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एफ़एमसीजी उद्योग पर मंडरा रहा मंदी का खतरा, ग्रामीण बाजार में आई कमी

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FMCG

प्रतिकात्मक चित्र

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देश में मौजूदा समय में उद्योग क्षेत्र मंदी का सामना कर रहे हैं, जिसका असर सीधा देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत की अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। पहले ऑटो के साथ-साथ और भी कई उद्योगो पर मंदी का संकट गहराता जा रहा है। देश का एक बड़ा बाजार ग्रामीण क्षेत्र में हैं। ऐसे कई उद्योग क्षेत्र है जिनका ग्रामीण क्षेत्रों में एक बड़ा बाजार है, लेकिन इस बार ग्रामीण बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई है। जिससे एफ़एमसीजी उद्योग पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है। एफ़एमसीजी उद्योग का एक बड़ा बाजार ग्रामीण बाजार में हैं। हाल ही में आई नीलसन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले 7 सालों में ग्रामीण क्षेत्रों में एफ़एमसीजी उत्पादों की मांग सबसे कम रह गई है। मौजूदा वित्त वर्ष में पिछले साल की तुलना में एफ़एमसीजी उत्पादों की मांग आधे से भी कम रह गई है।

पिछले साल की तुलना में आधे से भी कम रह गई वृद्धि दर

नीलसन द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारतीय एफ़एमसीजी बाजार ने 2019 कि दूसरी तिमाही में 7.3 फीसदी कि वैल्यू ग्रोथ हासिल कि थी। जो पिछले साल कि दूसरी तिमाही में हुई बढ़त 16.2 फीसदी के आधे से भी कम है। 2018 कि तीसरी तिमाही में ग्रामीण क्षेत्रों में एफ़एमसीजी उत्पादों कि वृद्धि दर 20 फीसदी थी, जो इस साल दूसरी तिमाही में 5 फीसदी ही रह गई है। इसको एफ़एमसीजी कंपनियों के लिए एक चुनोती के रूप में देखा जा रहा है। ग्रामीण बाजार में ग्राहकों ने छोटे उत्पाद खरीदने में भी कटौती कि है।

इस तरीके से गिरता हुआ बाजार और आर्थिक सुस्ती चिंता का विषय है। जिस तरीके बाजार गिर रहा है उससे न सिर्फ बड़े कारोबारियों की चिंता बढ़ रही है बल्कि छोटे कारोबारियों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालांकि नीलसन ने अपनी रिपोर्ट में चालू कलेंडर वर्ष की अंतिम तिमाही तक स्थिति में सुधार नहीं होने का अनुमान जताया है, हालांकि 2020-21 की पहली तिमाही में मामूली सुधार की उम्मीद जताई है। हालांकि ऑनलाइन मार्केट में बाजार 13 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है।

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