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Kisan bulletin 11th July 2019-किसानों के लिए गहलोत सरकार ने खोला खजाना

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Kisan bulletin 11th July 2019-

Kisan bulletin 11th July 2019-किसानों के लिए गहलोत सरकार ने खोला खजाना

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Kisan bulletin 11th July 2019-

हिमाचल प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही मुख्यमंत्री खेती संरक्षण योजना अब शुरू कर दी गई है। आपको बता दें कि, इस योजना के जरिए किसान अपनी फसलों को सुअर, आवारा पशुओं और बाकी जंगली जानवरों से बचा सकेंगे। दरअसल, इस योजना के तहत खेतों के चारों ओर सोलर लाइट से चलने वाला बाड़ लगाया जाएगा। इसी के साथ किसानों को इसपर आने वाले बिजली बिल से भी  निजात मिलेगी। योजना के तहत कंपनी खुद किसानों के खेतों के चारो ओर इस बाड़ को लगाएंगे। इसके अलावा इसका इस्तेमाल करने का तरीका भी किसानों को बताया जाएगा। इस बाड़ में लगी तारों के झटके से जानवर को सिर्फ दस हजार वोल्टेज का झटका लगेगा जो कि, जानवरों को भगाने के लिए काफी है हालांकि, इससे इंसानों को कोई खतरा नहीं है। और अगर इस बाड़ में कोई खराबी आती है तो कंपनी के कर्मचारी स्वंय इसकी मरम्मत करेगें। इतना ही नहीं, किसानों को राज्य सरकार द्वारा अपने खेत की सुरक्षा करने के लिए सब्सिडी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए किसानों को 80-85 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है। हालांकि, किसानों को इस योजना का लाभ उठाने के लिओ 20 प्रतिशत राशि खर्च करनी पड़ेगी। और अगर कोई किसान इस योजना का लाभ अकेले लेने में असमर्थ है तो किसान तीन लोगों का समूह बनाकर भी इस योजना का फायदा उठा सकते हैं हालांकि, इस समूह बनाने के बाद किसानों को सिर्फ 15 प्रतिशत राशि ही देनी पड़ेगी। आपको बता दें कि, जिला कृषि अधिकारी मोहेंद्र सिंह भवानी के मुताबिक, इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को कृषि विभाग की औपचारिकताओं को पूरा करना होगा.. बिना इसे पूरा किए किसान इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते है।

आपको याद होगा कि, एक वक्त पर पश्चिम बंगाल के सिंगूर में खेती करने के लिए वहां के किसानों ने आंदोलन तक कर दिया था.. जिसकी वजह से टाटा को बंगाल तक छोड़ना पड़ा था। आज उसी जमीन पर किसानों को खेती करने में कोई दिलचस्पी नहीं रही है.. दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस ने किसानों की 997.11 एकड़ जमीन को वापस लौट दिया है। और बीते बुधवार को जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से पूछा गया कि, सिंगूर की जमीन पर किसान खेती क्यों नहीं कर रहे हैं, तो इसके जवाब में ममता ने कहा कि, सरकार ने सारी जमीन किसानों को उपजाऊ बनाकर वापस कर दी है. अब अगर किसान खेती नहीं करना चाहते है तो इसमें राज्य सरकार क्या कर सकती है.. सरकार के तरफ से 10 हज़ार रूपए मिट्टी के परीक्षण के लिए और बीज के लिए प्रति किसान को दिया था. उन्होंने कहा कि कुछ किसान अपनी जमीन बेच चुके हैं. अब हम किसान को जबरदस्ती खेती करने के लिए तो नहीं बोल सकते हैं। एक जानकारी के अनुसार, सिंगुर में किसानों की कुल 997.11 एकड़ जमीन है जिसमें से 955.41 एकड़ जमीन उन्हें को लौटा दी गई है. जबकि, 41.21 एकड़ जमीन के किसान मालिकों ने अभी तक अपनी जमीन वापस नहीं ली है. आपको बता दें कि, साल 2017-2018 में 641 एकड़ जमीन में खेती की गई थी, जबकि, 2018-2019 में मात्रा 260 एकड़ जमीन पर ही खेती की गई है. सवाल ये है कि जिस जमीन को लेकर इतना आंदोलन हुआ और टाटा को बंगाल छोड़ के जाना पड़ा. अब किसान यहां खेती क्यों नहीं करना चाहते हैं. तो वहीं, दूसरी ओर भाजपा की सांसद लॉकेट चटर्जी के अनुसार, कि 10 साल पहले जब टाटा ने यहां कारखाने बनाने के लिए जमीन ली थी. उसके बाद जमीन उपजाऊ नहीं रही.

