बिना किसी सरकारी योजना ग्रामीणों ने बदली आरा-केरम गांव की तस्वीर

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आरा-केरम गांव

बिना किसी सरकारी योजना ग्रामीणों ने बदली आरा-केरम गांव की तस्वीर

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अगर हर ग्रामीण संकल्प उठाए , तो वो दिन दूर नहीं जब गांव शहरों से बेहतर हो जाएं, इतने कि गांव, शहर की ओर नहीं, शहर गांव की ओर दौड़े चले जाएं। आत्मनिर्भरता का एक मंत्र व्यक्तिगत तौर पर हम सभी को अपनाने की जरूरत है, स्वच्छता और विकास के लिए सिर्फ सरकार भरोसे बैठा जाए ये भी सही नहीं। खुद अपने बल पर एकजुट होकर भी हम खुद के देश और समाज को बहुत हद तक सुधार सकते हैं। इसकी जीवंत मिसाल है झारखंड का एक गांव आरा-केरम। ये वही गांव है जो नशामुक्त गांव के रूप में पहचाना जाता है और अब इस गांव के लोगों ने साफ-सफाई कर गांव को मच्छरों से भी मुक्त कर लिया है।
बरसात के मौसम में जहां हर तरफ पानी. कीचड़ और मच्छरों का जमघट दिखाई पड़ता है, वहीं झारखंड का आरा-केरम गांव कुछ अलग की सूरत में नजर आता है और खास बात ये कि इस गांव की काया बदलने के लिए ना तो कोई योजना चलाई गई ना ही सरकारी मुलाजिमों ने यहां साफ-सफाई कराई, बल्कि ये सब अपने स्तर पर खुद गांव के लोगों ने किया है, जिसका नतीजा ये कि इस गांव में अब मच्छरों का मार नहीं है। अब आप सोचेंगे इसमें बड़ी बात क्या है।
आरा-केरम गांव
बिना किसी सरकारी योजना ग्रामीणों ने बदली आरा-केरम गांव की तस्वीर
लेकिन बड़ी बात है, क्योंकि बरसात के मौसम में जहां अच्छे अच्छे महानगर जल मग्न हो जाते हैं और बारिश के भरे पानी में मच्छर अपना डेरा डालते हैं वहीं वन प्रदेश कहे जाने वाले झारखंड के एक गांव का मच्छर मुक्त हो जाना वाकई बड़ी बात है, जिसे सच कर दिखाया है रांची शहर से 30 किलोमीटर दूर बसे गांव आरा-केरम ने।

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अधिकतर जंगल होने की वजह से यहां मच्छरों की मार काफी ज्यादा होती है, यही वजह है कि इस प्रदेश में मच्छरजनित रोगों की मार ज्यादा है , जिसको लेकर लोगों के बीच जागरूकता फैलाने का काम काफी जोरों पर है, आरा-केरम गांव के लोग इस समस्या के प्रति जागरुक हुए और धीरे धीरे गांव के लोगों ने गंदे पानी का बेहतर प्रबंधन शुरु कर दिया। बरसाती जल जमाव के स्रोतों को मिट्टी से पाटा, घरों की नालियों को ढका और गांव में जगह-जगह इकट्ठे कूड़े का भी प्रबंधन किय़ा और धीरे-धीरे गांव मच्छरों की मार से आज़ाद हो गया।
आरा-केरम गांव
गावं के लोगों ने श्रमदान गांव की जो काया पलट की है उसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी कार्यक्रम मन की बात कार्यक्रम में आरा-केरम गांव की तारीफे कर चुके हैं। स्वच्छता, जल प्रबंधन, नशा मुक्ति और ग्रामीणों द्वारा जैविक खेती के कामों के मोदी जी ने मन की बात कार्य़क्रम काफी सराहा है।
वाकई आरा-केरम गांव के लोगों द्वारा किया गया एक सराहनीय और प्रेरणादायी काम है जिससे देश के हर बाशिंदे को सीख लेने की जरूरत है। स्वच्छता, जल संचय, जैविक खेती आज के समय की बड़ी मांगें हैं जिन्हें अपने-अपने स्तर पर सफल बनाने के लिए हम सभी को कार्य करना चाहिए ताकि देश का हर गांव, कस्बा, जिला हो या शहर। स्वस्थ और समृद्ध बनें।

Writer : Producer & Anchor – स्मिथा सिंह 

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