February 21, 2024

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लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करने वाला मसीहा

लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करने वाला मसीहा

लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार करने वाला मसीहा

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गुजरात के रहने वाले 55 साल के वेनीलाल मालवाला पेशे से कारोबारी हैं. लेकिन उनके लिए पैसे कमाना ही सबकुछ नहीं है। वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जो सबकुछ भूलकर उन लोगों के लिए काम करते हैं, जिनके बारे में कोई नहीं सोचता। वह ऐसी लाशों का अंतिम संस्कार करते हैं जो लावारिस होती हैं। इस काम में वेनीलाल अपनी जेब से रुपये खर्च करते हैं। बीते 18 सालों से अब तक वह 7,000 लाशों का अंतिम संस्कार कर चुके हैं। वेनीलाल लावारिस लाशों के अंतिम संस्कार के आगे अपने व्यापार पर भी ध्यान नहीं देते। उन्होंने बताया कि 18 साल पहले उन्होंने मालवाला अग्नि दाह सेना नाम का एक संगठन बनाया। एक लाश के अंतिम संस्कार में वह 505 रुपये खर्च करते हैं। फिलहाल अब इस नेक काम के लिए उनके संगठन के लोगों ने डोनेशन देना शुरु दिया हैं।

उन्होंने बताया कि 1997 में एक सड़क हादसे में घायल हुए व्यक्ति को वह अस्पताल ले जाना चाहते थे। वह गंभीर रूप से घायल था। रास्ते में पुलिसवाले ने उन्हें रोक लिया और वह समय से अस्पताल नहीं पहुंच सके। इस घटना के बाद उन्हें बहुत बुरा लगा। घायल की मौत के बाद उसकी लाश को कोई लेने नहीं आया। वेनीलाल ने बताया, ‘उस अज्ञात व्यक्ति का जब कोई नहीं मिला तो मैंने उसकी अंतिम संस्कार किया। फिर मुझे लगा कि इस जैसे तमाम लोग होंगे जिनकी मौत के बाद उनकी लाश लावारिस फेंक दी जाती होगी इसलिए मैंने ऐसी लाशों का अंतिम संस्कार करने की ठानी। एक संगठन बनाया और फिर मुहिम में लग गया।’

उन्होंने बताया कि वे लोग हर रोज लावारिस लाशों को लाते हैं। साल में लगभग 400 लावारिस लाशें उन्हें मिलती हैं। लाशों को लाकर वह उन्हें स्नान कराते हैं। उसके बाद पूरे रीति-रिवाज के साथ श्मशान घाट में उनका दाह संस्कार करते हैं।

वेनीलाल ने बताया कि वह सिर्फ लाशों का अंतिम संस्कार ही नहीं बल्कि उनका अस्थि विसर्जन भी करते हैं। दाह संस्कार के बाद वह मृतक की आत्मा की शांति के लिए यज्ञ का आयोजन करते हैं और ब्राह्मणों को भोजन कराते हैं। इतना ही नहीं अस्थि विसर्जन के लिए नासिक जाते हैं।

उन्होंने बताया कि जिन लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार होता है उनकी वह पहले तस्वीर लेते हैं। हर साल जनवरी में एक प्रदर्शनी लगाते हैं जिसमें ये तस्वीरें डिस्प्ले में रखी जाती हैं। यहां पर तमाम वे लोग आते हैं जिनके अपने लापता होते हैं। वे इन तस्वीरों को देखकर अपनों की पहचान करते हैं। ऐसा कई बार हुआ जब यहां पर तस्वीरें देखने के बाद मृतक के परिजनों का पता चल सका है। ऐसे व्यक्ति दुनियां में बहुत कम हैं जो पहले दूसरों के बारे में सोचते हैं फिर अपने बारे में…. 

 

 

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