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टिड्डियों का आतंक बना किसानों के गले की फांस, फिर बढ़ रहा है इनका प्रकोप

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टिड्डियों का आतंक बना किसानों के गले की फांस, फिर बढ़ रहा है इनका प्रकोप

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किसानों की फसलों पर टिड्डियों का हमला कोई नया नहीं, विभिन्न देशों में टिड्डियों का ये आतंक लंबे समय से जारी है। हां बीते साल से टिड्डी आक्रमण ने फिर से किसानों की नींदे उड़ा रखी हैं, इससे पहले साल 1993 और 1998 में भी टिड्डियों का भयंकर आक्रमण देखा गया था और अब एक बार फिर किसान इस फसल दुश्मन के आक्रमण से पस्त है।

प्रवासी टिड्डियों के ये झुंड़ अफ्रीका से निकलते हैं और अफगानिस्तान-पाकिस्तान के रास्ते भारत की सीमा में दाखिल होते हैं। आकार में छोटी सी दिखने वाली ये मुसीबत जब झुंड़ में निकले तो कई-कई किलोमीटर लंबे टिड्डीदल होते हैं। यानि एक एक झुंड़ में करोड़ों टिड्डियां, और हर टिड्डी अपने वजन के बराबर का खाना खाती है। ये टिड्डियां फूल, पत्ते, बीज, पेड़, छाल, अंकुर सब खा जाती हैं। देखते ही देखते मिनटों में हरे-भरे खेत को बंजर करने वाले ये झुंड़ हवा की रफ्तार से उड़ते हैं।

इस विनाशक कीट की उड़ान 2000 मील तक पाई गई है। इस विकराल मुसीबत जीवन भले 40 से 80 दिन का हो, लेकिन इसकी गिनती जितनी तेजी से दुगनी चौगुनी होती है। वो वनस्पति के लिए एक भयंकर संकट है, मिनटों तमाम वनस्पति व फसलों का सफाया करने वाली इन आतंकी टिड्डियों से सिर्फ भारत का ही किसान परेशान नही है बल्कि अफ्रीका, पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया में टिड्डी आतंक ने विकट समस्या पैदा की है, और इस समस्या पर पार पाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है। फसलों को टिड्डियों से बचाने के लिए किसान अपने अपने स्तर पर तमाम कोशिशें करते हैं।

थाली-कनस्तर बजाकर,शोर मचाकर इनके बडे ब़ड़े झुड़ों को भगाने की कोशिश की जाती है। जहां टिड्डीदल बैठे दिखें वहीं जला भी दिए जाते हैं। इनके अंडों को नष्ट करने के लिए भी कीटनाशक छिड़के जाते हैं। लेकिन पूरी सफलता नहीं मिलती। हां आधुनिक तकनीकों के समय पर इस्तेमाल से इस प्राकृतिक आपदा पर पार पाई जा सकती है। हालांकि टिड्डियों का आतकं एक बार शुरु हो जाए तो इसे रोकना काफी मुश्किल हो जाता है लेकिन अगर इसके झुंड़ों पर ड्रोन के जरिए कीटनाशक स्प्रे किया जाए तो नुकसान को रोका जा सकता है।

राजस्थान में टिड्डी आतंक पर काबू पाने के लिए केन्द्र सरकार ने राज्य सरकार को 14 करोड़ रुपए और किसानों की बर्बार हुई फसल की मुआवजा राशि देने के लिए 68 करोड़ रुपए का भुगतान किया है। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि टिड्डी दल पर कीटनाशक स्प्रे करने के लिए 800 ट्रैक्टर किराए पर ले, इसके अलावा केंद्र सरकार ने ड्रोन द्वारा स्प्रे करने के लिए आवश्यक स्वीकृति लेकर टेंडर भी जारी कर दिए है। ताकि टिड्डी समस्या से किसानों को राहत मिल सके।

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