February 21, 2024

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Kisan bulletin 13th April 2019- धान के बीज पर मिलेगी 50% सब्सिडी

Kisan bulletin 13th April 2019
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Kisan bulletin 13th April 2019-

  1. फसलों की उत्पादकता बढ़ाने के साथ कम लागत में खेती करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार सभी किसानों को हर साल अनुदान पर बीज मुहैया कराती हैं. किसान भी सरकारी बीजों की गुणवत्ता पर भरोसा करते हैं. और जमकर उसकी खरीदारी करते है. सब्सिडी यदि अधिक हो तो किसानों का रुझान सरकारी बीज की तरफ कुछ ज्यादा ही बढ़ जाता है. इसी कड़ी में जायद के सीजन में धान की खेती करने के लिए उत्तराखंड सरकार की ओर से धान के बीज पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है. दरअसल उत्तराखंड कृषि विभाग किसानों की सुविधा के लिए धान के बीज पर 50 प्रतिशत सब्सिडी देगा। आपको बता दें कि, उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले की सभी 27 न्याय पंचायतों के साथ ही 35 सहकारी समितियों से किसान छूट पर धान का बीज खरीद सकते हैं।
  2. एक तरफ किसानों के हित की बड़ी-बड़ी बातें हो रहीं हैं लेकिन वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के चित्रकुट में अभी तक दलहन खरीद केंद्र भी नहीं खोले गए हैं। जिससे सरसों अरहर मसूर से लेकर तिलहन दलहन की फसलों को बेचने में किसान हिचकिचा रहा है। खुले बाजार में किसानों को पांच सौ रुपये कुंतल की दर से नुकसान हो रहा है। दलहन व तिलहन की फसल तैयार होने के बाद किसान अब इसकी बिक्री के लिए सरकारी केंद्र के खुलने का इंतजार कर रहा है। आपको बता दें कि, साल 2018 में प्रशासन ने भौंरी के बसिला गांव में नैफेड ने ये केंद्र खोला था। जिसमें लगभग आठ हजार कुंतल दलहन व तिलहन की खरीद हुई थी। लेकिन इस बार अभी तक ये केंद्र नहीं खोला गया है। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष रामसिंह पटेल ने बताया कि कई बार प्रशासन को पत्र लिखकर इस सेंटर को संचालित कराने की मांग की गई है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। जिसके चलते किसान अपनी सरसो और मसूर बेचने के लिए परेशान हैं।
  3. हरियाणा के रोहतक जिले में सरसों उत्पादक किसानों की मुश्किलें इन दिनों बढ़ती जा रही है। जिसका कारण मंडी में आढ़ती एसोसिएशन की हड़ताल होना है। आढ़तियों की हड़ताल शुक्रवार को तीसरे दिन भी जारी रही और उन्होंने मंडी में धरना देकर नारेबाजी की। आढ़तियों का कहना है कि सरकार आढ़तियों के हित में फैसला नहीं ले रही है। जिससे आढ़तियों में रोष है। इसी रोष को प्रकट करने के लिए उन्होंने हड़ताल की है। लेकिन अभी तक सरकार की ओर से उनसे बातचीत भी नहीं की गई है। उधर, आढ़तियों की हड़ताल के चलते मंडी में मजदूर भी काम नहीं कर रहे है। ऐसे में आढ़तियों की हड़ताल से मंडी में सरसों की खरीद का कार्य ठप हो चला है। उपर से मौसम के बदलते मिजाज से भी किसानों की चिंता बढ़ गई है। समय पर सरसों की बिक्री नहीं होने से किसानों में रोष बढ़ता जा रहा है। इसी के चलते किसान नेता प्रीत सिंह ने इस मामले में सरकार से जल्द से जल्द किसानों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। साथ ही समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
  4. अप्रैल के दूसरे हफ्ते में ही अचानक गंडक नदी का जल स्तर बुधवार की रात बढ़ गया. इससे नदी का पानी नीचले इलाकों में फैलने लगा है। जिसके चलते नदी के आस पास की 580 एकड़ में फैले तरबूज, ककड़ी, खीरा, लौकी, की फसल बर्बाद हो गयी. किसान सुबह जब अपने खेत पर पहुंचे तो नदी उनके फसल को डुबो चुकी थी. किसान इस बर्बादी को देखकर बिफर पड़े। आपको बता दें कि, किसानों ने कर्ज लेकर नदी के तटवर्ती इलाकों में प्रतिवर्ष के अनुरूप इस बार भी सब्जी और सीजनल फलों की खेती की थी। लेकिन फसल डूबने के बाद बैकों से कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों की नींद हराम हो गयी है। मांझा प्रखंड की निमुइया पंचायत में सबसे अधिक तबाही हुई हैं. निमुइया पंचायत के लगभग तीन दर्जन से अधिक ऐसे किसान हैं, जिन्होंने कर्ज लेकर खेती किया था. उम्मीद थी कि फल और सब्जी को बेचकर न सिर्फ कर्ज चुकता करेंगे. किसानों ने बताया कि बरसात में तो तबाही होती है, लेकिन इस बार नदी ने अप्रैल के महीनें में ही तबाही शुरू कर दी है. गंडक नदी के तटवर्ती इलाके में जब बाढ़ खत्म होती है, तब आसपास के किसान यहां सब्जी और सीजनल फलों की खेती करते हैं। लेकिन इस बार नदी में अचानक पानी बढ़ने से फसल डूब गयी है. दरअसल यहां 15 जून के बाद ही नदी में पानी बढ़ता है लेकिन इस बार अप्रैल में पानी आने से किसान परेशान हो उठे हैं।

 

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