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जैविक उर्वरक की बिक्री पर हरियाणा सरकार ने लगाई रोक

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Organic Fert.

जैविक खाद

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रासायनिक उर्वरकों से खेती और मानव शरीर को होने वाले नुकसान को देखते हुए सरकार पिछले कई सालों से जैविक खेती को बढ़ावा दे रही। इसके लिए किसानों को प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। किसानों से आह्वान किया जा रहा है कि वो कीटनाशको और उर्वरकों का इस्तेमाल कम करके जैविक उत्पादों को अपनाए और जैविक खेती को शुरू करें। जैविक खेती को शुरू करने के लिए जैविक उत्पादों कि ही आवश्यकता होती है।लेकिन हरियाणा राज्य में सरकार ने जैविक उर्वरकों (बायो फर्टिलाईजर) कि बिक्री पर ही प्रबंध लगा दिया है।

जैविक उर्वरक बेचने के लिए कृषि निदेशक के यहाँ पंजीकरण अनिवार्य

हरियाणा सरकार ने यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब राज्य में चुनाव का समय बहुत नजदीक है और किसानों का वोटबैंक बहुत बड़ा है। जैविक उर्वरक को बैन करने के पीछे सरकार का कहना है कि यह कदम किसानों के हितों के लिए उठाया गया है, ताकि किसान जैविक कम्पोस्ट के नाम पर कुछ और न खरीद लें। दरअसल हरियाणा में जैविक उर्वरक का निर्माण करने वाली बहुत सारी पंजीकृत नहीं है और वो जैविक उर्वरक किसानों को बेच रही हैं। इसलिए सरकार ने ऐसी कंपनियों के जैविक उर्वरकों की बिक्री पर रोक लगा दी है। जो कंपनियाँ ब्रांडेड जैविक उत्पाद बनती हैं उनकी तर्ज पर अन्य कंपनियों ने भी बिना पंजीकरण के जैविक उत्पाद बेचने शुरू कर दिए हैं।

ऐसी कंपनियाँ किसानों को जैविक उत्पाद मनमाने ढंग से बेच रही हैं। इस पर कारवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को जरूरी गाइडलाइन जारी करने के आदेश दिए थे। उसके तुरंत बाद सरकार ने ऐसी कंपनियों को पंजीकरण कराने के लिए 15 सितंबर का समय दिया था। इसके बावजूद किसी भी कंपनी ने पंजीकरण नही कराया दरअसल यह पंजीकरण कृषि निदेशक के यहा होना था और खाद विक्रेता उनही कंपनियों के जैविक उर्वरक बेच सकते है जिनका पंजीकरण कृषि निदेशक के यहाँ होगा। किसी भी कंपनी के पंजीकरण न कराने पर कृषि आयुक्त ने सभी बायो फर्टिलाईजर की बिक्री पर तत्काल रोक इसी लिए लगाई है। जो कंपनी अपना जैविक उर्वरक किसानों को बेचना चाहती है उनको राज्य के कृषि निदेशक के यहाँ पंजीकरण करना अनिवार्य है। खाद विक्रेताओं को सबूत के तौर पर पंजीकरण की कॉपी दुकान पर लगानी होगी। इसको लेकर कृषि आयुक्त ने खाद बिक्री दुकानों पर छापेमारी के भी आदेश दिए हैं ताकि पंजीकृत कंपनी के ही उत्पाद बेचे जा सके। इससे खाद विक्रेताओं में खलबली मची हुई है। हरियाणा सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम किसानों के हित में है। इससे किसान नकली खाद की समस्या से सुरक्षित रहेंगे।

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