February 21, 2024

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छत्तीसगढ़ के अनूठे इतिहास के बीच कुछ ऐसी है चुनावों की दिलचस्प कहानी 

छत्तीसगढ़
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छत्तीसगढ़ में इस बार के विधानसभा चुनाव हर बार से ज़रा हटकर हैं। क्योंकि इस बार चुनावों में बहुत कुछ ऐसा हुआ है जो पहले कभी नहीं हुआ। जैसे छत्तीसगढ़ का सबसे मजबूत चेहरा अजीत जोगी जीत के लिए गठबंधन के आगे घुटने टेकते नज़र आए। वहीं मायावती की छत्तीसगढ़ में शुरू हुई पारी भी इस बार के चुनावों को कुछ अलग मोड़ देती नज़र आई। वहीं इतने सालों से सत्ता पर काबिज़ रमन सरकार के बारे में इस बार कुछ कहना जरूर मुश्किल हैं। राहुल गाँधी की रैलियां और माया जोगी का गठबंधन इस पर भारी भी पड़ सकता है। जाहिर तौर पर ऐसे में हर किसी की छत्‍तीसगढ़ में दिलचस्‍पी बढ़ना स्‍वाभाविक है। प्रदेश में होने वाले पहले चरण के चुनाव 12 नवंबर को निपट गए अब राज्‍य की 90 सीटों के लिए दूसरे चरण का मतदान 20 नवंबर को होगा।
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सिर्फ चुनावों की वजह से ही छत्तीसगढ़ चर्चाओं में नहीं है बल्कि अपनी संस्कृति अपने अनूठेपन के लिए भी छत्तीसगढ़ एक अलग ही खासियत रखता है।
भौगोलिक दृष्टि से छत्तीसगढ़ का नाम देश के 10वें सबसे बड़े और 17वीं सबसे घनी आबादी वाले राज्यों में आता है। ऐसा माना जाता है कि इस अंचल में 36 प्राचीन किलों के आधार पर इसका नाम छत्‍तीसगढ़ पड़ा। दरअसल छत्तीसगढ़ का भी अपना अलग ही इतिहास है। कहा जाता है कि प्राचीन काल में इसको दक्षिण कोशल कहा जाता था। मगर मराठा साम्राज्‍य के दौर में ही छत्तीसगढ़ नाम मशहूर हुआ। 1795 के एक आधिकारि‍क दस्‍तावेज में इस नाम का पहली बार इस्‍तेमाल हुआ।

इतिहासकारों का मानना है कि छत्‍तीसगढ़ चेदिसगढ़ के नाम से भी जाना जाता था। चेदिसगढ़ दरअसल चेदि राजवंश से जुड़ा हुआ है। प्राचीन काल में ओडिशा में चेदि वंश का साम्राज्‍य था। उस वक़्त छत्‍तीसगढ़ अंचल उसी के अंतर्गत आता था। 1803 तक छत्‍तीसगढ़ का पूर्वी हिस्‍सा ओडिशा के संबलपुर रियासत का हिस्‍सा था। लेकिन 1 नवंबर, 2000 को 10 छत्‍तीसगढ़ी और 6 गोंडी भाषा बोलने वाले जिलों को मिला दिया गया और उसके बाद बना छत्तीसगढ़ राज्य।

उस वक़्त छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का राज था मगर जल्द ही 2003 में अजीत जोगी के नेतृत्‍व में कांग्रेस की पराजय के बाद यहां बीजेपी सत्‍ता में आ गई। तब से लेकर अब तक बीजेपी ही यहां सत्ता में है। मगर इस बार जीत का सेहरा अपने सर पर बाँधने का सपना देखने वाली बीजेपी की राह में भी बड़े रोड़े हैं। वहीं जोगी माया गठबंधन को उम्मीद है कि इस बार वो कुछ ऐसा कर जाएंगे जिससे इतिहास बन जाएगा। कांग्रेस की राह हालांकि इतनी आसान नहीं है मगर राहुल के भरोसे सपने कांग्रेस ने भी खूब देखे हैं ऐसे में बस कुछ ही समय है ये देखने के लिए कि छत्तीसगढ़ में जीत का ये सेहरा आखिर किसके सर पर सजता है।

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