February 21, 2024

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देशभर में लोहड़ी की धूम, इसलिए ख़ास होता है ये पर्व 

देशभर में लोहड़ी की धूम, इसलिए ख़ास होता है लोहड़ी पर्व 
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देशभर में लोहड़ी की धूम, इसलिए ख़ास होता है ये पर्व   देश भर में लोहड़ी पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। पूरा देश इस वक़्त ऐसे ही उल्लास से सजा हुआ है। ढोल-ताशे पर भांगड़ा और गिद्दा का माहोल लोहड़ी पर्व के प्रति आस्था को और भी ज़्यादा बढ़ा देता है। इस दिन पारंपरिक गीतों के साथ आग में रेवड़ी, मूंगफली, पट्टी व मखाना डालकर लोग पर्व की खुशियां मनाते हैं। यह दिन पौष मास की अंतिम रात्रि और मकर संक्रान्ति की पूर्वसंध्या को पड़ता है. इसे सर्दियों के जाने और बसंत के आने के संकेत के रूप में भी देखा जाता है. लोहड़ी पर्व रबी की फसल की बुनाई और कटाई से जुड़ा हुआ है. किसान इस दिन रबी की फसल जैसे मक्का, तिल, गेहूँ, सरसों, चना को अग्नि को समर्पित करते है और भगवान् का आभार प्रकट करते है. देखिए लोहड़ी पर हमारी ये ख़ास रिपोर्ट।

लोहड़ी की शाम को लोग प्यार और भाईचारे के साथ लोकगीत गाते है और किसी खुले स्थान पर लकड़ियों और उपलों से आग जलाकर उसकी परिक्रमा करते है. ढोल और नगाड़ों का साथ डांस, भांगड़ा और गिद्दा से भी माहौल खुशनुमा हो जाता है। आग के चारों ओर बैठकर रेवड़ी, गजक और मूंगफलियों का आंनद लिया जाता है. और इन्हें प्रसाद के रूप में सभी लोगो को बांटा जाता है.

लोहड़ी पर शाम को परिवार के लोगों के साथ अन्य रिश्तेदार भी इस उत्सव में शामिल होते हैं। बधाई के साथ अब तिल के लड्डू, मिठाई, ड्रायफूट्‍स आदि देने का रिवाज भी चल पड़ा है फिर भी रेवड़ी और मूंगफली का विशेष महत्व बना हुआ है। इसीलिए रेवड़ी और मूंगफली पहले से ही खरीदकर रख ली जाती है। बड़े-बुजुर्गों के चरण छूकर सभी लोग बधाई के गीत गाते हुए खुशी के इस जश्न में शामिल होते हैं। इस पर्व का एक यह भी महत्व है कि बड़े-बुजुर्गों के साथ उत्सव मनाते हुए नई पीढ़ी के बच्चे अपनी पुरानी मान्यताओं एवं रीति-रिवाजों का ज्ञान प्राप्त कर लेते हैं ताकि भविष्य में भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी उत्सव चलता ही रहे। ढोल की थाप के साथ गिद्दा नाच का यह उत्सव शाम होते ही शुरू हो जाता है और देर रात तक चलता ही रहता है। वहां सभी उपस्थित लोगों को यही चीजें प्रसाद के रूप में बांटी जाती हैं। इसके साथ ही पंजाबी समुदाय में घर लौटते समय ‘लोहड़ी’ में से 2-4 दहकते कोयले भी प्रसाद के रूप में घर लाने की प्रथा आज भी जारी है। जिस घर में नयी नयी शादी या बच्चे का जन्म होता है वहां खासतोर पर लोहड़ी धूमधाम से मनाई जाती है।

इस उत्सव का एक अनोखा ही नजारा होता है। लोगों ने अब समितियां बनाकर भी लोहड़ी मनाने का नया तरीका निकाल लिया है। ढोल-नगाड़ों वालों की पहले ही बुकिंग कर ली जाती है। लोहड़ी एवं मकर संक्रांति एक-दूसरे से जुड़े रहने के कारण सांस्कृतिक उत्सव और धार्मिक पर्व का एक अद्भुत त्योहार है।

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