February 21, 2024

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सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का बंटाधार, बच्चे शिक्षकों के सामने कर रहे काम

सरकारी विद्यालयों
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यूपी सरकार भले ही सरकारी स्कूल के बच्चों को कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर सुविधा देने का दम रख रही हो। लेकिन सरकारी विद्यालयों की असल हकीकत कुछ और ही है, क्योंकि यूपी के ग्रामीण क्षेत्रो में पढ़ने वाले बच्चो का भविष्य कितना उज्वल है, इसका खुलासा यूपी के कुशीनगर से आई इन तस्वीरों में साफ हो चुका हैं। कि किस तरह सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक उनका बंटाधार कर रहे है।

प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ शिक्षा विभाग में व्याप्त अनियमितताओं को दूर करने का दावा भले ही कर रहे हो लेकिन इसकी असल तस्वीर के पीछे की हकीकत कुछ और ही है, जिसे देखने के बाद तो यही सवाल पैदा होगा, योगी की लाख कोशिशो के बाद भी शिक्षा विभाग अपनी लापरवाहपूर्ण रवैये से बाज क्यों नहीं आ रहा है। शिक्षा विभाग में हर अधिकारी और कर्मचारियों की लापरवाही देखने के बाद ये कहना बिल्कुल गलत नही होगा कि, प्रदेश सरकार भले शिक्षा विभाग को सुधारने में कोई कोर कसर छोड़ना नहीं चाह रही है, पर प्रतिदिन छात्रो के साथ बर्बरता करने, झाड़ू लगवाने जैसे मामले लगातर सामने आना बड़ा सवाल खड़ा करते है। हद तो तब होती है, जब दूसरी तस्वीर यूपी के कुशीनगर से सामने आई।

हालांकि, योगी सरकार के सपने को इन्ही की सरकार में जब शिक्षा विभाग ही पलीता लगाने में लग जाये तो इस तरह के तस्वीरों को देखने के बाद ये भी कहना गलत नही होगा कि खूब पढ़ेगा इंडिया, खूब बढेगा इंडिया, ऐसे पढ़ेगा इंडिया तो कैसे बढ़ेगा इंडिया।

ये तस्वीरें हैं, कुशीनगर के विशुनपुरा ब्लॉक के ग्राम सभा सरपतही के प्राथमिक विद्यालय की, जहां कुछ बच्चे खाना बनाने वाली लकड़ी को नाजुक हाथो से उठा उठा कर स्टोर रूम में रख रहे है। जबकि लकड़ी फेंकते समय एक बच्चे के सर पर चोट भी लगती है, और एक बच्चा रोने भी लगता है,पर पास खड़े शिक्षक नज़र अंदाज़ करते है,

हैरानी वाली बात ये है कि, जिस वक्त बच्चे लकड़ी ढोने का काम कर रहे थे उस वक्त शिक्षक खुद बाहर खड़े थे। और उन्होंने रोकने की जहमत तक नही की, और जब इस बारे में शिक्षक से पूछा गया की आपकी मौजूदगी में बच्चे ये कार्य कर रहे है फिर भी आप रोकने की जगह देख रहे है, तो इस पर शिक्षक महोदय ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि, ये बच्चे अपनी मर्जी से कर रहे है,पर इन महोदय को कौन समझाए की अगर बच्चे अपनी मर्जी से यह कर रहे है तो रोकने की जिम्मेदारी भी तो शिक्षक की है, पर अपनी गलती को बच्चो पर डालना, शिक्षा व्यवस्था की भी पोल खोलता है कि, सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चो के भविष्य को इन विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षक किस तरह बंटाधार कर रहे है।

 

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