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कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जागरूकता कार्यक्रम में उर्वरक के सही इस्तेमाल की जानकारी दी गई

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kvk

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान उपलब्ध किसान

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किसानों को कृषि कि मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसके लिए सरकार किसानों के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन कर रही है। राजस्थान में किसानों को जैविक खेती के लिए जागरूक किया जा रहा है। राजस्थान के सिरोही में कृषि विज्ञान केंद्र में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, यह कार्यक्रम किसानों द्वारा उर्वरकों का सही इस्तेमाल, दृप सिंचाई, कृषि अनुदान और जैविक खेती के विषय में जागरूक करने के लिए आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में स्वयं केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बतौर मुख्य अतिथि के रूप में अपनी उपस्थिती दर्ज कराई।

किसान जागरूकता कार्यक्रम में किसानों को उर्वरकों के सही इस्तेमाल के विषय में जानकारी दी गई

कृषि विज्ञान केन्द्र में उर्वरक उपयोग जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने उर्वरकों के इस्तेमाल पर संबोधित करते हुए जैविक खेती पर ज़ोर दिया। उसके बाद कृषि विज्ञान केन्द्र प्रभारी ने फसलों में उर्वरक डालने की विधि और इसके महत्व के विषय में बताया। इसके बाद उपनिदेशक कृषि विस्तार डॉ. गोपाल लाल कुमावत ने कम्पोस्ट खाद व जैविक खेती का महत्व बताया। इसके अलावा इस कार्यक्रम में हरी खाद पर के इस्तेमाल पर भी ज़ोर दिया गया। हरी घास के इस्तेमाल के विषय में भी बताया गया और किसानों को हरी घास के लिए प्रेरित किया गया। उपनिदेशक आत्मा डॉ. प्रकाश गुप्ता ने उर्वरकों के सही उपयोग के साथ विभागीय योजनाओं की जानकारी दी।

उद्यानिकी विभाग के सहायक निदेशक डॉ. हेमराज मीणा ने बताया कि ड्रिप सिंचाई विधि से उर्वरक उपयोग करने से इसकी बचत होती है और पौधे को सही तरीके से पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। इसी के साथ कार्यक्रम में उद्यानिकी पर अनुदान योजना के बारे में भी जानकारी दी। किसानों को फसल बुवाई से पहले मिट्टी जांच के लिए आकर्षित किया गया। किसानों को कहा गया की बुवाई से कम से कम एक माह पहले मिट्टी की जांच अवश्य करा लेनी चाहिए। किसानों को इसके अलग-अलग फसलचक्र के विषय में भी जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम में 150 से अधिक लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में भंवरलाल चौधरी, आकाश खत्री, रतनसिंह शक्तावत, अनेकसिंह, सुरेन्द्र सिंह व दिलीप सिंह का योगदान रहा।

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