February 21, 2024

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भिखारी के साथ सेक्स वर्कर्स से वसूला जायेगा “केयरिंग टैक्स”

भिखारी के साथ सेक्स वर्कर्स से वसूला जायेगा "केयरिंग टैक्स"

भिखारी के साथ सेक्स वर्कर्स से वसूला जायेगा "केयरिंग टैक्स"

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अगर देश में टैक्स पेयर की बात करें तो लगभग 135 करोड़ की जनता में महज 7 करोड़ लोग ही ऐसे हैं. जो टैक्स पे करते हैं. हालांकि इस समय एक ऐसी खबर आ रही है कि, वो आपको सोचने समझने पर मजबूर कर देगी. क्योंकि उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में फरीदपुर नगर पालिका परिषद आगामी दिनों में भिखारियों और सेक्स वर्कर्स से टैक्स वसूल सकता है. हालांकि इस वसूली रकम को टैक्स का नाम ना देकर केयरिंग चार्ज मतलब की देखभाल शुल्क कहा जायेगा. नगर पालिका परिषद ने अपनी आय में इजाफा करने के लिए केयरिंग चार्ज से जुड़ा प्रस्ताव तैयार किया था. जिसको पारित कर दिया गया है.

इस प्रस्ताव के तहत भीख मांगने वालों और वेश्याओं से 500 से 2000 रुपए के बीच यह टैक्स वसूली की जायेगी. फरीदपुर नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष पूनम गुप्ता ने जानकारी दी है कि, इस संबंध में अंतिम फैसला उचित सलाह-मशविरा और लोगों के सुझाव के बाद ही लिया जाएगा, जिसमें लोगों की राय ही सर्वोपरि होगी.

हालांकि उन्होंने बताया कि, इसके साथ नगर पालिक अपनी आय बढ़ाना चाहती है. ताकि उस रकम से शहर में विकास कार्य किए जा सकें. यह प्रस्ताव अभी पास हुआ है. इसके साथ हमने इस पर लोगों से आपत्तियां भी मांगी है. अगर किसी को भी इस पर कोई आपत्ति होगी, तो उसमें सुधार किया जाएगा. हम वही करेंगे, जो जनता चाहेगी.”

हालांकि हमें अभी तक इस प्रस्ताव पर कई सामाजिक संगठनों की कड़ी आपत्ति मिल चुकी हैं. चेतना समिति ने इस टैक्स का कड़ा विरोध किया है. सामाजिक संस्था ने इसी के साथ टैक्स के प्रस्ताव को पास करने से जुड़ी प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगाए हैं. इसके साथ संस्था का कहना है कि, अगर भीख मांगना और वेश्यावृत्ति अवैध है, तब उस पर टैक्स कैसे लगाया जा सकता है..?

वहीं दूसरी तरफ समिति की अध्यक्ष बीएन अग्रवाल ने बताया कि भीख मांगना और वेश्यावृत्ति, ये दोनों ही कार्य अपराध की श्रेणी में आते है. तो फिर नगर पालिका परिषद ने ये प्रस्ताव किस आधार पर पास कर दिया है..? जबकि केंद्र सरकार चाहती है कि देश से वेश्यावृति और भीख मांगने की प्रथा को जड़ से खत्म की जाएं.”

वहीं अगर रिपोर्ट की मानें तो, नगर पालिका परिषद ने केयरिंग चार्ज के दायरे में तकरीबन 62 बिंदु रखे हैं, जिनमें भिखारी और वेश्यावृत्ति शामिल हैं. परिषद ने इस बाबत सभी 62 बिंदुओं से जुड़ा विज्ञापन भी अखबार में छपवाया था, जिसमें प्रस्ताव को लेकर आपत्तियां मांगी गईं.

भले ही इस टैक्स का नाम केयरिंग चार्ज हो, हालांकि इस वसूली में कुछ भी केयरिंग जैसा नहीं है. क्योंकि नगर पालिका ना तो कभी किसी भिखारी की जिम्मेदारी लेता है और ना ही सेक्स वर्कर्स की. ऐसे में नगर पालिका का कोई हक नहीं बनता की वो इन लोगों से किसी भी तरह की वसूली करे.

 

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