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Kisan Bulletin 5th Nov- किसानों के विरोध का सरकार पर हुआ असर

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Kisan Bulletin 5th Nov

Kisan Bulletin 5th Nov

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Kisan Bulletin 5th Nov-

  1. राज्य के किसानों को बेहतर और सशक्त बनाने के लिए बिहार सरकार जल्द ही राज्य की सभी पंचायतों में किसान चौपाल लगाने जा रही है. आपको बता दें कि, सरकार द्वारा किसान चौपाल कार्यक्रम की इस योजना में 18 करोड़ 49 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है. वहीं बिहार के कृषि मंत्री डॉ प्रेम कुमार ने कहा कि, किसान चौपाल कार्यक्रम के माध्यम से राज्य के किसानों सरकार की तरफ से जारी योजनाओं व कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी जाएगी. साथ ही किसानों के लिए खेती में आ रही समस्याओं की भी जानकारी किसानों से ली जाएगी. ताकि उसका समाधान किया जा सके. यही नहीं इस कार्यक्रम से कृषि वैज्ञानिकों-विशेषज्ञों के माध्यम से खेती से जुड़ी सभी नई तकनीकों की भी जानकारियां किसानों को दी जाएगी. इसके अलावा कृषि मंत्री ने कहा कि, इस चौपाल के माध्यम से किसान हित समूह, किसान उत्पादन संगठन व खाद्य सुरक्षा समूह की भी जानकारी किसानों को दी जाएगी. ताकि किसान सशक्त हो सकें. वहीं खेती के साथ साथ इस चौपाल में पशुपालन, मत्स्य पालन व सहकारिता विभाग की योजनाओं के बारें में जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी. साथ ही किसानों से इन विषयों पर सुझाव भी लिए जाएगें. ताकि खेती की बेहतर बनाया जा सके.

2. जहां देश के किसान एक तरफ रीजनल कंप्रेहेंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप आरसीईपी का विरोध कर रहे हैं. वहीं सरकार ने भी इसमें न शामिल होने की बात कही है, आपको बता दें की देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की चिंताओं को लेकर दृढ़ हैं और वो किसी भी घरेलू उद्योगों के हित को लेकर कोभी भी समझौता नहीं करना चाहते हैं. यही वजह है कि, बैंकॉक में आरसीईपी समिट को संबोधित करते हुए देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि, आरसीईपी की कल्पना करने से हजारों साल पहले भारतीय व्यापारियों, उद्यमियों और आम लोगों ने इस क्षेत्र के साथ संपर्क स्थापित किया था और इन्हीं संपर्कों ने ही हमारी साझा समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. साथ ही पीएम ने कहा कि, इस समय हमारे किसानों, छोटे उद्योगें और व्यापारियों का काफी कुछ दांव पर लगा हुआ है. साथ ही उन्होंने कहा कि, हमारे लिए सभी महत्वपूर्ण हैं. आज जब हम आरसीईपी के 7 सालों को देखते तो उसमें वैश्विक आर्थिक और व्यापार के परिदृश्य सहित कई चीजों में बदलाव आया है. हम सभी इस परिवर्तन को नजरअंदाज नहीं कर सकते. लेकिन मौजूदा आरसीईपी समझौता आरसीईपी की मूल भावना को पूरी तरह से प्रतिबिंबित नहीं करता. गौरतलब है कि, आरसीईपी एक ट्रेड एग्रीमेंट है. जो सदस्य देशों को एक दूसरे के साथ व्यापार करने पर सहूलियत देता है. हालांकि इसका शुरूवात से ही देश के किसान विरोध कर रहे हैं. क्योंकि किसानों का मानना है कि, अगर सरकार ये संधि करती है तो देश के एक तिहाई बाजार पर न्यूजीलैंड, अमेरिका और यूरोपीये देशों का कब्जा हो जाएगा और भारत के किसानों को उनके उत्पाद का जो मूल्य अभी मिल रहा है उसमें कमी आ जाएगी. साथ ही किसानों का मानना है कि, इस समझौते से डेयरी उत्पाद को काफी नुकसान पहुंचेगा.

3. मध्यप्रदेश सरकार राज्य माइक्रोइरीगेशन योजना‘ के तहत किसानों को कई कृषि यंत्रों पर 80 फीसद तक की सब्सिडी देने जा रही है। इन यंत्रो में मुख्य तौर पर सिंचाई में इस्तेमाल होने वाले यंत्र जैसे स्प्रिंकलर सेटड्रिप सिस्टम और मोबाइल रेनगन को शामिल किया गया है। आपको बता दें कि, इसके तहत अगर किसान अपने एक हेक्टेयर के खेत में स्प्रिंकलर  सेट लगावाता है, तो इसकी औसतन लागत 19 हजार 600 रूपये तक पड़ेगी, जबकि, सरकार द्वारा 80 प्रतिशत के अनुदान पर 12,000 रूपये तक की राशि का भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा, तो वहीं ड्रिप सिस्टम और मोबाइल रेनगन के लिए भी किसानों को राज्य सरकार द्वारा 80 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा।

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