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Kisan Bulletin 23rd Nov- किसान ने बनाई मक्का निकालने की मशीन

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Kisan Bulletin 23rd Nov

Kisan Bulletin 23rd Nov

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Kisan Bulletin 23rd Nov-

  1. हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के धारभरथा गांव का रहने वाला एक किसान गुरूदेव सिंह ने एक ऐसी मशीन बनाई है..जो कुछ मिनटों में ही मक्के के दानों को फसल से अलग कर देती है.. आपको बता दें कि, इस मशीन के जरिए केवल कुछ मिनटों में ही क्विटलों के हिसाब से मक्की की दाने निकाले जा सकते है.. इतना ही नहीं, इस मशीन की खासियत है कि, ये बाजार में मिलने वाली मक्की पिलर मशीनों से दो से तीन गुना अधिक क्षमता के साथ काम करती है। और तो और ये बाजार में बिकने वाली मशीनों की तुलना में काफी किफायती है। खैर इन सबके बीच खास बात तो ये है कि, गुरदेव सिंह कोई बहुत पढ़े लिखे इंजीनियर नहीं हैं, बल्कि वो तो सिर्प 7वीं पास है.. गुरूदेव के अनुसार, एक बार वह लुधियाना इंडस्ट्री में मक्की पिलर मशीन लाने के लिए गए थे, लेकिन वहां पर उनकी पसंद की कोई मशीन नहीं मिली. इसके बाद घर आने पर गुरदेव सिंह ने स्वयं मशीन बनाने की कोशिश की और छह से सात हजार की लागत से ये मशीन बनाकर तैयार कर दी है. इस मशीन की खासियत यह है कि इसमें एक से दो टोकरी मक्की आ जाती है, जबकि बाजार में मिलने वाली महंगी मक्की पिलर मशीनों में एक-दो छल्ली से ज्यादा नहीं जाती और इन मशीनों में दाने अलग करने में भी काफी समय लगता है। आपको बता दें कि, गुरदेव सिंह खेती-बाड़ी के साथ-साथ स्वारघाट में चाय व मिठाई की दुकान भी चलाते है… मगर ये मशीन बनाने के बाद उनके आसपास के गाँवों के बाकी लोग भी अब उन्हें ऐसी मशीन बनाने की डिमांड कर रहे है।

2. आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश के किसान और छोटे उद्यमी को बिचौलियों से बचाने के लिए उत्तर प्रदेश की सरकार सब्सिडी देने जा रही है. इसके साथ ही किसान और छोटे उद्यमी अपनी फसल का निर्यात खुद कर सकेंगे. उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की ओर से अब तक कई किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. साथ ही इन किसानों का जल्द रजिस्ट्रेशन भी किया जाएगा. जिसके चलते आने वाले दिनों में यूपी के किसान और छोटे उद्यमी एक्सपोर्टर की भूमिका में नजर आएगें. वहीं उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण और निदेशक डॉ. एसबी शर्मा की मानें तो अब किसान और छोटे उद्यमी अपना अपना प्रॉडक्ट तैयार करने के साथ साथ उसका निर्यात कर सकेंगे. हालांकि पहले के समय में महज बड़े व्यापारी ही ऐसा कर पाते थे, जिसके चलते किसानों और छोटे उद्यमियों को उसका सही मुनाफा नहीं मिल पाता था. आपको बता दें कि किसानों को इसके लिए प्रॉडक्ट की प्राइमरी प्रॉसेसिंग के लिए वेयर हाऊस भी उपलब्ध कराया जाएगा. साथ ही इसकी मदद के लिए अन्य इकाइयों की मदद ली जाएगी. जिसके लिए उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के उपनिदेशक डॉ. आरके सिंह की मानें तो यूरोपियन देशों में इसके लिए निर्यात की योजना बनाई जा रही है. इन देशों में पेस्टीसाइड रहित प्रॉडक्टस की डिमांड है. जिसके चलते इन दिनों आम, आलू, स्ट्राबेरी के साथ साथ हरी मटर और चावल के निर्यात की तैयारी इस समय कराई जा रही है. इच्छुक किसानों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है. जिसमें अब तक यूपी के हिस्सों के किसानों को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जबकि अगल प्रशिक्षण कार्यक्रम वाराणसी में किए जाने की तैयारियां की जा रही हैं.

3.  जहां मानसून के दिनों में आई बाढ़ ने बिहार के किसानों की फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया था. वहीं इन दिनों बिहार सरकार बाढ़ और सुखा ग्रसित किसानों के नुकसान की भरपाई करने जा रही है. जिसके लिए अनुदान भारत सरकार द्वारा अधिसूचित प्राकृतिक आपदाओं और राज्य सरकार के मापदंडों के अनुरूप किसानों को इनपुट अनुदान दिए जाने का निर्णल लिया गया है. गौरतलब है कि, बिहार में आई बाढ़ और कुछ जगहों पर सूखे ने किसानों की खरीफ फसलों को काफी नुकसान पहुंचाया था. जिसके लिए बिहार की सरकार ने ये फैसला लिया है. आपको बता दें कि, इसके लिए कृषि विभाग की तरफ से दर भी निर्धारित की गई है. जिसके लिए सूखा प्रभावित जिलों में परती भूमि वाले किसानों को बिहार सरकार 2800 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान देगी. जबकि जिन किसानों ने अपने खेत में फसल लगाई थी. जबकि असिंचित फसल क्षेत्र के लिए 6800 रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान दिया जाएगा. साथ ही सिंचित क्षेत्र के लइए ये रकम 13500 रुपये प्रति हेक्टेयर होगी. आपको बता दें कि कृषि इनपुर अनुदान की घोषणा करते हुए बिहार के कृषि मंत्री प्रेम कुमार ने कहा कि, ये अनुदान अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के किसानों को ही मिलेगा. साथ ही कृषि मंत्री ने कहा कि, जुलाई 2019 में आई बाढ़ का भुगतान किसानों को किया जा चुका है. यही वजह है कि, ऐसे किसानों को सितंबर में फिर से आई बाढ़ का मुआवजा नहीं दिया जाएगा, इसके लिए किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. जिसके आधार पर उन्हें सब्सिडी दी जाएगी.

 

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