February 21, 2024

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शिक्षा का मजाक बना रहे शिक्षक, हाथ में छड़ी लेकर बच्चों को पढ़ाती दिखी रसोइया

शिक्षा का मजाक
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सर्व शिक्षा अभियान को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सरकार प्रतिवर्ष करोड़ो रूपयें खर्च कर रही है। साथ ही, भारी भरकम वेतन देकर शिक्षकों की नियुक्तियां कर रही है, ताकि इन स्कुलों में शिक्षक की कमी की वजह सें शिक्षण कार्य प्रभावित न हो और नैनिहालों को अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके। लेकिन सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना के तहत पानी की तरह बहाये जा रहे करोड़ों रुपये से शिक्षक सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी खिलवाड़ करतें नजर आ रहे है।

परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक समय सें स्कूल नही आ रहे है तो शिक्षण कार्य के समय मोबाईल में व्यस्त रहते है। इनकी इस कारगुजारियों से नैनिहालों का भविष्य अधर में लटकता नजर आ रहा हैं। उत्तर प्रदेश की सरकार एक तरफ कान्वेंट स्कूल की तरह मॉडल भवन बनाकर अच्छी गुणवत्ता की शिक्षा देने का महौल बना रहे हैं तो दूसरी तरफ इन शिक्षकों के कारण इस अभियान में पलीता लगते नजर आ रहा है। इतना ही नहीं, ग्रामिण अंचलो में शिक्षा का स्तर उच्च करने और नौनिहालों के भविष्य को संवारने के लिए सरकार जोर-शोर से काम कर रही है। क्योंकि यही नैनिहाल आगे चल कर देश के भविष्य बनेंगे। लेकिन ये भारी भरकम वेतन लेने वाले शिक्षक बच्चों के भविष्य के साथ जमकर खिलवाड़ करते नजर आ रहें हैं। परिषदिय स्कूलों के भारी भरकम वेतन लेने वाले  अध्यापक शिक्षण कार्य छोड़ लापरवाही सें घूमते नजर आ रहें है, तो कुछ शिक्षण कार्य के समय मोबाईल चलाते नजर आ रहे है। इतना ही नहीं, ये मनमौजें शिक्षक रसोइया को ही पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंप देते है और खुद घूम कर नेतागिरी करते है। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा का स्तर सबसे निचले स्तर पर आ गया है।

दरअसल, ये पूरा मामला कुशीनगर जनपद के पडरौना ब्लॉक के प्राथमिक स्कूल जंगल चौरिया का हैं जहां लगभग नामांकित 102 बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए 4 शिक्षकों की तैनाती की गई है। लेकिन इनकी मनमानी का आलम ये है कि, रियलिटी चेक के दौरान 4 शिक्षको में 2 नदारत मिलें, तो प्रधानाध्यापक घूमते नजर आये। जब मीडिया की टीम स्कूल परिसर में शिक्षा व्यवस्था की पड़ताल करने पहुंची तो प्रधानाध्यापक चंद्रप्रकाश दुबे मीडिया के कैमरे को बन्द करनें की धमकी देते हुए बार-बार कैमरा बन्द कराते नजर आए। इतना ही नहीं, जंगल चौरिया प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक की जगह रसोईया बच्चों को पढ़ाती नजर आई। और जब रसोइया से कैमरे के सामने पूछा गया तो उसने बताया कि भोजन बनाने के बाद बच्चों को आकर थोड़ा देख लेते है लेकिन वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि किस तरह से रसोइया हाथ में छड़ी लेकर बच्चों को पढ़ा रही। इस विद्यालय में एमडीएम की बात करें, तो एमडीएम की खुले तौर से धज्जियां उड़ती नजर आई,

ये जानने के बाद आप भी ये सोचने पर मजबूर हो जायेंगे कि, अगर जिला मुख्यालय से महज आठ किमी. दूर इस स्कूल की स्थिति ये हैं तो ग्रामिण अंचलो के स्कूलों के हालात क्या होगें। जनपद के इस स्कूल पर सर्वशिक्षा अभियान जमीनी धरातल पर पूरी तरह फेल है।

इस पूरे मामले को लेकर बेसिक शिक्षा अधिकारी का पक्ष लेने की कोशिश की गई, लेकिन वे इस  लापरवाही पर मीडिया के कैमरे पर कुछ बोलने से बचने के लिए दो दिन तक बहना बनाते रहे। और आखिर में जिलाधिकारी डॉ अनिल कुमार सिंह से इस सम्बन्ध में पूछा गया तो वो आरोपी शिक्षक और विद्यालय का नाम डायरी में नोट कर कार्यवाई की बात कह गए। उन्होंने ये भी बताया कि, अगर शिक्षण कार्य छोड़कर कोई भी शिक्षक बिना सूचना के कहीं जाता हैं तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी। मीडिया से बदसुलूकी के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसकी जाँच कराई जायेगी यदि ऐसा मामला सही पाया गया तो आरोपी शिक्षक के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाई की जायेगी। लेकिन आरोपी शिक्षक द्वारा मीडिया का कैमरा बंद कराने की करतूत साफ देखी जा सकती है। हालांकि, इन लापरवाह शिक्षकों के खिलाफ कार्यवाही होती है या नहीं यह तो भविष्य के गर्त में छिपा है।

 

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