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Kisan Bulletin 15th Nov- खराब बीजों की बिक्री पर रोक लगाएगी केंद्र सरकार

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Kisan Bulletin 15th Nov

Kisan Bulletin 15th Nov

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Kisan Bulletin 15th Nov- 

  1. दूसरी बार लगातार सत्ता में आई मोदी सरकार ने किसानों के लिए कई बड़ी योजनाओं का ऐलान किया है और इसी कड़ी में अब एक बार और मोदी सरकार किसानों के लिए एक ब़डा कदम उठाने जा रही है। जिसके तहत किसानों को नकली और खराब बीज बेचने वाली कंपनियों पर सरकार 5 लाख रूपये तक का जुर्माना लगाएगी.. जो कि, फिलहाल 500 से 5000 रूपये तक वसूला जाता है, इसके लिए केंद्र सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में बीज विधेयक 2019 भी लेकर आने वाली है। कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, देश में बिक रहे कई तरह के फसलों के बीज संस्थानों द्वारा प्रमाणित नहीं हैं किसान खराब बीजों को महंगे दाम पर खरीद लेते हैं मगर फिर फसल की पैदावार नहीं होने पर बर्बादी के शिकार हो जाते हैं.. तो वहीं देश के ज्यादातर किसान अपनी फसल का 30 प्रतिशत हिस्सा बीज के लिए बचाकर रखते हैं, और उसे ही बोते है.. जबकि, बाजार में बिकने वाले बीज में से 45 प्रतिशत बीज भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा प्रमाणित होते हैं और 55 फीसदी बीज निजी कंपनियां बेचती है.. जिनमें से ज्यादातर कंपनियों का कोई प्रमाण नहीं होता, ऐसे में सरकार खराब बीजों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए सख्ती चाहती है सरकार इसके लिए नया विधेयक लाने पर विचार कर रही है। जो कि, 5 दशक पुराने बीज अधिनियम 1966 की जगह लेगा.. इस नए विधेयक में सरकार सभी बीजों के लिए समान प्रमाणन की व्यवस्था करेगी.. और बारकोडिंग भी की जाएगी..
  2. जहां एक तरफ महाराष्ट्र में सियासी घमासान का दौर जारी है.. सभी पार्टियों की नजरें केवल इसी बात पर टिकी हुई हैं कि, सरकार किसकी बनेगी और किसे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया जाएगा.. तो वहीं दूसरी तरफ राज्य में मौसम की मार झेल चुके किसानों की तरफ किसी भी पार्टी का ध्यान नहीं है, ऐसे में बीते गुरूवार को मुंबई में किसानों ने जमकर प्रदर्शन किया.. कहीं सूखे तो कहीं बाढ़ के चलते तबाह हुई फसलों की मुआवजा राशि को लेकर किसानों ने बड़ी संख्या में राजभवन की तरफ कूच किया.. इस दौरान किसानों ने सभी राजनीतिक पार्टियों के विरोध में नारेबाजी की.. हाथ में अपनी खराब फसलों को लिए किसान राजभवन की तरफ बढ़ते रहे.. मगर मामला बिगड़ता देख पुलिस ने भी कई किसानों को अपनी हिरासत मे ले लिया.. हालांकि, इसके बाद प्रदर्शन तो खत्म हुआ मगर किसानों का गुस्सा अभी शांत नहीं हो सका है.. जाहिर है पिछले 4 महीनों में महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में तो भारी बारिश ने फसलों को तबाह कर दिया था। वहीं कई इलाके ऐसे भी थे, जहां पर बारिश की इतनी कमी रही कि, उन्हें सूखाग्रस्त घोषित करना पड़ा.. जहां चुनाव से पहले सरकार ने किसानों को खराब फसलों का मुआवजा देने की बात कहकर अपने झांसे में फंसाया था, तो वहीं अब हालात ऐसे बन गए हैं, कि चुनाव खत्म होते है सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया है और किसानों को सड़कों पर उतरने पर मजबूर होना पड़ रहा है..
  3. जहां एक तरफ धान की कटाई खत्म हो चली है, वहीं गेहूं की बुवाई जोरों पर है. साथ ही धान की खरीदी की शुरूवात हो चुकी है. ऐसे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने धान खरीदी पर इस बार 50 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य रखा है. साथ ही उन्होंने निर्देश जारी कर कहा है कि, धान खरीदी के 72 घंटे के अंदर ही ऑनलाइन भुगतान किसानों के खातों में कर दिया जाएगा. वहीं एक और जानकारी की मानें तो उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर सभी धान क्रय केंदों की क्रियाशीलता को इस समय सुनिश्चित किया जा रहा है. जिसके चलते इस समय अधिकारीयों को निर्देश जारी किया गया है कि, वो फील्ड में निकलकर धान क्रय केंदों का नियमित निरीक्षण करें. साथ ही किसानों को उचित सुविधाऐं भी उपलब्ध कराई जाएं. आपको बता दें कि, जहां साल 2017-18 में 14 नवंबर तक 4.57 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद का रिकॉर्ड था, वहीं इस साल अब तक लगभग 6.18 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है. इसके साथ उन्होंने कहा कि, राज्य सरकार किसानों की खुशहाली के लिए इस समय हर एक कदम उठा रही है. जिससे किसानों को परेशानियों का सामना ना करना पड़े. यही नहीं उन्होंने कहा कि, राज्य सरकार किसानों को समर्थन मूल्य योजना का पूरा लाभ दिलाने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है.
  4. पिछले कुछ समय से देशभर में लगातार बढ़ रहे प्याज और टमाटर के दामों ने आम जनता को काफी परेशानी में डाला हुआ है। इसी बीच बीते बुधवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने कुछ आंकड़े जारी किए जिनके अनुसार, इस साल अक्टूबर के महीने में खुदरा महंगाई दर 4.62 प्रतिशत पर पहुंच गई जो पिछले 16 महीनों में अब तक उच्चतम स्तर है.. जिसका मुख्य कारण सब्जियों की कीमतों में आया उछाल को बताया जा रहा है। आपको बता दें कि, उपभोक्ता स्तर पर देखा जाए तो कई शहरों में प्याज की कीमतें 80 से 100 रूपये प्रति किलों पहुंच गई है। ऐसी स्थिति में सरकार ने MMTC के जरिए एक लाख से ज्यादा प्याज के आयात का टेंडर जारी कर दिया है…हालांकि, इस प्याज को मंडियों तक पहुंचनें में अभी कुछ समय लगेगा.. और हो सकता है कि तब तक खरीफ की प्याज की आपूर्ति भी बढ़ जाएगी.. जिसके चलते ऐसा माना जा रहा है कि, दिसंबर तक प्याज की कीमतों में गिरावट आजाएगी.. इसके अलावा देशभर में सबसे ज्यादा इस्तेमाल आलू, प्याज और टमाटर जैसी सब्जियों का ही किया जाता है.. ऐसे में साल 2018-19 में आलू का उत्पादन 530 लाख टन के करीब हुआ था। तो वहीं प्याज का 235 लाख टन और टमाटर का उत्पादन 194 लाख टन रहा..

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