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ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों को देख किसान ने की खुदकुशी

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ओलावृष्टि

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उत्तर भारत में बीते कई दिनों से बिगड़ते मौसम के चलते कई किसानों की फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी हैं। और बीते दिनों हुई ओलावृष्टि औऱ बारिश के चलते ना सिर्फ फसलें खराब हुई हैं बल्कि इससे सदमें में आकर कई किसानों ने आत्महत्या भी कर ली है। राजस्थान के भरतपुर जिले के नगला उपटेला गांव के रहने वाले एक किसान सुरेश ने ओलावृष्टि से प्रभावित हुई अपनी फसलों को देखकर आत्महत्या कर ली।

सुरेश बीते शनिवार को देर रात अपने खेतों से फसल देखकर घर लौटा था, जिसके बाद उसने अपने कमरे में ही फांसी के फंदे से लटककर खुदकुशी कर ली.. सुबह जब सुरेश के बेटे ने उसे फंदे से झुलते देखा तो सुरेश के घरवाले सन्न रह गए.. इसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने सुरेश के शव को कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम करवाया.. और शव परिजनों को वापस सौंप दिया।

आपको बता दें कि, सुरेश के पास करीब 1बीघा जमीन थी. जिस पर उसने अपनी सरसों की फसल बोई थी.. इसके अलावा सुरेश ने गांव के कुछ किसानों से 7 बीघा जमीन लेकर उस पर भी सरसों बोई थी। मगर जिले में बीते एक हफ्ते में हुई ओलावृष्टि ने सुरेश की फसल चौपट कर दी। जिसको लेकर सुरेश काफी परेशान था।

जाहिर है बीते कई दिनों से लगातार हो रही बारिश औऱ ओलावृष्टि के चलते राजस्थान के 14 जिलों के किसानों की 33 से 65 प्रतिशत तक फसल खराब हो गई है। कई जगह यह आंकड़ा 80 प्रतिशत तक हो गया है। जिसके चलते मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घोषणा की है कि, 20 मार्च तक इसकी रिपोर्ट आने के बाद सरकार किसानों की हर संभव सहायता करेगी।

तो वहीं इस बारिश और ओलावृष्टि ने ना सिर्फ किसानों की जान ली है बल्कि, कई किसानों की फसल खराब कर उन्हें भी बर्बाद कर दिय है। बता दें कि, जहां कई किसानों की फसलें खेतों में ही बर्बाद हो गई तो वहीं कई किसानों को उनकी दागी फसलों के लिए ग्राहकों का मिलने मुश्किल हो चला है। जिसके चलते किसान अब अपनी फसलों को फेंकने पर मजबूर हो चुके हैं।

ऐसा ही एक नजारा बीते दिन झारंखड के रांची जिले में देखने को मिला है। जहां सब्जी मंडी में बड़ी संख्या में किसान अपनी मटर की फसल बेचने के लिए आए थे। मगर उनकी दागी फसलों को ग्राहक नहीं मिलने से परेशान हो गए। दरअसल, बारिश और ओलावृष्टि के कारण मटर पर दाग हो गए थे।

इस कारण उनकी फसल को व्यापारी खरीद नहीं रहे, किसानों की फसल दो रुपये किलो में भी नहीं बिक रही.. जिसकी वजह से किसानों को अपनी फसल बाजार में ही फेंकनी पड़ी। आपको बता दें कि, बीते शुक्रवार को बाजार में सुबह फ्रेश मटर 8-10 रुपये प्रति किलोग्राम बिकी जबकि, उसके बाद शाम को मटर की कीमत 2-3 रुपये प्रति किलो पर हो गई।

तो वहीं दागी मटर को लेने के लिए तो व्यापारी बिल्कुल भी तैयार नहीं होते। व्यापारी का कहना है कि, मटर को गांव से रांची तक ले जाने में प्रति बोरा 40-50 रूपये का खर्चा आता है और दागी मटर के रास्ते में ही खराब होने की संभावना ज्यादा है। जिसके बाद लागत तक निकालना मुश्किल हो जाता है.. ऐसे में मजबूर होकर किसानों ने बीते दिन अपनी मटर की फसल बीच बाजार में ही फेंक दी..

 

किसानों से जुड़ी खबरों को वीडियो रूप में देखने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें-

https://www.youtube.com/user/Greentvindia1?pbjreload=10

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