December 2, 2020

Grameen News

True Voice Of Rural India

कल से बदल जाएगा आपका राशन कार्ड, प्रवासी मजदूरों को मिलेगा लाभ

वन नेशन वन राशन कार्ड

1 जून से पूरे देश में शुरू होगी वन नेशन वन राशन कार्ड योजना

Sharing is caring!

वन नेशन वन राशन कार्ड- भारत सरकार की ये महत्वकांक्षी योजना 1 जून 2020 से लागू होने जा रही है। जीएसटी जो कि, सरकार 2016 में एक देश एक टैक्स के नाम पर लेकर आई थी। उसके बाद मोदी सरकार का उसी स्लोगन पर ये दूसरा बड़ा रिफॉर्म है। जैसा कि, नाम से हीं स्पष्ट है कि, एक देश में सिर्फ एक राशन कार्ड। यानि अब आप देश के किसी कोने में हो अपने पास पड़े अपने राशन कार्ड को दिखाकर आप सरकार की ओर से मिलने वाले राशन को प्राप्त कर सकते हैं।
वैसे आज के दौर में सरकार का ये वन राशन कार्ड वाला फैसला अपने आप में बड़ा अहम हो जाता है। वैसे मोदी सरकार ने इस योजना को लागू करने की तैयारी बहुत पहले ही शुरू कर दी थी। लेकिन कोरोना काल में इस योजना का लागू होना देश में फूड सिक्योरिटी के कानून को और मजबूती देने की दिशा में एक मजबूत कदम है। सरकार की ये महत्वकांक्षी योजना 1 जून से 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो जाएगी। वहीं सरकार की माने तो, 2021 तक ये योजना पूरे देश में लागू हो जाएगी।

कैसे काम करेगी यह योजना

राष्ट्रीय खादय सुरक्षा अधिनियम 2013 के अनुसार, करीब 81 करोड़ लोग देश में ऐसे हैं जो सरकार की ओर से मिलने वाले सब्सिडाइज राशन यानि कि, चावल Rs 3/kg, गेहूं/आटा -Rs2/kg  और मोटा आनाज Rs1/केजी, अपने नजदीकी  फेयर प्राइस शॉप (एफपीएस) या टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (टीडीपीएस) के जरिए प्राप्त करते हैं।  नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट के अनुसार देश भर में फिलहाल 23 करोड़ राशन कार्ड जारी किए गए है।जिसका फायदा 80 करोड़ लोग लेते हैं।
मौजूदा राशन वितरण सिस्टम के अनुसार एक राशन कार्ड धारक व्यक्ति एफपीएस से राशन ले सकता है जो उसके लिए चुना गया होगा। आम तौर पर ये राशन की दुकानें उसके आस-पास के एरिया में मौजूद होती है।जहां वो रहता है। लेकिन ‘ वन नेशन वन राशन कार्ड ‘ के लागू होने के बाद अब  ये सिस्टम बदल जाएगा। यह कुछ इस तरह से काम करेगा-
मान लीजिए कि मैं राशन कार्ड धारक हूं और मैं बिहार के पूर्वी चंपारण  का रहने वाला हूं। तो अभी तक होता क्या था कि मैं पूर्वी चंपारण के जिस इलाके में रहता हूं वहां के नजदीकी राशन की दुकान से राशन ले सकता हूं बाकी किसी जगह से नहीं। लेकिन मान लीजिए अगर मैं बिहार से निकल कर दिल्ली आ गया तो यहां के लिए मेरा वो राशन कार्ड बेकार हो जाएगा। मतलब मैं उस राशन कार्ड को दिखाकर यहां के किसी भी एफपीएस से राशन नहीं ले सकता हूं।लेकिन अब नए कानून के अनुसार मैं अपने बिहार वाले राशन कार्ड पर ही दिल्ली के किसी भी एफपीएस से राशन ले सकूंगा।
राशन कार्ड
1 जून से पूरे देश में शुरू होगी वन नेशन वन राशन कार्ड योजना

