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केन्द्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा ने ट्राइफेड के वन-धन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत की

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Arjun Munda

केन्द्रीय जनजातीय मंत्री अर्जुन मुंडा प्रशिक्षुओं के साथ

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आदिवासी क्षेत्रों के विकास के लिए प्रयासरत केंद्र सरकार  ने आदिवासियों के लिए कई तरीके की योजनाए चला रखी है, जिससे की आदिवासी समुदाय के लोगो का विकास किया जा सके। सरकार का प्रयास है की आदिवासी क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाए। इसके लिए केंद्र सरकार के आदिवासी मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने ट्राइफेड के वन-धन प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत की। इस अवसर पर ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक प्रवीण कृष्ण भी उपस्थित रहे।

इस योजना के अंतर्गत उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा। 

इस योजना के अंतर्गत प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए अर्जुन मुंडा ने कहा कि यह सभी प्रशिक्षु जनजातीय आबादी को आत्मनिर्भर और उद्यमी बनाने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी प्रशिक्षु अब ‘राष्ट्र निर्माण दल’ का हिस्सा है। उद्यमशीलता की आवश्यकता पर बल देते हुए केन्द्रीय मंत्री मुंडा ने कहा कि उद्यमशीलता व्यक्ति को विकास के लिए आगे बढ़ने में प्रोत्साहन देती है।

उल्लेखनीय है कि 18 प्रशिक्षुओं में से कुछ प्रशिक्षु ग्रामीण प्रबंधन/ प्रबंधन संस्थान/ सामाजिक कार्य संस्थान / समाज सेवा जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से संबंध रखते हैं और वे सभी वन-धन प्रशिक्षु कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। इन प्रशिक्षुओं का चयन ‘वॉक-इन इंटरव्यू’ के जरिए किया गया था और यह सभी एक सप्ताह के प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे हैं। इनका प्रशिक्षण छह महीने के लिए होगा। सभी प्रशिक्षु ट्राइफेड के दल के साथ विभिन्न राज्यों और जिलों के जनजातीय क्षेत्रों में काम करेंगे। वे आजीविका संवर्धन, विपणन और ऋण संबंधी प्रक्रिया के लिए ट्राइफेड की गतिविधियों में हिस्सा लेंगे।

क्या है वन-धन योजना : 

वन-धन योजना के अनुसार ट्राइफेड(ट्राइबल कोआपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया) गौण वनोत्‍पाद  आधारित बहुउद्देशीय वन धन विकास केंद्र स्‍थापित करने में मदद करेगा। यह 10 स्वयं सहायता समूहों  का केंद्र होगा, जिसमें जनजातीय क्षेत्रों में 30 एमएफपी एकत्रित करने वाले शामिल होंगे। वन धन मिशन गैर-लकड़ी के वन उत्पादन का उपयोग करके जनजातियों के लिए आजीविका के साधन उत्पन्न करने की पहल है। जंगलों से प्राप्त होने वाली संपदा, जो कि वन धन है, का कुल मूल्य दो लाख करोड़ प्रतिवर्ष है। इस पहल से जनजातीय समुदाय के सामूहिक सशक्तिकरण को प्रोत्साहन मिलेगा। वन धन योजना का उद्देश्य परंपरागत ज्ञान और कौशल को सूचना प्रौद्योगिकी की मदद से और निखारना भी है। वन संपदा समृद्ध जनजातीय जिलों में वन धन विकास केंद्र जनजातीय समुदाय के जरिये संचालित होंगे। एक केंद्र 10 जनजातीय स्वयं सहायता समूह का गठन करेगा। प्रत्येक समूह में 30 जनजातीय संग्रहकर्ता होंगे। एक केंद्र के जरिये 300 लाभार्थी इस योजना में शामिल होंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना है। इस योजना के कार्यान्वन की ज़िम्मेदारी फिलहाल ट्राईफेड के पास है।

 

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