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Kisan bulletin 13th july 2019- ऑर्गेनिक खेती कर मिसाल बने रविंद्रन

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Kisan bulletin 13th july 2019

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Kisan bulletin 13th july 2019-

  1. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के भनपुरी, उरला और महासमुंद में बीते दिन कृषि विभाग ने 3 खाद फैक्ट्रियों पर छापा मारा. इस दौरान विभाग ने फैक्ट्रियों के स्टॉक को जब्त कर लिया, साथ ही फैक्ट्रियों में खाद बनाने और बेचने पर रोक लगा दी. आपको बता दें कि, कृषि संचालक के निर्देश पर 3 अलग-अलग टीमों ने एक साथ 3 फैक्ट्रियों पर छापेमारी की थी. इस दौरान तीनों फैक्ट्रियों से खाद के सैंपल भी विभाग ने जांच के लिए लिए हैं. जिसके जल्द ही लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा. वहीं विभाग की मानें तो सैंपलों की लैब से रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाही तय की जाएगी. आपको बता दें की भनपुरी औघोगिक क्षेत्र स्थिक माधव एग्रो केम में छापा मारने गई टीम को वहां गंदगी मिली थी. जिसके बाद वहां रखे गए खाद स्टॉक में गुणवत्ता खराब होने की आशंका भी विभाग ने जारिह की थी. जाहिर है, जहां एक तरफ किसान अपने फसलों और खेती की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए आए दिन रासायनिक पर्दाथों और खादों का इस्तेमाल करता ताकि उसकी उपज बेहतर हो सके. वहीं दूसरी तरफ फैक्ट्रियों के मिलावटी केमिकल्स और इस तरह की लापरवाही, उपज के साथ किसानों की खेती की उर्वरा शक्ति भी खराब कर देता है.
  2. एक तरफ जहां माटी से अधिक उपज लेने के लिए किसान अधिक से अधिक रासायनिक पर्दाथों और खादों का इस्तेमाल किसान कर रहे हैं, वहीं इनके अधिक प्रयोग से खेती की मिट्टी को काफी नुकसान पहुंच रहा है. आपको बता दें कि, उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के कृषि योग्य जमीन में ह्यूमरस यानी की जीवांश कार्बन इस समय महज 25 फीसदी ही शेष बचे हुए हैं. जिसके चलते आने वाले कुछ सालों से भूमि के बंजर होने के मौके लगातार बढ़ते जा रहे हैं. वहीं कृषि विभाग के मृदा प्रयोगशाला के अधिक्षक सुंदरलाल वर्मा की मानें तो जिले की कृषि योग्य भूमि में नाइट्रोजन, फास्फोरस, कैल्शियम की कमी होना आज से समय में यहां की जमीन में आम बात हो गया है. मगर ह्यूमरस की कमी होना चिंता का विषय बनता जा रहा है. जहां इस तत्वी की खेती में उपोयगिता कम से कम 0.8 होना आवश्यक है वहीं इस समय इसकी उपयोगिता सिर्फ 0.2 मिली ग्राम ही रह गई है. जाहिर है, ये तत्व माटी में जीवांश कार्बन फसलों को बढ़ने व दाने को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है. हालांकि यहां की माटी में इसकी कमी लगातार बढ़ती जा रही है. जिससे आने वाले समय में यहां की माटी पर बंजर होने का खतरा मंडरा रहा है. जाहिर है जिस तरह किसी इंसान को जिंदा रहने के लिए हिमोग्लोबिन की जरूरत पड़ती है, ठीक उसी तरह माटी में अच्छी उपज और माटी को बेहतर होने के लिए ह्यूमरस यानि की कार्बनिक पदार्थ की मात्रा का होना जरुरी होता है. माटी में इसकी मात्रा बढ़ाने के लिए किसान भाई जिप्सम, सनई, मूंग, उड़द, ढ़ैचा और हरी खादों का प्रयोग कर सकते हैं.
  3. एक तरफ जहां दूषित वायु, दूषित पानी और दूषित अन्न आज करोड़ों लोगों की जान ले रहा है, वहीं ऐसे भी न जानें कितने लोग हैं जो इनके खतरे को समझते हुए, उम्मीद की नई किरण जगा रहे हैं. दूषित अनाज और दूषित फल से बढ़ते कैंसर के खतरे को देखते हुए, केरल के तिरुवंतपुरम के रहने वाले रवींद्रन ने ऑर्गेनिक खेती की शुरूवात की है. आपको बता दें कि, ऑर्गेनिक खेती करने से पहले रवींद्रन सऊदी अरब में ऑटोमोबाइल की नौकरी कर रहे थे. साल 1996 में सऊदी में ऑटोमोबाइल में अपना करियर शुरू करने वाले रवींद्रन एक बार किसी काम के चलते तिरुवंतपुरम के रिजनल कैंसर इंस्टीट्यूट गए थे. जहां जाकर उन्होंने देखा की वहां मौजूद 100 मरीजों में से 90 किसान दूषित भोजन और दूषित फल के चलते कैंसर से जूझ रहे हैं. क्योंकि केमिकल खाद और केमिकल दवाइयों से उगाई गई फसलों के चलते, फसलों और फलों में इनके अंश भी मिल रहे हैं. जिसके चलते कैंसर जैसी गंभीर समस्या आज आम हो गई है. यही वजह थी की रवींद्रन ने ऑटोमोबाइल की नौकरी छोड़कर उसी समय से ऑर्गेनिक खेती करने की शुरूवात की, हालांकि खेत न होने के चलते उन्होंने अपनी कंपनी की ही छत पर ऑर्गेनिक खेती की शुरुवात की और आज उनका ये प्रयास अनेकों लोगों की मिसाल बन गया है. जिसे देखकर उनके यहां के किसान उनसे खेती के हुनर सीखने आते हैं. ताकि खेती में केमिकल पर्दाथों का इस्तेमाल रोका जा सके और खेती और फसल को सुरक्षित बनाया जा सके.
  4. रांची जिला सहकारिता पदाधिकारी ने बीते दिन चान्हो प्रखंड लैंप्स में धान खरीद में हुई गड़बड़ी के मामले में लैंप्स के कंप्यूटर ऑपरेटर का खाता सील कर दिया है. आपको बता दें कि, इस कंप्यूटर ऑपरेटर ने किसान के नाम पर फर्जी खाता खोलकर पांच लाख 70 हजार रुपए अपने एकाउंट में ट्रांसफर कर लिया है. जिसका खुलासा होने पर कार्यवाही की गई.

  5. उत्तर प्रदेश के रजबपुर में बीते दिन पंचायत रखी गई थी. जिसमें बकाया गन्ना किसानों के मूल्य भुगतान को लेकर किसान अपनी बात रखने वाले थे. हालांकि इस दौरान पंचायत में अधिकारी ही नहीं आए. जिससे नाराज किसानों ने हाईवे पर जाम लगा दिया. हालांकि एसडीएम सदर इंद्र नदन सिंह के समझाने पर किसान की नाराजगी शांत हुई.
  6. जहां एक तरफ मानसून की बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में मानसून के न बरसने से किसानों के सामने उनकी मक्के की फसल बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है. जहां जिला मक्का उत्पादन में पिछले साल छिंदवाडा नंबर एक पर था.

 

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