे इनका हावी होना व्यक्ति को मानसिक विकारों से ग्रस्त करता है। ऐसा वक्त जब लोग चाह कर भी इच्छित लोगों से नहीं मिल पा रहे, घर में बंद रहना इन समस्याओं को जन्म दे रहा है क्योंकि कोरोना से बचाव का मूल मंत्र माना जा रहा है सामाजिक दूरी।
हां कोरोना से बचाव के लिए जिस सामाजिक दूरी की बात कही जा रही है कहीं न कहीं य़े शब्द लोगों में भावनात्क दूरी बना रहे हैं, ऐसा नहीं है कि सामाजिक दूरी का अर्थ भावनात्मक रूप से दूरी बनाना है, हां इस संकट भरे दौर में हम जिस तरह से अपने मन मष्तिस्क का इस्तेमाल कर रहे हैं वो अर्थ को अनर्थ कर रहा है और यही वजह है कि लोग दूरी बनाए रखने के अर्थ कुछ और ही लगा बैठे हैं, नतीजा कुछ लोग इतने अकेले हो चले हैं कि मनोरंजन के साथ भी उन्हें अखर रहे हैं, घर बैठकर काम करने की कला पर तनाव इतना हावी हो गया है कि दिमाग बीमार हो रहा है।
इस लेख में लिए हुए शब्द अधिकतर लोग जी रहे हैं बस कह नहीं पाना ही तनाव और अवसाद की ओर लिए जा रहा है लेकिन अगर कोविड 19 के इस कठिन काल को हम अवसाद की बजाए अवसर मानें तो स्थिति काफी हद तक सुधर सकती है, जिनकी फिक्र करते हैं उनतक पहुचे बिना भी हालचाल जाना जा सकता है, हमारे बड़े बुजुर्गों ने वो दौर जिया है जब कार, रेल, बस, हवाई जहाज के सफर नहीं थे अपनो तक पहुंचना चुटकियों का खेल नहीं था तब चिट्ठियों की भाषा एक-दूसरे को चिंता और फिक्र का अहसास कराती थी।
फिर आज संकट के इस काल में हम एक-दूसरे में उस फ्रिक और अपनेपन को क्यों नहीं तलाशते, आज तो विज्ञान और तकनीकी के दिए कई अद्भुत उपहार ही हमारे बीच हैं, वीडियो कॉलिंग, फोन पर बाचतीच, चैटिंग आदि। हां ये जरूरी है कि सोशल मीडिया में इतना न घुरा जाए कि दवा ही दर्द का कारण बन जाए। इन चीजों का सही इस्तेमाल अपने विवेक के आधार पर करें।
संकट का एक बड़ा दौर जो हम जी चुके हैं उससे अधिक विकराल मुसीबतों से हम अब रूबरू होंगे, जिसके लिए शारीरिक सबलता के साथ मानसिक रुप से स्वस्थ रहना ज्यादा जरूरी है। महीनों घरों में बिताने के बाद अब जब घर से बाहर निकला होगा या हो रहा है तो मानसिक संबल ही हमें इस स्थिति में जीने के काबिल बनाएगा। बीमारी से बचाव करते हुए आर्थिक संकटों से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाएं ये समझ बनाए रखने के लिए मानसिक स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण है।
अगर आप ऐसा महसूस कर रहे हैं कि बीते कुछ महीनों में आपकी सोच पर नकारात्मकता पैर पसारने लगी है तो हो सकता है कि आप तनाव की ओर बढ़ रहे हों इस बीमारी से खुद को बचाने के लिए कुछ बातों को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। अगर अधिकतर वक्त खाली या अकेले रहते हैं तो उस समय का उपयोग कुछ क्रिएटिव कामों के लिए करें।

तनाव, मानसिक रोगी

जिन बातों को सोचने से मन बेचैन या भारी होता है उन्हें खुद तक सीमित रखने की बजाय अपने परिजनों, दोस्तों या सहकर्मियों से साझा करें। सोशल मीडिया मनोरंजन के लिए अच्छा है, लेकिन कई बार ये भी तनाव देता है इसलिए बहुत ज्यादा  इनके आदि न हों, सबसे अलग बैठकर वर्चुअल वर्ल्ड घूमने की बजा परिवार के साथ समय बिताएं।
अक्सर अकेलापन, बेचैनी व घबराहट में व्यक्ति आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए नशे का सहारा लेता है, ऐसा बिल्कुल न करें। तनाव से बचाव के लिए शराब, तंबाकू, गुटखा, सिगरेट आदि किसी भी तरह का नशा तनाव से मुक्ति का इलाज नहीं है। कई बार हर वक्त समाचारों से घिरे रहना भी मानसिक विकारों की वजह बनता है इसलिए खबरों की खबर रखें लेकिन खबरों में खोएं नहीं। दो चीजों को गंभीरता से पूरा करें, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार।
योग, मेडिटेशन, व्यायाम आदि भी करें ताकि मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य बना रहे और विचारों में सकारात्मकता आए। फिर भी यदि लगे कि आप तनाव से मुक्त नहीं हो पा रहे तो किसी अच्छे मनोचिकित्सक से संपर्क जरूर करें। वैसे बीते कुछ अखबारों और इंटरनेट पर आपने ऐसे कई लेख पढ़े और देखे होंगे जिनकी विषयवस्तु या हैडलाइन में कोरोना काल में तनाव और डिप्रेशन जैसे शब्द इस्तेमाल किए जा रहे हैं, तो तनाव या अवसाद से कैसे बचा जाए ये जानने के लिए आप उन लेखों को भी पढ़ सकते हैं।
जब विश्व पहले से ही एक महामारी से जूझ रहा है तब आप ऐसे रोगियों की गिनती को बढ़ने से रोक सकते हैं जिनका इजाफा मानसिक स्वास्थ्य के स्तर को कमजोर करेगा। कहीं ऐसा ना हो कि हम कोरोना पर तो फतह पा जाए लेकिन मानसिक रोगियों कि बढ़ी हुई संख्या विश्व को उससे भी बड़ी बिमारी के गर्त में धकेल दे। आपको जानकर शायद हैरानी होगी कि दुनियाभर में जितने हेल्थ वर्कर्स हैं उनमें मात्रा 1 फीसदी हैं जो मेंटल हेल्थ के इलाज से जुड़े हैं ऐसे में मानसिक रोगों और रोगियों कि बढ़ोत्तरी हमारे लिए कितना विकट संकट बनेगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
जितना संकट भरा समय हम जी चुके हैं उससे बड़े संकट से हम अब रूबरू हो रहे हैं क्योंकि 4-5 महीने पहले हमारे आस-पास या करीबियों में कोरोना का शिकार या ग्रसितों की संख्या न के बराबर थी आज लाखों में हैं इसलिए आज हमें ज्यादा मानसिक संबल की आवश्यकता है, शरीर के स्वस्थ और अस्वस्थ होने का संबंध दिमाग के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है इसलिए शरीर के साथ-साथि दिमाग के स्वास्थ्य पर भी ध्यान दें, स्वस्थ रहें। ध्यान रहे किसी भी संकट से बचाव के लिए धन के साथ संबल भी महत्वपूर्ण है।
एक बात सदैव याद रखें कि समय के साथ परिस्थितियां बदलती रहती हैं आज  संकट है तो कल सुकून भी होगा लेकिन मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य व्यक्ति के अपने वश में होता है। इसलिए विकट परिस्थितियों में संतुलन न खोएं, धैर्य व संयम हर हर विपत्ति का हल खोजने में सक्षम हैं।

Writer : Producer & Anchor – स्मिथा सिंह 

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