March 7, 2021

Grameen News

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क्या आपके मन में भी उठ रहा है ये सवाल, कानूनों की वापसी के लिए आया किसान, क्य़ों कर रहा है ट्रैक्टर परेड?

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दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसान बहुतों को अखर रहे हैं और बहुतों को उनका गुस्सा और मांगें वाजिब भी लग रही हैं, हां वो अलग बात है कि सरकार और किसानों के बीच 11 दौर में 55-60 घंटे बातचीत होने के बाद भी इस समस्या का कोई मुफीद हल नहीं निकल सका है। किसानों और सरकार के बीच आखिरी बातचीत के बाद अभी डैड लॉक की स्थिति है। ना सरकार ने आगे की बातचीत के लिए कोई तारीख दी है और ना किसानों ने कानूनों के रद्द करने का कोई दूसरा विकल्प सरकार को सुझाया है। इसी बीच आंदोलन कर रहे ये किसान, अब गणतंत्र दिवस के अवसर पर ट्रैक्टर परेड निकालने जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि राजपथ की आधिकारिक परेड के बाद वे भी अपने खेतों के संगी ट्रेक्टरों के साथ दिल्ली की सड़कों पर परेड करेंगे।

अब इस ट्रैक्टर परेड को लेकर कई लोगों के बीच से कुछ सवाल जो बहुत ज्यादा उठ रहे हैं वो है कि क्या परेड से कृषि कानून वापस हो जाएंगे, क्या किसान यहां परेड करने के लिए आंदोलन कर रहे हैं, ये परेड करके खेतों में काम करने वाले किसान क्या दर्शाना चाहते हैं। तो मुझे ऐसा लगता है कि इन सवालों के जवाब किसी किसान या किसान नेता से लेने की जरूरत ही नहीं, ये सवाल यदि हम खुद से पूछें और शांत मन से उत्तर खोजें तो जवाब भी मिल ही जाएगा।

किसान इस ट्रेक्टर परेड का परिणाम कृषि कानूनों की वापसी के रूप में नहीं देखता, ना ही इस परेड को करने का उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना है बल्कि वो भी देशभक्ति से ओत-प्रोत है और देश के ऐसे लोगों को के समक्ष अपनी देशभक्ति की झलक दिखाना चाहता है जो किसान को मात्र किसान मानते हैं, या फिर किसान अपने हक के लिए आंदोलन करे तो उसे खालिस्तानी और आतंकवादी कह कर संबोधित करते हैं। बेशक इस ट्रकैटर परेड को आयोजित करने वाले किसानों का एक मात्र मकसद और भावना ये दर्शाना है कि किसान की रगों में भी देशभक्ति दौड़ती है, और वैसे भी किसान से बड़ा देशभक्त हो भी कौन सकता है, जो खुद खेतों में रातें बसर करता है और अपने जवान बेटों को देश की सुरक्षा में समर्पित होने के लिए प्रेरित करता है।

इसलिए ट्रेक्टर परेड को लेकर यदि किसी भी मन को ये सवाल मसोस रहा हो कि किसान ट्रेक्टर परेड से क्या दर्शाना चाहता है, तो सरल, साधारण और सटीक उत्तर है कि देश की आजादी के इतने बरस बाद पहली बार माटी के लाल को ये दर्शाने की जरूरत पड़ रही है कि वो अपने वतन की मिट्टी, अपने देश से अथाह प्रेम करता है, और इस गणतंत्र पर मुख्य परेड के उपरांत अपने ट्रेक्टरों की परेड कर, वो गणतंत्र के त्यौहार को सहर्ष मनाना चाहता है, और गणतंत्र का जश्न मनाना किसी अपराध की श्रेणी में नहीं आता, बशर्ते कि वो शांतिप्रिय ठंग से, बिना कानूनों का उल्लंघन किए मनाया जाए, और किसान का आंदोलन व ट्रैक्टर परेड पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होगी इस बात का विश्वास सभी किसान संगठनों ने पुलिस व प्रशासन को पहले ही दिलाया है। हां कुछ उपद्रवी तत्व हैं जो आंदोलन व परेड की शांति भंग करने के लिए प्रयासरत हैं,ऐसे में किसानों की जिम्मेदारी बेशक बढ़ जाती है, कि गणतंत्र का जश्न शांतिपूर्व संपन्न हो और पुलिस-प्रशासन भी इसे शांतिपूर्वक संपन्न कराने में अपना योगदान दे।

Writer : Producer & Anchor – स्मिथा सिंह 

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