बीते बुधवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विधानसभा में 2019-20 के लिए बजट पेश करते हुए किसान कल्याण कोष बनाने का बड़ा ऐलान किया है। जिसके लिए राज्य सरकार के मुताबिक, 1000 करोड़ रूपये का बजट भी आवंटित कर दिया गया है। गहलोत ने 2 लाख 32 हजार 944 करोड़ एक लाख रुपए का बजट पेश किया। इसमें 27 हजार 14 करोड़ 97 लाख का राजस्व घाटा तथा 32 हजार 678 करोड़ 34 लाख का राजकोषीय घाटा है। बजट में युवाओं के साथ ही किसानों-महिलाओं के लिए भी ऐलान किया गया। जल संकट को लेकर भी कई योजनाओं की घोषणा की गई। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने बताया कि, हर ग्राम पंचायत में नंदी गाय आश्रयों की स्थापना की जाएगी। गांवों में सौर ऊर्जा से चलने वाले ट्यूबवेल लगाए जाएंगे। 1000 नए पशु चिकित्सालय खुलेंगे, और 5 वर्षों में ग्राम पंचायतों में नया इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा। इतना ही नहीं, गहलोत ने कृषि फीडर के लिए 5200 करोड़ की घोषणा की है, साथ ही, किसानों को कुसुम योजना के तहत सोलर पंप सेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इस योजना से किसान को दिन में बिजली मिलेगी। बिल का भुगतान नहीं करना पड़ेगा। इसी के साथ मुख्यमंत्री ने बाकी क्षेत्रों में भी कई घोषणाएं की हैं।

जहां एक तरफ आए दिन किसान अपने फसलों को बेचने के लिए दर दर भटकते हैं वहीं भिंड के दबोह में किसानों की फसल सरकारी समर्थन मूल्य पर खरीद तो ली गई है, हालांकि किसानों का पैसा कॉपरेटिव बैंक में अटक गया है. जहां एक तरफ किसान अपनी फसलों के पैसे निकलने के लिए बैंक के बार बार चक्कर काट रहे हैं, वहीं बैंक से पैसे निकालने के लिए किसान सहकारी संस्था दबोह से पैसे निकालने के लिए 35 किलोमीटर तक की दूरी का सफर तय कर रहे हैं. इस दौरान किसानों को विड्रॉल फार्म भरने के बाद भी काउंटर पर महज 10 से 20 हजार रुपए दिए जा रहे हैं. जबकि किसान विड्रॉल में अपनी पूरी रकम भर रहे हैं. इस दौरान किसानों ने जब इसकी शिकायत मैनेजर से की तो उन्होंने कहा की कमर्चारियों की कमी और ऊपर से कैश की कमी के चलते ये समस्या पैदा हो रही है

जहां एक तरफ बीते महीने में मानसून की देरी ने किसानों की परेशानियां काफी ज्यादा बढ़ा दी थी, वहीं जुलाई महीने में रुक रुक कर हो रही लगातार बारिश ने किसानों के चेहरे पर खुशी ला दी है, आपको बता दें कि जहां बीते मंगलवार को मानसून की सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई तो वहीं बुधवार को भी आसमान की बारिश ने किसानों को अपने खेत तैयार कर धनरोपनी करने के लिए तैयार कर दिया है. यही वजह है की पिछले एक हफ्ते के अंदर धनरोपनी का काम काफी तेजी से चल रहा है और आने वाले दिनों में धनरोपनी में कई गुणा वृद्धि की संभावना है.

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के खुर्जा क्षेत्र में चल रही चकबंदी प्रक्रिया में अनेकों तरह की अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए बीते दिन किसानों ने अपनी नाराजगी जाहिर की, इस दौरान भाकियू के नेतृत्व में आए किसानों ने कलक्ट्रेट ऑफिस के बाहर जाम लगा दिया. साथ ही किसानों की अधिकारियों की बहस हो गई, जिसके बाद किसानों ने एसडीण को इसका ज्ञापन देकर इस समस्या का निपटारा करने की मांग की है.

 

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