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जल-शक्ति अभियान के तहत पहले स्थान पर पहुंचा गया जिला

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जल-शक्ति अभियान

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भारत सरकार द्वारा चलाए जा रहे जल-शक्ति अभियान के तहत सरकार ने देशभर में जागरूकता फैलाने के लिए जिला और ग्रामीण स्तर पर इस अभियान  कि शुरुआत थी. अब सरकार ने इस अभियान को लेकर जिलावार रैंकिंग शुरू की है जिसमें बिहार के गया को जागरूकता फैलाने के मामले में पहला स्थान मिला है। बिहार के  कृषि मंत्री  डॉ० प्रेम कुमार ने कहा कि, यह बिहार राज्य के लिए बड़े गर्व की बात है कि भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण द्वारा जल-शक्ति अभियान के अंतर्गत चयनित जिलों की रैंकिंग की गई है, इस रैंकिंग में गया जिला को प्रथम स्थान दिया गया है। आपको बता दें कि, इस रैंकिंग में देश के 33 राज्यों के 253 जिलों में गया को सर्वाधिक 81.06 अंक प्राप्त हुआ है, जबकि दूसरे स्थान पर तेलंगाना राज्य के महबूब नगर को 67.09 अंक, तीसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश के कदपा को 63.64 अंक तथा चौथे स्थान पर झारखण्ड के धनबाद को 62.48 अंक प्राप्त हुए हैं।

इस पर कृषि मंत्री ने कहा कि, पूरे देश में 36 राज्य के 256 जिले के 1592 प्रखण्डों को इस कार्यक्रम के लिए चयनित किया गया है। बिहार राज्य के 12 जिले पटना, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, सारण, कटिहार, नवादा, जहानाबाद, गोपालगंज, भोजपुर एवं वैशाली में जल-शक्ति अभियान का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन 12 जिलों के 30 वैसे प्रखण्ड, जहाँ जल संकट की सम्भावना सबसे ज्यादा है, इस योजना में शामिल किये गये हैं तथा प्रत्येक जिले  के लिए भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। यह कार्यक्रम पूरी तरह से तभी सफल हो पायेगा, जब इसमें व्यापक जन-भागीदारी होगी।

इसके लिए आम लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लोगों को वर्तमान संकट एवं इससे आने वाले दिनों में उत्पन्न होने वाली भयावह समस्याओं के संबंध में बताया जा रहा है। इस कार्यक्रम के व्यापक सफलता के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। चूँकि जमीन के नीचे के जल का सबसे अधिक उपयोग कृषि कार्य में होता है, इसलिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी  कृषि विभाग की है। कम-से-कम पानी के उपयोग से अधिक फसल उत्पादन की तकनीक को बढ़ावा दिया जा रहा है तथा इसके लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। कम पानी में अधिक उपज देने वाली नई-नई फसलों को विकसित किये जाने की आवश्यकता है। जिस प्रकार मौसम में परिवर्तन आ रहा है। अब समय आ गया है कि हमें पारम्परिक फसल चक्र को बदलना होगा। इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों को अहम् भूमिका निभानी होगी। पारम्परिक जलस्रोतों जैसे आहर, पाईन, तालाब  आदि को पुनजीर्वित किया जा रहा है। अधिक-से-अधिक तालाबों का निर्माण किया जा रहा है। वर्षा जल संचय एवं संरक्षण के लिए व्यापक कार्य किये जाने की आवश्यकता है। घर का पानी घर में, खेत का पानी खेत में एवं गाँव का पानी गाँव में के सिद्धांत पर कार्य किया जा रहा है।

डॉ० कुमार ने कहा कि केन्द्र एवं राज्य सरकार के इस अभियान में कृषि विभाग भी पूरी तत्परता से कार्य कर रहा है। कृषि विभाग ने इसके लिए व्यापक लक्ष्य एवं कार्यक्रम निर्धारित किए है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए कृषि एवं पशुपालन विभाग के तमाम पदाधिकारियों को निदेश दिया गया है कि राज्य स्तर एवं जिलों में जितने भी विभागीय जमीन उपलब्ध हैं, उन पर समुचित मात्रा में वृक्ष लगाये जाये। भूमि संरक्षण संभाग द्वारा वर्षा जल संचयन एवं जल संरक्षण के लिए प्रभावी कार्य योजना पर कार्य किया जा रहा है। साथ ही, कम पानी में अधिक सिंचाई के लिए सूक्ष्म सिंचाई की योजनाओं को कार्यान्वित किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा इस अभियान को बड़े पैमाने पर चलाया जा रहा है। इस अभियान को सफल बनाने हेतु विभागीय राज्य स्तर से लेकर पंचायत स्तर तक के पदाधिकारी और कर्मचारी पूरी तत्परता के साथ कार्य कर रहे हैं तथा उनके द्वारा लोगों को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन  सबका परिणाम है कि आज गया जिला को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। और यह गया वासियों और पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।

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