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प्राईवेट हॉस्पिटल में मिला सरकारी दवाओं का खेप

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प्राईवेट हॉस्पिटल

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बात चाहे सरकार की हो, या सरकारी कामकाज की हमेशा से इसकी आलोचना होती रही है, क्योंकि हमेशा ऐसा माना जाता है की जनता के हिस्से का फायदा हमेशा से अधिकारी और नेता खा जाते हैं…कुछ ऐसा ही मामला उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में सामने आया है।

जहां एक तरह सरकार जनता के लिए बेहतर सुविधाओं से लेकर बेहतर परिवेश बनाना चाहती है वहीं दूसरी तरह ऊपर बैठ आला अधिकारी हमेशा से सरकार की मिट्टी पलीद करने में लगे रहते हैं…और इस बात को सही साबित करता है देवरिया जिले में मौजूद बाबू मोहन सिंह जिला चिकित्सालय…..जहां सरकारी दवाईयां लोगों के ईलाज के नाम पर आती तो हैं हालांकि पीछे के रास्ते वो वहीं पास में मौजूद (प्राईवेट हॉस्पिटल) न्यू मेट्रो हॉस्पिटल में पहुंचा दी जाती हैं.

आपको बता दें इस बात का खुलासा तब हुआ जब बीते रोज न्यू मेट्रो हॉस्पिटल पर जिला चिकित्साधिकारी धीरेन्द्र कुमार ने जिलाधिकारी के निर्देश पर अपने टीम के साथ इस प्राईवेट हॉस्पिटल पर छापा मारा, उसके बाद अधिकारियों के हाथ जो लगा उसने सरकारी महकमें की पोल खोल कर दी. इस छापे में जहां सरकारी अस्पताल की मुफ्त में बांटी जाने वाली मरीजों की दवाईयों का जखीरा अधिकारियों के हाथ लगा…वहीं छापेमारी की भनक लगते ही हॉस्पिटल के संचालक और कर्मचारी मौके से फरार हो गए.

आपको बता दें कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से मिली भगत के चलते ये गोरख धंधा पिछले कई सालों से चला आ रहा था. वहीं अधिकारियों ने अस्पताल से बरादमद सरकारी अस्पताल की दवाईयों का जखीरा जिला अस्पताल की वेक्सीन वैन में रखवा कर जिला अस्पतला के लिए वापस भेज दिया.

गौरतलब है कि, जिला अधिकारी को पिछले काफी समय से ऐसी सूचना मिल रही थी जिला अस्पताल में दवाईयों की कमी है हालांकि यहां की दवाईयां बाहर के अस्पतालोँ में यूज हो रही हैं. जिसके बाद सीएमओ डॉ धीरेंद्र कुमार बताया की मौके पर पाई गई दवाईयां जिला चिकित्सालय की हैं…इसके साथ उन्होंने बताया की यह काम विभाग के कर्मचारियों द्वारा कराया जा रहा है. जिसमें सरकारी दवाइयां चोरी-छिपे यहां पर लाई जा रही हैं, इसकी जांच कराई जा रही है और जल्द ही इसका पता लगा लिया जाएगा. जो भी कर्मचारी इसमें संलिप्त होगा उसके विरुद्ध विभागिया कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ उन्होंने कहा की इस अस्पताल का रजिस्ट्रेशन हम लोग कैंसिल कर रहे हैं.

जाहिर है, सरकार चाहे जितनी भी कोशिशें क्यों न कर ले, लेकिन इस तरह के मामले आए दिन सामने आते हैं ऐसे में जहां जनता को मजबूरन बाहर से दवाईयां खरीदनी पड़ती है वहीं दूसरी तरह अस्पताल के ही कर्मचारी जनता के हक को खा जाते हैं….

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