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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की किसानों को जरुरी सलाह

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भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की किसानों को जरुरी सलाह

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की किसानों को जरुरी सलाह

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देशभर में बदलते मौसम का कृषि पर ख़ासा प्रभाव पड़ता है। यहीं कारण है कि बदलते मौसम से कृषि में होने वाले नुकसान को लेकर मौसम विभाग पहले ही किसानों को अलर्ट जारी कर देता है। देश के कुछ राज्यों में लगातार बारिश हो रही है वहीं कुछ राज्यों में सूखा पड़ा हुआ है। इस मौसम में किसानों की सहायता के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने किसानों को अगले दो दिनों का मौसम पूर्वानुमान जारी कर कुछ ख़ास सलाह दी हैं। जिससे किसान वर्षा के दौरान फसलों और पशुओं को होने वाले नुक्सान से बच सकें।

ये रहेगा मौसम का हाल

भारत मौसम विज्ञान विभाग भोपाल द्वारा बताया गया है कि अधिकांश क्षेत्रों में घने बादल होने के कारण अगले दो दिनों में मध्यम से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इस दौरान अधिकतम तापमान 25 से 27 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22 से 23 डिग्री सेंटीग्रेट हो सकती है। वहीं इस दौरान हवा में अधिकतम 95 से 99 प्रतिशत और न्यूनतम 77 से 83 प्रतिशत नमी रहने की संभावना है। आने वाले दिनों में हवा की दिशा उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पश्चिम दिशाओं में 7—10 से 16 कि.मी. प्रति घंटे की गति से चलने की संभावना भी संभावना मौसम विभाग ने जताई है। ऐसे में अगले दो दिनों के पुर्वानुमान को लेकर किसानों को फसल के अनुसार सामान्य सलाह दी गई है, जिससे किसान अपनी फसलों का बचाव करते हुए अच्छा उत्पादन कर सकें।

किसान भाई खेतों में जल निकासी की व्यवस्था अवश्य करें

मौसम विभाग ने किसान भाइयों को सलाह देते हुए कहा है कि वे खेतों में नींदानाशक दवाओं और नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों का उपयोग नही करें। साथ ही कहा है कि सब्जियों, दलहनी और तिलहनी फसलों, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, कपास, गन्ना, उद्यानिकी फसलों आदि में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें। जिन स्थानों पर पानी संग्रहण के लिए कुंए, तालाब या अन्य साधन है वहां पम्प द्वारा पानी खाली करें जिससे फसलों को अत्यधिक नुकसान से बचाया जा सके। प्रकाश प्रपंच का उपयोग कर वयस्क कीट को आकर्षिक करके नष्ट कर दें। वहीं मक्का फसल में फॉल आर्मी वार्म कीट के प्रकोप की संभावना को देखते हुए फसल की सतत निगरानी करें।

साथ ही सुझाव दिया गया है कि खेत में इल्ली का प्रकोप होने पर स्पिनोसेड 45 एस.सी./0.3 मि.ली.या इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एस.जी./0.4 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। वहीं मक्का में झुलसा रोग का प्रकोप दिखाई देने पर इसके बचाव के लिए डाइथेन एम.45 या इण्डोफील/35-40 ग्राम या ब्लू कॉपर/55-60 ग्राम दवा 18 लीटर पानी में मिलाकर 15 दिन के अंतराल पर 2 से 3 स्प्रे करें।

सायोबीन, मूंगफली व कपास उत्पादक किसानों के लिए सलाह

सायोबीन, मूंगफली व कपास उत्पादक किसानों के लिए भी कुछ सलाह दी गई है। सोयाबीन फसल में पत्ती खाने वाले कीट दिखने पर ट्राइजोफास 1.5 मि.ली. दवा या फ्लुबेंडामाईड 0.5 मि.ली. दवा प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर 200 लीटर घोल प्रति एकड़ के हिसाब से छिड़काव करें और दवा छिड़काव के 3 घंटे के भीतर बारिश हो जाने पर पुनः छिड़काव करने के साथ ही साबुन के घोल का उपयोग करें। सफेद सुंडी का प्रकोप होने पर क्लोरोपाइरीफास 20 ई.सी. 1500 मि.ली. दवा प्रति हैक्टेयर दिए गए पानी की मात्रा के साथ फसल की जडों के पास छिड़काव करें जिससे कीटनाशक का घोल जमीन के अंदर 2-3 इंच तक पहुंच सकें।

फसल में फैरोमेन ट्रैप लगाकर कीट प्रबंधन करें और बीज उत्पादन के लिये उगाई जाने वाली सोयाबीन की फसल में अन्य किस्मों के पौधों का निष्कासन करें जिससे बीज की शुध्दता बनी रहे। मूंगफली फसल में टिक्का बीमारी के प्रकोप को रोकने के लिए 2 किलो जिनेब को एक हजार लीटर पानी में घोलकर 7 दिनों के अंतराल में 4 स्प्रे करें। कपास फसल में रसचूसक का प्रकोप दिखाई देने पर इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मि.ली. या इमिडाक्लोप्रिड और एसिफेड एक ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। गन्ने की फसल में आवश्यकता के अनुसार निराई-गुड़ाई कर मिट्टी चढ़ाएं और पाईरिल्ला कीटों का प्रकोप कम करने के लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था करें।

उद्यानिकी फसलों की कीटों से रक्षा करें

इसी प्रकार किसानों को सलाह दी जाती है कि उद्यानिकी फसलों के अंतर्गत मिर्ची को पत्ती कुंचन रोग से बचाने के लिए मिथाइल डेमेटान या कैराथॉन दवा एक ग्राम प्रति लीटर का उपयोग करें। साग-सब्जी फसल विशेष रूप से बैगन में फलीभेदक कीट पर निगरानी रखें और कद्दू वर्गीय सब्जियों में कीट का प्रकोप पाए जाने पर कम हवा चलने और साफ मौसम में मेलाथियान 40 ई.सी. दवा 2 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। संतरा, नीबू, मौसम्बी आदि में लैमन बटरफ्लाई का प्रकोप दिखाई देने पर क्लोरोपाईरीफास 2 मि.ली. दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। नीबू वर्गीय पौधों में कैंकर रोग की रोकथाम के लिए ग्रसित पत्तीयों और टहनियों को तोड़कर पहले नष्ट करें और बाद में 60 लीटर पानी में कॉपर ऑक्सीक्लोराईड 180 ग्राम और स्ट्रेप्टोसायक्लीन 6 ग्राम दवा का घोल बनाकर छिड़काव करें।

मुर्गी पालकों व पशुपालकों के लिए सलाह

मौसम को देखते हुए पशु पालकों व मुर्गी पालकों को सलाह दी गई है कि पशु बाड़े के फर्श को यथासंभव सूखा रखें। पशुओं के अच्छे स्वास्थ्य, दूध उत्पादन बनाये रखने और बीमारियों से बचाव के लिए पशु बाड़े में मक्खी और मच्छरों के नियंत्रण का उपाय करें। यदि दुधारू गायों के अयन में खरोंच या चोट लगी हो तो हिमैक्स लोशन लगायें। पशु बाड़े के आस-पास ऊगी झाड़ियों व गाजर घास को उखाड़कर फेकें और गड्ढों को भर दें जिससे मच्छर न पनप पाएं। मुर्गी घर में पर्याप्त रोशनी का प्रबंध करें और दिन के समय पंखा चलाकर रखें ताकि सीलनयुक्त हवा बाहर निकलती रहे और उमस वाला वातावरण नहीं रहे।

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