हरियाणा के यशपाल सिहाग बने किसानों के रोल मॉडल 

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कीड़ाजड़ी की खेती कर हरियाणा के यशपाल सिहाग बने किसानों के रोल मॉडल 

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देश की युवा पीढ़ी कृषि क्षेत्र में नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर सफलता के ऐसे उदाहरण खड़े कर रही है जो खेती को घाटे का सौदा मानने वालों की सोच को बदलने में सक्षम हैं। परंपरागत ढंग से खेती कर रहे किसानों की फसल कभी बेमौसम बारिश के कारण तो तो कभी सूखा पड़ने से बर्बाद हो जाती है और मुनाफा तो दूर लागत भी नहीं निकलती लेकिन युवा पीढ़ी इस समस्या पर पार पाने के लिए खेती के अपने तरीकों को बदल रही है, नतीजा ये कि मौसम पर निर्भरता कम हो रही है और नुकसान का डर भी खत्म हो रहा है।
किसान आधुनिक तकनीकें अपनाकर थोड़ी लागत मेहनत में अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। ऐसे ही एक सफल और आधुनिक किसान हैं हरियाणा हिसार के यशपाल सिहाग। जो मशरूम की सबसे महंगी किस्मों में से एक कीड़ाजड़ी की खेती करते हैं और सालाना 25-30 लाख की आमदनी लेते हैं।
कीड़ाजड़ी की खेती
कीड़ाजड़ी एक प्रकार का जंगली मशरूम है जो एक खास कीड़े की इल्लियों या कहिए कैटरपिलर्स को मारकर उसपर पनपता है इसका वैज्ञानिक नाम है कॉर्डिसेप्स साइनेसिस। हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाली इस ज़ड़ी को स्थानीय लोग कीड़ाजड़ी कहते हंम क्योंकि ये आधा कीड़ा है और आधा जड़ ।
यशपाल सिहाग ने हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाली कीड़ाजड़ी को हिसार में अपनी लैब में उगाकर किसानों के बीच एक मिसाल कायम की है। यशपाल आधुनिक तौर तरीकों से खेती करते हैं और करीब दो साल पहले इसी आधुनिक तरीके से उन्होंने कीड़ाजड़ी क शुरुआत की और 10×10 के तीन कमरों में लैब बनाकर कीड़ाजड़ी का व्यावसायिक उत्पादन शुरु किया और कीड़ाजड़ी की 680 प्रजातियों में से एक यारसागुंबा तैयार की। जिससे उन्हें अच्छा मुनाफा मिला। यशपाल हर साल कीड़ाजड़ी की तीन फसलें लेते हैं जिससे उन्हें सालाना 25 से 30 लाख का मुनाफा हो जाता है । अब यशपाल ने इस मुनाफे को बढ़ाकर सालाना 1 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य बनाया है ।

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कीड़ाजड़ी के कई इस्तेमाल हैं जैसे ब्लड शुगर कंट्रोल करने, रेस्पिरेटरी सिस्टम को दुरुस्त बनाने, किडनी व लीवर संबंधी रोगों से बचाव, शरीर में ऑक्सीजन की संतुलित करने, स्त्री व पुरुष में प्रजनन क्षमता व स्पर्म सेल्स बढ़ाने में कीड़ाजडी काफी उपयोगी मानी जाती है। इसके अलावा भी कई शारीरिक विकारों से बचाव व शारीरिक शक्ति के लिए तैयार की जाने वाली दवाओं में भी कीड़ाजड़ी का उपयोग किया जाता है।
सरल शब्दों में कहें तो कीडाजड़ी मशरूम की एक बेहद महंगी किस्म है जिसे उगाकर किसान चाहें तो अच्थी आमदनी ले सकते हैं।
इसकी खेती के लिए ज्यादा जमीन की भी जरूरत नहीं होती, किसान एक छोटे से कमरे से कीड़ाजड़ी की व्यावसायिक खेती शुरु कर सकते हैं और फिर मुनाफे के साथ साथ व्यवसाय को विस्तार दे सकते हैं। ऐसे किसान जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं वो पारंपरिक फसलों की बजाए कीड़ाजड़ी की खेती कर सकते हैं। इसकी शुरुआत के लिए 10×10 के एक कमरे में लैब बनाने पर करीब 8 से 10 लाख का खर्च आता है जिससे किसान 3 महीने में एक बार यानि सालभर में 3 से 4 बार कीड़ाजड़ी का उत्पादन ले सकता है।
हर तीन महीने में आप 10×10 के एक कमरे से लगभग 5 किलोतक फसल ले सकते हैं जिसकी बाजार में कीमत 1.5 से 2 लाख रुपये प्रतिकिलो तक है इस तरह आप लागत निकालकर भी 25-30 लाख रुपये सालाना कीड़ाजड़ी की फसल से कमा सकते हैं। कई राज्यों में अलग-अलग जगहों पर किसान कीड़ाजड़ी की खेती करके नाम और पैसा दोनों कमा रहे हैं।

Writer : Producer & Anchor – स्मिथा सिंह 

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