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Kisan Bulletin 4th Nov- इन उर्वरकों से बढ़ेगी 30 प्रतिशत तक पैदावार

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Kisan Bulletin 4th Nov

Kisan Bulletin 4th Nov

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Kisan Bulletin 4th Nov-

  1. जहां बीते कुछ समय में देश में किसानों की स्थिति कभी बाढ़ तो कभी सूखे के चलते परेशानियों से घिरी रही है, वहीं देश में लागू होने जा रहे हैं आरसीईपी को लेकर भी किसानों का विरोध तेज हो गया है. आपको बता दें कि आज देश के कई हिस्सों में किसानों ने रीजनल कंप्रेहंसिव इकनॉमिक पार्टनरशिप (आरसीईपी) के विरोध में सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया. वहीं अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति की मानें तो आरसीईपी की संधि के लागू होने से देश के कृषि क्षेत्र में बहुत बुरा असर होगा. साथ ही देश का डेयरी उद्योग भी पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा. वहीं किसानों का मानना है कि, अगर देश में आईसीपी लागू किया जाता है तो, इससे देश के एक तिहाई बाजार पर न्यूजीलैंड, अमेरिका और यूरोपीय देशों का कब्जा हो जाएगा. इस समय जो मूल्य किसानों को उनके उत्पाद पर मिल रहा है उससें गिरावट आ जाएगी. जिससे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. यही वजह है कि, आज देश में करीब 250 किसान संगठनों ने जिला और स्थानीय स्तर पर आरसीईपी के विरोध में प्रदर्शन किया. किसानों का कहना है कि जहां देश में किसानों की उनकी फसलों का सही दाम नहीं मिल पाता, फसल नष्ट हो जाती है और किसान कर्ज के बोझ तले दब जाता है, यहीं वजह है किसान आत्महत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं. वहीं सरकार किसानों को सशक्त करने के बजाय आरसीईपी पर हस्ताक्षर करने जा रही है. जिससे किसानों की परेशानियां और बढ़ जाएगीं
  2. जहां दिपावली के बाद से ही दिल्ली एनसीआर से इसके आस पास के इलाकों में प्रदूषण हर स्तर को पार कर गया है. वहीं सरकारों का आपस का खेल अभी भी जारी है. जहां एक तरफ बरसों से हरियाणा, पंजाब के किसान पराली जलाते आ रहे हैं, वहीं पराली जलाना इस समय राजनीतिक मुद्दा बन गया है. गौरतलब है कि, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली तीनों राज्यों में अलग-अलग पार्टियों की सरकारें हैं. जिसके चलते इस समय किसानों की पराली से होने वाला प्रदूषण देश में राजनीतिक मुद्दा बन गया है. जहां एक तरफ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल बढ़ते प्रदूषण को लेकर हरियाणा, पंजाब पर दोष मढ़ रहे हैं तो वहीं हरियाणा और पंजाब के यहां की सरकारों का ज्यादा समय पराली कहां ज्यादा जलाई गई ये बताने में निकल रहा है. वहीं अगर हकीकत की बात करें तो पिछले कुछ समय में हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में कमी आई है. साथ ही किसानों ने भी पराली प्रबंधन के लिए सरकार से बोनस की मांग शुरू कर दी है. हालांकि अभी तक इसको लेकर का कदम नहीं उठाया गया है. वहीं दूसरी तरफ हरियाणा सरकार डिकंपोजर दवा पर सब्सिडी देने जा रही है, जिसके बावजूद भी किसानों में कोई खुशी नहीं है, क्योंकि इस बैक्टीरिया से पराली दो महीने में नष्ठ होती है. जोकि लंबी प्रक्रिया है.
  3. जहां एक तरफ छत्तीसगढ़ में बेमौसम हुई बरसात के चलते धान की कटाई में देरी हो रही है, वहीं इससे किसानों की भी परेशानियां काफी बढ़ गई हैं. जिसको देखते हुए राज्य की बघेल सरकार ने किसानों को राहत देते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की तारिख को पहली दिंसबर 2019 कर दिया है. वहीं अगर पहले की बात करें तो पहले ये तारीख 15 नवंबर से तय की गई थी. साथ ही राज्य में किसानों से धान की खरीद 2,500 रुपये प्रति क्विटंल की दर की जाएगी, जोकि केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए समर्थन मूल्य से 36.23 फीसदी ज्यादा है. गौरतलब है कि, पिछले हफ्ते हुई कैबिनेट की बैठक में धान की खरीद पहली दिसंबर से 15 फरवीर तक करने का निर्णल लिया गया है. साथ ही राज्य के किसानों से धान की खरीद 2,500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाएगा. जबकि केंद्र सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए ए ग्रेड धान का समर्थन मूल्य 1,835 रुपये और कॉमन ग्रेड धान का 1,815 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है. बैठक के बाद राज्य के कृषि मंत्री ने कहा कि, इस बार 85 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का लक्ष्य रखा गया है. जोकि पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा है. हालांकि बारिश में नष्ट हुई फसल के आकलन के निर्देश दे दिए गए हैं. साथ ही राज्य की सरकार ने किसानों के पंजीकरण की तारीख को भी बढ़ा दिया है.
  4. किसानों की आय में इजाफा करने के लिए केंद्र सरकार आए दिन नए-नए उपाय कर रही है.. इसी के चलते बीते रविवार को इफकों ने गुजरात के कलोल प्लांट में नैनो टैकनॉलोजी पर आधारित तीन ऐसे उर्वरक पेश किए हैं। जिनसे फसलों की पैदावार 30 फीसदी तक अधिक होगी.. इनमें नैनो नाइट्रोजन, नैनो जिंक और नैनो कॉपर पर ट्रायल शुरू करने की घोषणा की गई है। इसके लिए आयोजित की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस की दौरान केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री सदानंद गौड़ा  ने बताया कि, इन तीन उत्पादों से मिट्टी, किसान और पर्यावरण को फायदा मिलेगा और परंपरागत उर्वरकों की खपत में 50 प्रतिशत तक की कमी आएगी, साथ ही, इससे निवेश लागत भी कम होगी। इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी कहा कि, नैनो उत्पाद प्रधानमंत्री की ग्रीन परियोजना का हिस्सा है.. इससे ना केवल मिट्टी की गुणवत्ता अच्छी होगी बल्कि, किसानों की आय को दोगुना करने में भी काफी मदद मिलेगी।

 

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