तकनीक आधारित होगा राशन वितरण प्रोग्राम

सरकार की ओर से लाया जा रहा ये नया सिस्टम पूरी तरह से तकनीक के आधार पर काम करेगा।  इलेक्ट्रॉनिक प्वाइंट ऑफ सेल  जो एफपीएस पर लगाएं गए हैं उनकी मदद से धारक के बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन होगी। जिसके बाद धारक उस हिसाब से राशन खरीद सकेगा जो उसके राशन कार्ड पर अंकित होगी। इस नए राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी का मुख्य उद्देश्य राज्य के बाहर और राज्य के अंदर, दोनों जगह राशन कार्ड धारकों को राशन की उपलब्धता आसानी से करना है।
इस काम के लिए इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट ऑफ पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (IM-PDS) की वेबसाइट http://www.impds.nic.in/ एक तकनीकी प्लेटफॉर्म देगी, ताकि राशन कार्ड की अंतर्राज्यीय पोर्टेबिलिटी को सुनिश्चित किया जा सके। यानि इसी के माध्यम से कार्ड धारक दूसरे राज्य में एक राशन कार्ड से राशन लेने में सक्षम होगा। वहीं एक और portal annavitran.nic.in, के जरिए सरकार ई- पीओएस के जरिए वितरित किए जा रहे राशन के डाटा का लेखा जोखा रखेगी।
अन्न वितरण पोर्टल के माध्यम से प्रवासी व्यक्ति अपने राज्य के भीतर के दूसरे जिलों में राशन लेने में सक्षम हो पाएगा। वहीं एक व्यक्ति खादय सुरक्षा नियम के तहत देश में कहीं से भी किसी भी जगह से अपनी पात्रता के अनुसार राशन खरीद सकता है।इसके आलावा उसका परिवार अपने घर पर अपनी पत्रता के अनुसार अपने डीलर से सब्सिडाइज आनाज़ खरीद सकते हैं।

कितना फायदेमंद है वन राशन कार्ड सिस्टम

One nation one ration card  को लेकर सरकार की तैयारी बहुत पहले से चल रही थी। इसी को लेकर राशन कार्ड को आधार लिंक किया गया और राशन दुकानों और देलारों को ई – पीओएस मशीनों से लैस किया गया। सरकार के आंकड़ों की माने तो देश भर के 500,000 राशन दुकानों में से 90 प्रतिशत दुकानें ई – पीओएस से जुड़ी हुई हैं, वहीं देश भर के 220 मिलियन राशन कार्ड धारकों में से 90 प्रतिशत लोगों ने अपने राशन कार्ड को आधार से लिंक कराया है।
सरकार की माने तो इस नए सिस्टम का फायदा देश के 140 मिलियन माइग्रेंट वर्कर्स यानि प्रवासी मजदूरों को मिलेगा। हाल के दिनों में इस नए प्रोग्राम की अहमियत और ज्यादा बढ़ गई है। कोरोना महामारी के कारण आज देश के बड़े शहरों में काम की तलाश में गए प्रवासी मजदूरों के हालात बहुत खराब हैं। लॉक डाउन के कारण काम धंधा सब बंद पड़ा है, ऐसे में इनके पास अपने घर को वापस लौटने के आलावा कोई दूसरा चारा नहीं है। राज्य सरकारों की ओर से दावा तो किया जा रहा है लेकिन वो सिर्फ खाना पूर्ति भर है। ऐसे में अब जब वन राशन कार्ड सिस्टम लागू होगा तो ये प्रवासी मजदूर अपने आधार कार्ड की बदौलत इन जगहों पर ही अपने नाम का राशन खरीद सकेंगे।  कोरोना के बाद आगे अगर ऐसी कोई आपदा आती है तो वन राशन कार्ड का ये नया नियम इन प्रवासी मजदूरों के लिए राम बाण साबित होगा।
भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम :  इस नए नियम से सरकार का दावा है कि राशन कार्ड को लेकर होने वाले भ्रष्टाचार में कमी आएगी। गांव में किसी के नाम का राशन कोई उठा लेता है, या फिर डीलर भी राशन में घपला करते हैं, वहीं कई जगहों पर फर्जी राशन कार्ड बना कर लोग गरीबों को मिलने वाले राशन की उगाही कर लेते हैं। लेकिन वन राशन कार्ड का कानून जो कि आधार और बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पर आधारित है, इन सभी कालाबजारियों पर रोक लगा देगा। इससे लोगों की परेशानी भी कम होगी और गलत तरीके से राशन लेने का झंझट भी खत्म हो जाएगा।
आपको क्या करना होगा? 
इस नए नियम को लेकर आपको बता दें कि राशन कार्ड धारकों को अपना पुराना कार्ड सरेंडर नहीं करना होगा, बल्कि एक नया कार्ड बनवाना होगा। अब राशन कार्ड दो भाषाओं में जारी होगा, एक स्थानीय भाषा और दूसरी भाषा  हिंदी या अंग्रेजी, दोनों का विकल्प मौजूद होगा।
 भारत का कोई भी नागरिक राशन कार्ड के लिए अप्लाई कर सकता है। अगर आप राशन कार्ड के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो आपको अपने राज्य के खाद्य और रसद विभाग की ऑफीशियल वेबसाइट पर जाना होगा। इसके बाद आपको अपनी भाषा का विकल्प चुनना होगा जिसके बाद आपको अपनी पर्सनल डिटेल देनी होगी, जैसे- नाम, क्षेत्र, जिला, पंचायत आदि। इसके बाद आपको अपने कार्ड का प्रकार चुनना होगा. इसके बाद आपके परिवार की जानकारी मांगी जाएगी, जिसे दर्ज करने के बाद आप फॉर्म सबमिट कर सकते हैं।
Inspiring And Positive Stories हिंदी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © Rural News Network Pvt Ltd