February 21, 2024

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Kisan bulletin 7th April 2019- डेयरी किसानों के लिए खुशखबरी

Kisan bulletin 7th April 2019
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Kisan bulletin 7th April 2019-

  1.  डेयरी किसानों के लिए एक खुशखबरी हैं, क्योंकि देश में स्किम मिल्क पाउडर के उत्पादन में कमी और उसकी बढ़ती मांग के चलते दूध के दामों में जल्दी ही दो रूपयें प्रति लीटर की बढोत्तरी हो सकती हैं। हालांकि, जहां एक तरफ दूध के दाम बढ़ने से किसानों को फायदा होगा.. वहीं दूसरी तरफ इससे उपभोक्ता की जेब पर बोझ बढ़ सकता हैं। दरअसल, भारत की रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की मार्च 2019 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दूध और उससे बनने वाले उत्पादों के मंहगे होने की वजह एसएमपी के उत्पादन में कमी और उसकी मांग का बढ़ना है। ऐसे में आने वाले तीन महीनों में दूध के दाम में दो रुपए तक बढ़ोत्तरी हो सकती है। इतना ही नहीं रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2019-2020 में दूध उत्पादन 3 से 4 फीसदी घटने की उम्मीद जताई जा रही है। तो वहीं दूध की खपत 6-7 फीसदी बढ़ने से भी दूध के दाम बढ़ सकते है। आपको बता दें कि, साल 2018 में 155.50 मीट्रिक टन सालाना दूध उत्पादन के साथ भारत दुनिया में पहले स्थान पर है। देश के दूध उत्पादन में 51 प्रतिशत उत्पादन भैंसों से होता हैं जबकि, 20 प्रतिशत देशी प्रजाति की गायों से और 25 प्रतिशत विदेशी प्रजाति की गायों से होता है।
  2.  प्याज किसान एक बार फिर परेशान हैं किसानों को प्याज की कीमत 3 से 4 रूपये प्रति किलों के हिसाब से मिल रही हैं.. ऐसे में प्याज किसान या तो कहीं धरना प्रदर्शन कर रहे हैं या आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं। आपको बता दें कि, मध्य प्रदेश के सागर की प्याज मंडी में किसानों ने शुक्रवार को 300 ट्रॉली प्याज की निलामी कराई थी… लेकिन प्याज के कम दाम मिलने से किसानों में नाराजगी बरकरार हैं.. पिछले दिनों की ही बात है। जब नासिक के एक प्याज किसान को 750 किलो प्याज के बदले 1064 रुपए मिले थे, तो उसने उन पैसों को पीएमओ कार्यालय भेज दिया था। हालांकि, ये उसका विरोध करने का अपना तरीका था.. पिछले चार सालों से देश में प्याज की कीमतें लगातार गिर रही हैं। ऐसे में किसान परेशान है कि, वो आखिर करें तो क्या करें… आपको बता दें कि, भारत दुनिया में चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा प्याज उत्पादक देश है। जहां महाराष्ट्र में 30 प्रतिशत प्याज उत्पादन के साथ पहले स्थान पर है इसके बाद कर्नाटक 15 प्रतिशत उत्पादन के साथ दूसरे स्थान पर आता है।
  3. राजस्थान के भीलवाड़ा में इस बार किसान सरकारी खरीद कांटों पर गेहूं बेचने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जहां भीलवाड़ा में समर्थन मूल्य खरीद केन्द्र पर पांच दिन में एक भी किसान नहीं आया है। तो वहीं गुलाबपुरा को छोड़कर जिले के अन्य खरीद केन्द्रों का भी यही हाल है। दरअसल, किसानों का कहना है कि, समर्थन मूल्य और मंडी के भाव में कुछ खास अंतर नहीं है। किसानों का कहना है कि, मंडी में गेंहू का भाव 1825 रुपए प्रति क्विंटल मिल रही हैं जो कि लगभग सरकारी समर्थन मूल्य के बराबर ही है। इसी के साथ, मंडी में हाथों-हाथ पैसा मिल जाता है। तो वहीं सरकारी कांटे पर खानापूर्ति ज्यादा होती है। वहां तारीख आने पर माल लेकर पहुंचो। और फिर पैसा बैंक में आने का इंतजार करों.. आपको बता दें कि, सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 1840 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया हुआ है। लेकिन कागजी कार्रवाई,  टोकन लेना और तारीख के हिसाब से माल लाने के झंझट से बचने के लिए किसान क्रय केंद्रों से ज्यादा रूचि मंडी में व्यापारियों को गेहूं को बेचने में ले रहे हैं।

 

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