February 21, 2024

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हर जगह मौजूद है यौन उत्पीड़ित महिलाओं के अपराधी।

यौन उत्पीड़िना
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बदलते वक्त की तेजी के साथ लोगों की सोच मे भी बदलाव आता जा रहा है। लड़कियां अब पहले की तरह चारदिवारी मे बंध कर नहीं रह गई है, वे भी लड़को की तरह दिन-रात मेहनत कर अपने पैरो पर खड़ा होना सीख चुकी है। आज के वक्त मे लड़को को तेजी पीछे छोड़ रही लड़कियां कामयाबी की राह पर चल चुकी है। लेकिन हमारे समाज में हर अच्छाई के बाद “लेकिन” शब्द का जुड़ना तो आम सी बात हो चली है। और यहां भी कुछ ऐसा ही है, लड़कियां अब किसी पर निर्भर नही है, और यह एक अच्छी बात है। लेकिन, लड़कियों की सुरक्षा पर सवाल आज भी एक पहेली बना बैठा है।

लड़कियां सड़को, बाजार, दफ्तरो, यहां तक की घरो मे भी मर्दो की गंदी नजरो का शिकार होती जा रही है। और लड़कियो के लिए इस परेशानी से जुड़े कारण खत्म होने की बजाय दिन-पर-दिन बढ़ते ही जा रहे है।

कार्यस्थल मे लड़कियों को यौन उत्पीड़ना से जुड़ी कई समस्याओ का सामना करना पड़ता है। और इसके कई सारे कारण होते है।

  • पुरूष प्रधान समाज इसका सबसे सामान्य कारण है, जिसके कारण पुरूष जीवन के सभी पहलुओ मे खुद को स्त्री से अधिक शक्तिशाली समझता है। और यह उसमे जलन की भावना को भी जन्म देता है, व कार्यस्थल मे जब कोई महिला उससे बहतर कार्य करने लगती है तो उसे असहज बनाने, व नीचा दिखाने के लिए पुरूष उसे उत्पीड़ित करता है, अभद्र टिप्पणी, गलत तरह का बर्ताव, यौन उत्पीड़ना की कोशिश, गंदी फोटो, वीडियो बनाकर उसका गलत इस्तेमाल करना जैसै कई उत्पीड़न के तरीको को अपनाता है।
  • एक कारण पुरूषो के मन मे महिलाओ के लिए अपमान व अवमानना की भावना भी है। महिलाओ की इज्जत न करना व उन्हे केवल एक खिलौने की भांति प्रयोग करना पुरूषो की गंदी सोच का नतीजा है। कार्यस्थलो पर अक्सर पुरूषो को महिलाओ के साथ इस तरह के व्यवहार करते पकड़ा भी गया है। महिला कर्मचारी को काम के बहाने कई तरह से उत्पीड़ित किया जाता है, यही नही प्रोमोशन का झांसा देकर भी कई पुरूष कार्यस्थलो मे औरतो के साथ गलत व्यवहार करते है।
  • कहीं न कहीं यौन उत्पीड़िना का सबसे महत्वपूर्ण कारण हमारे देश के कानून का कठोर न होना भी है। यौन उत्पीड़ित महिलाएं इसके खिलाफ आवाज तो उठाना सीख चुकी है, लेकिन उनकी सुनने वालो ने मानो अपने कान ही बंद कर लिए है। यहां महिलाओ के साथ बलात्कार जैसी घटनाओ मे उन्हे इंसाफ तो मिलता है। लेकिन कोर्ट मे तारीखो का सिलसिला खत्म होने तक हमारा समाज उत्पीड़ित महिला को ही अपराधी घोषित कर देता है।

समाज मे हो रहे महिलाओं के साथ इस तरह के अनुचित व्यवहार के कारण औरतो के लिए घर से बेखौफ बाहर निकल पाना बहुत मुश्किल हो चुका है। और इतना ही नहीं ऐसे मामलों मे अक्सर खुद की बेईज्जती के डर से महिलाएं चुप रहना बहतर समझती है, और समझे भी क्यों न ? क्योकि यदि वो अपने साथ हुए अनुचित व्यवहार का जिक्र भी करती है तो लोग उन्हे ही चरित्रहीन स्त्री करार देते है। और यही कारण है कि समाज मे यौन-उत्पीड़िना की शिकार हो रही कई महिलाएं इसके खिलाफ आवाज उठाने के डर से चुप रह जाती है।

 

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