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एकीकृत उद्यान विकास योजना के तहत किसानों को मिलेगा 50% का अनुदान

एकीकृत उद्यान विकास योजना

एकीकृत उद्यान विकास योजना के तहत किसानों को मिलेगा 50% का अनुदान

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बिहार देश का एक ऐसा राज्य, जहां अधिकतर आबादी ग्रामीण है और राज्य में 75 फीसदी से ज्यादा लोगों की जीविका का साधन है खेती, लेकिन राज्य में किसान की स्थिति की स्थिति दुरुस्त नहीं। किसान की स्थिति में सुधार और कृषि को फायदे का सौदा बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार योजनाओं के माध्यम से किसानों को लाभान्वित, प्रोत्साहित और समृद्ध बनाने के प्रयास लगातार कर रही है, हालांकि सभी योजनाओं का सौ फीसदी लाभ तो किसानों को नहीं मिल पाता, हां इन योजनाओ के माध्यम से बहुत से किसानों के लिए कृषि में सफल होने के नए द्वार खुल जाते हैं, ऐसी ही एक योजना है बिहार एकीकृत उद्यान विकास योजना। जो शत-प्रतिशत राज्य से वित्त पोषित योजना है। इस योजना के तहत अंतरवर्ती फसलों की खेती के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा औऱ योजना के तहत किसानों को अंतरवर्ती फसलें लगाने के लिए 50 फीसदी अनुदान भी दिया जा रहा है।
एकीकृत उद्यान विकास योजना
किसान की एक ही फसल पर निर्भरता खत्म हो और आमदनी में इजाफा हो इसके लिए देशभर में किसानों को एकसाथ एक ही खेत में एक से अधिक फसलें लगाने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है। बिहार राज्य ने भी इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए अंतरवर्ती फसल कार्यक्रम की शुरुआत की है। जिसके तहत फलों की बागवानी करने वाले किसान फलदार पौधों के बीच हल्दी, अदरक और ओल आदि लगाकर अपनी आमदनी में इजाफा कर सकते हैं। किसानों द्वारा अंतरवर्ती फसल कार्यक्रम के अंतर्गत खेत में एक ही समय में ये विभिन्न फसलें लगाने के लिए बिहार सरकार की ओर से बतौर प्रोत्साहन 50 फीसदी राशि अनुदान के रूप में दी जाएगी।
अंतरवर्ती फसल पद्धति को अपनाने से किसान को एक ही समय में एक से अधिक फसलें लगाने से अतिरिक्त लाभ तो मिलता ही है साथ ही उत्पादन में भी बढ़ोत्तरी होती है। एकीकृत उद्यान विकास योजना के माध्यम से सरकार किसानों को उद्यान क्षेत्र में अतिरिक्त संभावना वाले घटकों के लिए आर्थिक सहायता देकर उनकी आय के नए रास्ते बनाना चाहती है ताकि किसान परंपरागत फसलों से अलग आमदनी के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार कर सके। इस कार्यक्रम में शुष्क क्षेत्रों में फलों का प्रत्यक्षण, अंतरवर्ती फसल को बढ़ावा देना, लत्तीदार सब्जियों हेतु अलान का अस्थायी निर्माण और गुणवता पूर्ण सब्जियों के पौध वितरण का कार्य भी शामिल है।

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बिहार राज्य पोषित एकीकृत उद्यान विकास योजना को अभी राज्य के 12 जिलों भागलपुर, सहरसा, सीतामढ़ी, शिवहर, मुज्जफरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, पूर्वी चम्पारण, पश्चिम चम्पारण, दरभंगा, बेगुसराय और खगड़िया में लागू किया गया है। इन जिलों में अंतरवर्ती फसल कार्यक्रम का भौतिक लक्ष्य 3999 हेक्टेयर रखा गया है, जिस पर 852 लाख रूपये की अनुदान राशि का प्रावधान किया गया है।
योजना का लाभ लेने वाले किसानों को उनके प्रति हैक्टेयर बगीचे की खाली जमीन पर हल्दी, अदरक और ओल की खेती करने के लिए बीज और जैविक उत्पादन पर व्यय होने वाली राशि का 50 फीसदी राज्य सरकार की ओर से अनुदान दिया जाएगा। एक बात और, कि जैविक उत्पादन पर व्यय होने वाली राशि और राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा इन तीन फसलों के बीज के लिए निर्धारित राशि, इनमें से जिसकी भी रकम कम होगी, उसकी 50फीसदी राशि का भुगतान अनुदान के रूप में सीधे किसान के बैंक खातों में किया जाएगा।

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एकीकृत उद्यान विकास योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसानों के लिए बिहार सरकार ने ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरु की है, आवेदन करने वाले किसान के पास डीबीटी नंबर होना चाहिए, यदि डीबीटी नंबर नहीं है तो आप आधार नंबर से भी आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन करने के लिए आपको इस लिंक पर क्लिक करना होगा। http://horticulture.bihar.gov.in/HORTMIS/OnlineAppIntegratedHorti.aspx  योजना से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए आप बिहार हॉर्टिकल्चर की वेबसाइट पर क्लिक कर सकते हैं ( http://horticulture.bihar.gov.in/ ) योजना से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए आप अपने जिले के उद्यानिकी विभाग कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं औऱ इस योजना का लाभ ले सकते हैं।

Writer : Producer & Anchor – स्मिथा सिंह 

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