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Kisan Bulletin 24th August- पानी की कमी में खेत बेचने को मजबूर किसान

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Kisan Bulletin 24th August-

Kisan Bulletin 24th August- पानी की कमी में खेत बेचने को मजबूर किसान

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Kisan Bulletin 24th August-

छत्तीसगढ़ के महासमुंद के करीब 18 गांवों के हजारों किसान बघनई नदी में बेकार बर रहे पानी को चरौदा बांध में भरने की मांग करते हुए कलेक्टोरेट पहुंचे.. आपको बता दें कि, किसान जिस बांध की बात कर रहे हैं कि, उस बांध में इस साल सिर्फ 20 प्रतिशत पानी ही भर पाया है। जबकि, इसमें से भी 10 प्रतिशत पानी पहले से बांध में मौजूद था। तो वहीं दूसरी तरफ इसके पास से ही बघनई नदीं बहती है जिसमें से बारिश का पानी सीधे महानदी से होते हुए समुद्र में जाकर मिल जाता है। ऐसे में किसानों की मांग है कि, एक केनाल बनाकर या सोलर सिस्टम से लिफ्ट करके नदी को चरौदा बांध में जोड़ दिया जाए… दरअसल, कम बारिश के चलते पिछले करीब 10 सालों से इस बांध की हालत ऐसी ही बनी हुई है। जबकि, इस बांध के पानी से ही आस-पास के गांवों के करीब 10 हजार एकड़ खेतों की सिंचाई की होती है। लेकिन अब पानी की कमी के चलते इस क्षेत्र के किसानों की हजारों एकड़ जमीन बिक चुकी है, और खेत की जमीन पर बड़े-बड़े फार्म हाउस बन चुके हैं। आपको बता दें कि, बीते शुक्रवार को जब 18 गांवो के किसान इसी मुद्दे पर कलेक्टर से बातचीत करने के लिए कलेक्टोरेट पहुंचे, तो किसानों को कलेक्टोरेट के मेन गेट पर ही रोक दिया गया। और सिर्फ 15 किसानों को ही कलेक्टर से मिलने की मंजूरी दी गई.. हालांकि, किसानों कलेक्टर से बांध में पानी भरने की मांग की और कहा कि, अगर बांध में पानी नहीं भरा जा सकता हा तो बांध को मृत घोषित कर दिया जाए… इस पर अधिकारियों ने किसानों को जल्द ही बांध में पानी भरने का आश्वासन दिया है..

हरियाणा के शहजादपुर की नारायणगढ़ शुगर मिल से गन्ने की बकाया राशि की मांग को लेकर किसान पिछले करीब तीन दिनों से जल सत्याग्रह आंदोलन कर रहे हैं। आपको बता दें कि, भारतीय किसान यूनियन और किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसान मौजूदा पिराई सत्र की लगभग 100 करोड़ रूपये की बकाया राशि की मांग कर रहे हैं। जिसको लेकर किसानों ने बीते शुक्रवार को बड़ागढ़ गांव के पास बह रही बेगना नदी में जल सत्याग्रह शुरू किया था। जो कि अभी तक जारी है। किसानों का कहना है कि, जब तक उनकी मांग नहीं मानी जाती तब तक जल सत्याग्रह जारी रहेगा.. इतना ही नहीं किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी का कहना है कि, किसान सरकार या शुगर मिल से कोई खैरात नहीं मांग रहे बल्कि अपनी फसल का दाम मांग रहे हैं। किसानों के खून-पसीने की कमाई जआज शुगर मिल मालिक के हाथों में है, और वो एसी में बैठकर मौज कर रहे हैं। जबकि, हम जैसे गरीब किसान धूप और गर्मी के बीच नदीं में जल सत्याग्रह करने पर मजबूर हैं। और तो और इतना होने के बावजूद भी सरकार का कोई अधिकारी किसानों की बात तक सुनने नहीं आ रहा है। आपको बता दें कि, किसानों की मौजूदा पिराई सत्र का करीब 100 करोड़ रूपये बकाया है। जबकि आगामी सीजन के लिए लगभग 300 करोड़ रुपये का गन्ना किसान के खेत में खड़ा है

