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Kisan Bulletin 22nd Oct- हिमाचल में भांग की खेती कर सकेंगे किसान

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Kisan Bulletin 22nd Oct

Kisan Bulletin 22nd Oct

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Kisan Bulletin 22nd Oct-

  1. मॉनसून खत्म होने के बाद भी देश के दक्षिण इलाकों में बारिश जारी है… आपको बता दें कि, केरल में लगातार कुछ दिनों से हो रही बारिश के चलते राज्य के 7 जिलों में ऑरेंज अलर्ट भी जारी कर दिया गया है.. तो वहीं तिरूवंतपुरम और एरनाकुलम में तो बारिश के कारण स्कूलों में भी छुट्टी का ऐलान कर दिया गया है.. भारतीय मौसम विभाग के की मानें तो केरल में अगले चार दिनों तक बारिश होने का अनुमान है.. तो वहीं राज्य के तिरुवनंतपुरम और एरनाकुल्म, त्रिवेंद्रम, त्रिसुर, पलक्कड़, मलापुरम, अलपुझा और वायानाड जिलों में 21 अक्टूबर को ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के कई इलाकों में इस दौरान 115 से 204.5 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है। तो वहीं ज्यादातर हिस्सों में 24 अक्टूबर को भारी बारिश होने का अनुमान लगाया गया है.. इसके अलावा आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, मध्य महाराष्ट्र, तमिलनाडु के कुछ हिस्सों, तटीय आंध्र प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर अच्छी वर्षा हो सकती है। दक्षिणी मध्य प्रदेश, दक्षिण छत्तीसगढ़, ओडिशा, दक्षिणी झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल, असम के कुछ हिस्सों के साथ जम्मू और कश्मीर में छिटपुट जगहों पर हल्की तो एक-दो स्थानों पर मध्यम बरसात के आसार हैं। आपको बता दें कि, केरल और आंतरिक कर्नाटक में पिछले 24 घंटों के दौरान मूसलाधार बारिश दर्ज हुई।
  2.  हाल ही में आई कुछ खबरों के मुताबिक, बढ़ती हुई बीमारियों और दवाओं की मांग को ध्यान में रखते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार भांग की खेती को मंजूरी देने के लिए तैयार हो चुकी है.. आपको बता दें कि, इसको लेकर सरकार ने लगबग पूरी तैयारी भी कर ली है.. तो वहीं ऐसा माना जा रहा है कि, जल्द ही राज्य सरकार इस पर अपनी मुहर भी लगा देगी.. दरअसल, भांग का इस्तेमाल हमारे देश में कई तरह से किया जाता है.. भांग का इस्तेमाल कई तरह की दवाईयां बनाने के लिए किया जाता है, जिसके चलते सरकार ने इसकी खेती को कानूनी तौर पर मंजूरी देने का फैसला लिया है.. हालांकि, इससे पहले उत्तराखंड की सरकार ने भांग को परमीट देते हुए उसकी खेती को कानूनी रूप से मंजूरी दी थी मगर यहां भांग की खेती को मात्र कुछ विशेष उत्पादों के निर्माण के लिए ही मंजूरी मिली थी. आपको बता दें कि, इस फैसले पर लोगों ने काफी विरोध जताया है. तो वहीं कई भांग का उत्पादन करने वाले किसानों के लिए ये खुशखबरी साबित हो सकती है।
  3. हर साल से बाढ के कारण फसलों की नुकसान हाने के डर से अब किसानों को मुक्ति मिल सकेगी। किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने धान की एक नई किस्म का इजाद किया हैख् जो बाढ के प्रभाव में भी अची रह सकती है और उत्पाद भी अच्छा देगी। दरअसल ब्रह्मवार में आंचलिक कृषि और बागवानी अनुसंधान केंद्र (ZAHRS) और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) ने धान की नई बाढ़ प्रतिरोधी किस्म – ‘y सह्याद्री पंचमुखी ’को लांच किया है। धान की इस नई किस्म को शनिवार को ब्रह्मवारा में कृषि मेले में लांच किया गया। धान की इस किस्म को लेकर उडुपी में पिछले साल से ही काम चल रहा था। सह्याद्री पंचमुखी किस्म के लिए जर्मप्लाज्म लाइनें फिलीपींस से लाई गई थीं। यह किस्म बाढ़ प्रभावित इलाकों के लिए उपयुक्त है। इस धान के डंठल लगभग 90 से 95 सेंटीमीटर तक बढ़ते हैं और आठ से 12 दिनों तक बाढ़ के पानी का सामना कर सकते हैं साथ ही ये किस्म प्रति एकड़ 20 क्विंटल की उपज भी देती है। आपको बता दें कि इससे पहले MO4 किस्म को 1995 में पेश किया गया था, जिससे 18 क्विंटल की उपज प्रति एकड़ मे प्राप्त की जाती थी।

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