February 21, 2024

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कोरोना की दहशत से महिलाएं नहीं गईं अस्पताल, 877 शिशुओं और 61 माताओं की मौत

meghalay news

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देश में चल रहे हैं वेक्सिनेशन अभियान के चलते और कोरोना को लेकर बढ़ी जागरूकता के बीच अब लोगों में कोरोना का डर कम ही दिखाई दे रहा है। मगर एक समय वो भी था जब देश में कोरोना की शुरुवात हुई थी। उस वक़्त ना लोगों को जागरूकता थी, ना ही इस बीमारी को लेकर कोई समझ थी। ऊपर से कोरोना की दूसरी लहर में जो मौत का मंजर देखा गया उसने तो लोगों के मन में इसकी दहशत दोगुनी कर दी थी। ऐसे में लोग अस्पताल जाने के नाम से भी घबरा रहे थे, कि कहीं ऐसा ना हो कि वो सामान्य इलाज के लिए अस्पताल जाएं और उन्हें कोरोना हो जाए। ऐसे ही अफवाह और डर के चलते मेघालय में संक्रमण के डर से गर्भवती महिलाओं ने अस्पतालों में प्रसव कराने से मन कर दिया। जिसकी वजह से 877 नवजात शिशुओं और 61 माताओं की मौत हो गई। ये सभी वो महिलाएं थी जिन्होंने कोरोना के संक्रमण के डर से अस्पताल में डिलीवरी करवाने से मना कर दिया था। इन महिलाओं ने घर पर ही प्रसव करने का फैसला लिया। मगर चिकित्सकीय सुविधा के अभाव और डॉक्टर की देखभाल में ना होने के कारण इन महिलाओं की मौत हो गई। परिवार के गलत फैसलों के चलते कई नवजात शिशुओं ने भी पैदा होते ही डीएम तोड़ दिया। दरअसल खुद मेघालय सरकार ने ये जानकारी राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को दी है। एनएचआरसी ने हाल ही में मेघालय में अधिक संख्या में नवजात शिशुओं और प्रसूताओं की मौत दर्ज की थी। जिसके बारे में मेघालय सरकार से इसकी रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान कोरोना के मरीजों और गैर-कोविड-19 मरीजों को अलग-अलग रखा जा रहा था। उस दौरान किसी दूसरी बीमारी के इलाज से पहले कोरोना की जांच अनिवार्य थी। बस इसी डर के चलते कितने ही मरीज वापस लौट गए और अस्पताल में आने से कतराने लगे। आशा कर्मचारी नियमित रूप से महिलाओं के घर में जा करके उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही थीं और उनसे प्रसव के लिए अस्पताल आने का अनुरोध कर रही थीं। मगर इसके बाद भी महिलाओं और उनके घरवालों को मनाने में सरकार कामयाब नहीं हो सकी। हालांकि अब पूरे देश में कोरोना के मामलों में कमी देखी जा रही है। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने बताया कि दूसरे राज्यों से आने वाले फुली वैक्सीनेटेड लोगों को अब से राज्य में प्रवेश करने से पहले आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। बाकि नियमों में भी अब पूरी तरह से ढील दे दी गई है।

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