उत्तर प्रदेश के बंदायू में क्रय केंद्रों पर दिनों दिन खाद की उपलब्धता कम होती जा रही है. वहीं खाद के लिए किसान सुबह से लेकर रात तक लाइन में लगकर खाद मिलने का इंतजार कर रहे हैं. आपको बता दें की शुक्रवार को सुबह से लेकर दोपहर तक मंडी स्थित इफको किसान सेवा केंद्र की रुपये जमा करने वाली खिड़की बंद रही, जिसके चलते लाइन में लगे किसानों ने परेशान होकर हंगामा शुरू कर दिया. वहीं मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट केके अवस्थी व जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने किसानों के पास पहुंचकर किसानों को समझाकर मामले को शांत कराया. जिसके बाद वहां मौजूद 375 किसानों को 3-3 बोरी यूरिया की वितरित कराई गई. हालांकि भीड़ उस वक्त बढ़ गई जिस समय, एक दिन पहले टोकन ले चुके किसानों की लाइन में बिना टोकन वाले किसानों ने लाइऩ लगा ली. जिसके चलते भीड़ बढ़ गई और घंटों से लाइन में लगे किसानों का गुस्सा फूट पड़ा. वहीं दूसरी तरफ घंटों तक खिड़की खुलने के इंतजार में खड़े किसानों भूखे प्यासे पूरे दिन लाइन में लगे रहे. इसे बावजूद भी खिड़की नहीं खुली. जिससे परेशान होकर किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया. वहीं मौके पर वहां मौजूद पुलिसकर्मिनों ने भी किसानों को समझाने की तमाम कोशिश की. लेकिन किसानों का गुस्सा उस समय सातवें आसमान पर पहुंच चुका था. वहीं घंटों भूखे-प्यासे धूप में खड़े होने के चलते कुछ किसानों की तबीयत बिगड़ गई. हालांकि मौके पर पहुंच कर अधिकारियों ने स्थिति संभाली और किसानों को समझाकर मामले को शांत कराया. इसके बाद सभी किसानों को टोकन दिया गया. इसके साथ ही खाद की समस्या को देखते हुए डीएम दिनेश कुमार सिंह के निर्देश पर कृषि विभाग ने भी छापेमारी की.. गौरतलब है की, राज्य के कई हिस्सों में इस समय यूरिया की किल्लत पैदा हो गई है, जिसके चलते किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ खाद विक्रेता इसका फायदा उठाकर महंगें दामों पर खाद बेंच रहे हैं.

पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में भाजपा किसान मोर्चा के नेता रवींद्र रंजन ने बीते रोज दावा किया कि, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य के किसानों का शोषण कर रही हैं. आपको बता दें की उन्होंने कहा की, राज्य में किसानों की खेती के लिए छह रूपया प्रति यूनिट की दर पर बिजली दी जा रही है. जबकि पड़ोसी राज्य झारखंड में सरकार किसानों को दो रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली दे रही है. जिसके चलते यहां के किसानों का शोषण हो रहा है. आपको बता दें की रवींद्र कुमार बीते रोज मंगलम पार्क में आशीहारा कराटे ऑर्गेनाइजेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने कहा की केंद्र सरकार के स्तर से किसानों के लिए शुरू की गई केंद्रीय योजनाओं को तृणमूल की सरकार लागू करने नहीं देती है. जिसके चलते केंद्रीय योजनाओं से किसान वंचित रह जाते हैं. जहां किसानों के लिए पेंशन सम्मान योजना की शुरूवात की गई तो वहीं मुख्यमंत्री की तानाशाही के चलते ये भी लागू नहीं हो पाया है. यही वजह है कि, यहां के किसान अभी भी काफी पीछे हैं. हम किसानों के उत्थान के लिए तृणमूल सरकार के खिलाफ आंदोलन करेंगे. ताकि किसानों की जिंदगी सही पटरी पर आ सके और उन्हें उनका हक मिल सके.

 

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