October 1, 2023

Grameen News

True Voice Of Rural India

जल, जमीन, गाय और स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाए : आचार्य देवव्रत

जल, जमीन, गाय और स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाए जरूरी : देवव्रत

जल, जमीन, गाय और स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक खेती को अपनाए जरूरी : देवव्रत

Sharing is Caring!

देश के किसानों ने जबसे प्राकृतिक और जैविक खेती का साथ छोड़ा है तभी से अधिकतर लोग बीमार होना शुरू हुए हैं। आज किसी भी शहर कस्बे में जाकर देखें तो अस्पताल भरे मिलेंगे। इसके जिम्मेदार हम स्वयं हैं। प्रकृति से दूर होकर हम लगातार खतरनाक रसायनों की ओर बढ़ रहे हैं। खेती में अधिक कीटनाशकों का इस्तेमाल ही हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा रहा है। जिससे घातक बीमारिया मानव शरीर को अपना शिकार बना रही हैं। किसानों की प्राकृतिक खेती की ओर आकर्षित करने के लिए मुज़फ्फरनगर के चौधरी छोटूराम डिग्री कॉलेज में एक कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्य्रक्रम में गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत के साथ ही डॉ. संजीव बालियान भी शामिल हुए।

कुपोषण से निपटने को बिहार में प्रोत्साहित किया जा रहा है बायो-फोर्टिफिकेशन

आचार्य देवव्रत ने प्राकृतिक खेती को अपनाने पर दिया जोर

कार्यक्रम में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए आचार्य देवव्रत ने कहा कि जमीन, पानी, गाय और स्वास्थ्य को बचाना है तो प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा। रासायनिक खेती और यूरिया हमें असाध्य रोग दे रही है। कैंसर, डायबिटीज और हार्ट अटैक यूरिया एवं पेस्टीसाइड की ही देन है। यूरिया के प्रयोग से जमीन बंजर होती जा रही है, पानी नीचे जा रहा है। खेतों में यूरिया डालकर हम पाप कर रहे हैं, लोगों को बीमारी परोस रहे हैं। हमें अपनी भावी पीढ़ी को बचाना है तो प्राकृतिक खेती को अपनाना होगा। आचार्य देवव्रत ने कहा कि कि 50 साल पहले जब देश में अन्न का संकट था, कृषि वैज्ञानिकों ने उपज बढ़ाने के जो उपाय किए, वह उस समय की मजबूरी थी। देश आज गेहूं, चावल और चीनी के उत्पादन में काफी आगे है, लेकिन दलहन और तिलहन बाहर से मंगाने पड़ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि रसायनिक खेती ने पैदावार बढ़ाई, साथ ही हमें असाध्य रोग भी परोस दिए। यूरिया और पेस्टीसाइड की होड़ में किसान ने अपने खेतों के मित्र जीवों को नष्ट कर दिया। खेतों में बैठने वाले पक्षी मर गए। अब हमारा नंबर है। वैज्ञानिक शोध में सामने आ रहा है कि हमने रसायनिक खेती पर अंकुश नहीं लगाया तो 25 साल बाद हमारी जमीन बंजर हो जाएगी। राज्यपाल ने कहा कि हमें फिर से प्राकृतिक खेती को अपना होगा। क्योंकि कृषि रसायनों और उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से जमीन में पानी का स्तर लगातार कम होता जा रहा है। आने वाले समय में यह और भी कम होगा।

आचार्य देवव्रत ने उदहारण देते हुए कहा कि 30 एकड़ में प्राकृतिक खेती हम देशी नस्ल की एक गाय के गोबर और मूत्र से कर सकते हैं। प्राकृतिक खेती से खर्च शून्य पर आ जाता है और उत्पादन बढ़ता है। कुरुक्षेत्र में हमारे गुरुकुल में 200 एकड़ में प्राकृतिक खेती हो रही है। आश्रम में 19 प्रांतों के बच्चे पढ़ते हैं और 325 देशी गाय हैं। हिमाचल में दस हजार और आंध्र प्रदेश में पांच लाख किसान प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। आचार्य ने इस मौके पर किसानों और छात्रों को प्राकृतिक खेती की विधि भी बताई। इस दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान भी अपने वक्तव्य रखे। इस पर उन्होंने कहा कि प्रकृतिक खेती के जरिए बदलाव की शुरुआत इसी जिले से होगी। इसके बाद कॉलेज के प्राचार्य ने कहा कि कॉलेज की 200 बीघा फार्म की जमीन में प्राकृतिक खेती होगी जिससे जिलें में एक रोल मॉडल तैयार किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © Rural News Network Pvt Ltd | Newsphere by AF themes.