February 21, 2024

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इन महिलाओं ने पेश की नई मिसाल, जानिए इन तीनों महिलाओं के बारे में

नई मिसाल
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हर किसी के जीवन में कई परेशानियां होती हैं। कई लोग होते हैं जो उन परेशानियों से हर जाते हैं। लेकिन कई लोग हाते हैं जो इन परेशानियों से लड़ जाते हैं और जिंदगी में एक नई मिसाल पेश करते हैं। हम आज कुछ ऐसे ही लोगो के बारे में आपको बताने जा रहें हैं। जिन्होंने जिंदगी जीने के नजरियां ही बदल दिया हैं। सही कहा हैं किसी ने अगर हौसले बुलंद हो तो फिर कोई भी ताकत आपको अपने लक्ष्य तक पहुचने से नही रोक सकती।

सबसे पहले बात करते हैं। दीपा मलिक की। दीपा मलिक भारत की पहली दिव्यांग महिला बाइक राइडर और कार रैलिस्ट हैं। एक हादसे में दीपा मलिक के पैर लकवे का शिकार हो गए थे लकिन यह हादसा दीपा को तोड़ नही पाया। हादसे के बाद भी उन्होंने अपने आप को कभी दिव्यांग नही समझा। बता दे की दीपा मलिक के नाम कई सारे रिकॉर्ड्स हैं। दीपा मलिक 2016 रियो पैरालंपिक खेलो में शॉट पुट एफ-53 कैटेरी में रजत पदक जीतने वाली देश की पहली महिला खिलाड़ी बनी। दीपा मलिक की कमर से नीचे का हिस्सा एक स्पाईनल ट्यूमर की वजह से डैमेज हो गया था। दीपा मलिक ने उस हादसे के बाद से अपना केटरिंग का कारोबार बंद करके स्पोर्ट्स को अपना लक्ष्य बना लिया था। दिव्यांग होने बाद भी दीपा मलिक कई अलग- अलग खेल प्रतियोगिताओं में कुल 39 गोल्ड 4 सिल्वर और 2 ब्रोंज मेडल जीत चुकी हैं। दीपा मलिक 2012 में राष्ट्रपति द्वारा अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित भी की जा चुकी हैं। ऐसे ही दीपा ने की नई मिसाल पेश।

अब बात करते हैं। अरुणिमा की। अरुणिमा दुनियां की पहली दिव्यांग महिला पर्वतारोही हैं। इन्होंने माउंट एवरेस्ट, माउंट इलब्रोस और किलिमंजारो जैसे ऊची पर्वतों पर पहुचकर बड़े रिकॉर्ड्स बनाए हैं। इसके अलावा भी वह राष्ट्रय स्तर पर वॉलीबॉल और फुटबॉल खिलाड़ी रह चुकी हैं। बता दे कि अरुणिमा ने अपना पैर एक ट्रेन हादसे में गवा दिया था। अरुणिमा ट्रेन में कुछ चोरो से लड़ते हुए इस हादसे का शिकार हो गई थी। पैर गवाने के बाद भी अरुणिमा ने उत्तरकाशी के नेहरु इंस्टिट्यूट ऑफ माऊंटीनियरिंग से अपनी ट्रनिंग हासिल की, और दुनियां के लिए एक मिसाल पेश की।

हमारे देश में लड़कियों पर हत्याचार होते रहते हैं। लक्ष्मी को भी दरिंदो का शिकार होना पड़ा। कई महिलाएं बड़ी तादाद में एसिड अटैक की शिकार होती हैं। लक्ष्मी पर 2005 में एक संकी आशिक ने तेजाब डाल दिया था जिसे उनका चेहरा जल गया। कई बार एसिड अटैक होने पर लड़कियां हार मान जाती हैं। लेकिन लक्ष्मी ने हार नही मानी और अपनी जिंदगी में एसिड अटैक के खिलाफ लड़ाई को अपना लक्ष्य बना लिया। वह आज एक सोशल ऐक्टिविस्ट हैं। लक्ष्मी ने अपना जीवन एसिड अटैक शिकार बनी महिलाओं की सेवा में लगा दिया हैं। लक्ष्मी मुखर्जी को प्रतिष्ठित इंटरनेशनल विमेंस करेज अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है जो उन्हें ओबामा ने द्वारा 2014 में दिया गया था। ऐसी महिला नई मिसाल पेश करती हैं इनका जज्बा देखकर लोगो को भी जिंदगी जिने का मकसद मिल जाता हैं।

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