February 21, 2024

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Kisan bulletin 10th April 2019- किसानों की फसल में फिर लगी आग

Kisan bulletin 10th April 2019
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Kisan bulletin 10th April 2019-

  1. मध्यप्रदेश के बाबई जिले में मंगलवार को नौ गांवों के खेतों में पड़ी नरवाई में आग लग गई। इस आग से 65 किसानों की चार सौ एकड़ में खड़ी गेहूं की फसल देखते ही देखते जलकर खाक हो गई। इससे करीब डेढ़ करोड़ का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है, खेत में गेहूं की फसल के साथ-साथ कई पेड़ भी जले हैं। इस भीषण आगजनी के बाद छोटे किसान बर्बाद हो गए हैं। उनके घरों में एक दाना भी नहीं बचा। किसानों के चूल्हे जलना भी मुश्किल हो गया है। आपको बता दें कि, इस आग को काबू करने इटारसी, होशंगाबाद, सोहागपुर से दमकलें बुलाई गई। इस आग के बाद से सबसे अधिक नुकसान तमचरू में हुआ। आपको बता दे कि बीते शनिवार को ही मध्य प्रदेश के होशांगाबाद जिले में किसानों की हजारों एकड़ की जमीन पर आग लगने से उनकी फसलें बर्बाद हो गई थी.. जिसके बाद अब मंगलवार को बाबई जिले में घटना घटी.. एक तरफ मौसम में हो रहे बदलाव से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा रही हैं… तो वहीं दूसरी तरफ खेतों आगजनी के मामले में थमने का नाम नहीं रहे हैं.. ऐसे में किसान भाईयों से निवेदन कि अपना संयम ना खोए.. और खेतों में फसल अवशेषों को ना जलाएं.. ये केवल खेतों में आग लगने का खतरा नहीं बढ़ाती.. बल्कि, ऐसा करना पर्यावरण के लिए भी नुकसान देय  है।
  2. हरियाणा के करनाल की पिकाडली शुगर मिल प्रबंधन ने मंगलवार को शुगर मिल बंद कर दिया। जिसके विरोध में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान और गन्ना संघर्ष समिति के प्रधान रामपाल चहल की अध्यक्षता में सभी किसान एकजुट हो गए और मिल चलाने की मांग पर अड़ गए हैं। आपको बता दें कि पिकाडली शुगर मिल से फैलने वाले प्रदूषण के खिलाफ भादसो गांव की ग्राम सेवा समिति ने एनजीटी कोर्ट में केस दायर किया हुआ है। एनजीटी के कड़े रुख के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी सख्ती दिखाते हुए पिकाडली डिस्टरली और पिकाडली शुगर मिल को बंद करने का फैसला लिया। जिसके चलते मंगलवार को जब शुगर मिल प्रबंधन ने ही मिल बंद करने का फैसला लिया तो किसान इकठ्ठा हो गए। शुगर मिल में काफी देर तक किसान इस जिद पर अड़े रहे कि शुगर मील को चलाया जाए, लेकिन मिल प्रबंधन कार्यवाही के डर से मिल चलाने से इंकार करते रहे। इस पर 5 सदस्यीय कमेटी ने फैसला किया कि किसानों की बकाया गन्ने की फसल को नारायणगढ़, यमुनानगर और कैथल मिल में गिराया जाए,लेकिन इस पर भी किसान सहमत नहीं हुए और मिल चलाने की मांग पर अड़े रहे। हालांकि, गन्ना संघर्ष समिति के प्रधान रामपाल चहल ने किसानों के गन्ने की पिराई का प्रबंध करने का आश्वासन दिया है लेकिन किसानों को इस पर भरोसा नहीं है।
  3. सरकार की ओर से किसानों की फसल को लेकर किए जा रहे तमाम दावे धराशाही होते नजर आ रहे हैं। लोकसभा चुनाव मे जहां सरकार किसानों को राहत देने और उनकी आए को दोगुना करने की बात कर रही है। वहीं फसलों की ऑनलाइन बिक्री किसानों के गले की फांस बनी हुई है। किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए चरखी दादरी की अनाजमंडी में लंबी लाइन में लग कर भूखे प्यासे घंटों इंतजार करना पड़ रहा है. यहां तक कि फार्म खत्म होने के बाद भी दिन-रात किसान खरीद के लिए मारामारी कर रहे हैं। फसल बेचना किसान के लिए दोहरी मुसीबत बन गई है, किसान करें तो क्या करें. एक तरफ जहां मौसम करवट ले रहा है, ऐसे वक्त में किसान अपने खेतों में पड़ी फसल को संभाले या फिर मंडी में फसले बेचने के लिये घंटों लाइन में लगे. किसानों का कहना है कि ऑनलाइन फॉर्म जमा कराने के लिए उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ता है और लंबी लाइनों में लगना पड़ता है. यही नहीं एक किसान की अगर 25 क्विंटल से ऊपर सरसों है तो उसकी भी खरीद नहीं हो रही है. किसानों का आरोप है कि पटवारी और मार्केट कमेटी के अधिकारी उन्हें बार-बार चक्कर लगवा रहे हैं और सुबह से शाम तक वो ऑनलाइन करवाने के लिए कागजों में ही उलझ कर रह जाते हैं। वहीं दादरी मार्केट कमेटी के अधिकारी रामकिशन का कहना है कि ऑनलाइन वेबसाइट में से एक ही आईडी चल पाती है जिसके कारण कुछ फार्म ही ऑनलाइन हो पाते हैं।
  4. एचएच -152 डी के लिए अधिग्रहीत जमीन की मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग कर रहे किसान मंगलवार दोपहर के समय सांसद धर्मबीर सिंह का घेराव करने के लिए निकल पड़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें अनाज मंडी के पास बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इस दौरान किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने आगे बढ़ने की अनुमति मांगने के लिए डीएसपी रमेश कुमार से बातचीत की, लेकिन बात नहीं बन पाई। जिसके बाद किसानों ने नारेबाजी शुरू कर दी और करीब 30 मिनट बाद वापस धरनास्थल की ओर रवाना हो गए। आपको बता दें कि एचएच -152 डी के लिए अधिग्रहीत जमीन का किसान दो करोड़ रुपये प्रति एकड़ मुआवजा मांग रहे हैं। इसे लेकर वो गत 26 फरवरी से रामनगर के समीप धरना दे रहे हैं।

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