February 21, 2024

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‘लिव इन’ को हजारों साल से परंपरा के तौर पर निभा रहे है इस जनजाति के लोग

लिव इन
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लिव इन यानिकी शादी से पहले साथ रहना। लिव इन को कानूनी रूप से भारत में कुछ सालों पहले ही मंजूरी मिली है। और देश के कई लोगों का मानना है। कि लिव इन विदेशी कल्चर है। जिसे अब भारत में भी अपना लिया गया है। लेकिन सच तो कुछ और ही है।

विदेशों में लिव इन रिलेशनशिप करीब 100 साल पहले ही शुरू हुआ है। लेकिन भारत में इसे परंपरा के तौर पर 1000 सालों से चलाया जा रहा है। भारत के राजस्थान राज्य के उत्तर पश्चिम में गारासिया जनजाति के लोग लिव इन को परंपरा के तौर पर हजारों सालों से निभा रहें है। हैरानी की बात तो ये है। कि जिस राज्य के गांवों में लड़कियों के मोबाइल से लेकर जींस तक पहनने की इजाजत मिलना मुश्किल होता है। वहीं एक ऐसी जनजाति के लोग रहते है। जिनके बीच ‘लिव इन’ एक परंपरा है। जिसे वो आज तक निभा रहे है।

इस जनजाति के लोगों की एक अलग बात यें है। कि इनकी इस परंपरा के दौरान लड़का-लड़की शादी से पहले तब तक लिव इन में रह सकते है। जब तक वो अपने रिश्तों को निभाने योग्य नहीं हो जाते है।

कुछ दिनों पहले ही इस गांव में एक 70 साल के बुजुर्ग आदमी और 60 साल की एक महिला ने शादी की है। ये दोनो अपनी जवानी के वक्त से ही लिव इन में रह रहे थे। और शादी से पहले ही इस जोड़ी के 3 बच्चे है। हाल ही, उनके बच्चों की शादी के बाद इस दंपत्ति ने शादी की है। गारासिया समुदाय के लोगों के लिए इस परंपरा के बहुत मायने है।

हालांकि, उनकी ये परंपरा आज के दौर के लिव इन से थोड़ी अलग है। आज के समय में नौजवान लिव इन में आकर कुछ वक्त साथ रहते है। और फिर अलग हो जाते है। लेकिन गारासिया जनजाति की इस परंपरा के अनुसार लड़का और लड़की शादी से पहले तब तक साथ रहते है। जब तक वो एक-दूसरे की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार नहीं हो जाते है।  हमारे देश में आज भी ऐसी कई और अजीबो-गरीब परंपराएं है, जो कई सदियों से चली आ रही हैं।

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