Grameen News

True Voice Of Rural India

History of 13th Dec – आज के दिन हुआ था भारतीय संसद पर हमला

1 min read
History of 13th Dec – आज के दिन हुआ था भारतीय संसद पर हमला

History of 13th Dec – आज के दिन हुआ था भारतीय संसद पर हमला

Sharing is caring!

आज 13 दिसंबर का दिन है। यह इस साल का 347वां दिन है। यानी कि अब इस साल के खत्म होने में केवल 18 दिन बचे हैं। यानि जल्द ही यह साल खत्म होगा और नया साल 2020 हमारे सामने होगा। लेकिन यह साल 2019 हमारे लिए कई यादगार घटनाएं छोड़ जाएगा। जिन्हें हम अगले साल भी उस तारीख को याद करेंगे। ऐसा ही आज के दिन भी पहले कइ्र ऐसी घटनाएं हुई हैं जो इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं और आज के दिन उन घटनाओं को याद करना जरूरी हो जाता है क्यों कि यह घटनाएं कई मामलों में खास हैं। आज के दिन ऐसी ही एक घटना साल 2001 में घटी थी। 2001 में आज ही के दिन आतंकवादियों ने भारतीय संसद पर हमला किया था।

History of 12th Dec – आज है साउथ फिल्मों के मेगास्टार रजनीकांत का जन्मदिन

संसद पर हमले में 9 लोग शहीद हुए

यह हमला आज भी हमारी यादों में ताजा है। आतंकी हमले में संसद भवन के गार्ड, दिल्ली पुलिस के जवान समेत कुल 9 लोग शहीद हुए। आज ही के एक सफेद एंबेसडर कार में आए पांच आतंकवादियों ने 45 मिनट में लोकतंत्र के सबसे बड़े मंदिर को गोलियों से छलनी करके पूरे हिंदुस्तान को झकझोर दिया। संसद में उस दिन शीतकालीन सत्र की सरगर्मियां तेज़ थीं। विपक्ष के जबरदस्त हंगामे के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही 40 मिनट के लिए रोक दी गई थी।

सदन स्थगित होते ही प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और विपक्ष की नेता सोनिया गांधी लोकसभा से निकल कर अपने-अपने सरकारी निवास चले गए थे। बहुत से सांसद भी वहां से जा चुके थे। पर गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी अपने कई साथी मंत्रियों और लगभग 200 सांसदों के साथ अब भी लोकसभा में ही मौजूद थे। वहीं लोकसभा परिसर के अंदर मीडिया का भी पूरा जमावड़ा था। सांसद और मंत्री भी सदन के अंदर से बाहर निकल आए थे और गुनगुनी धूप का मजा ले रहे थे। सुबह 11 बजकर 29 मिनट पर गेट नंबर से 11 उपराष्ट्रपति कृष्णकांत शर्मा के कार के काफिले में तैनात सुरक्षार्मी अब सदन से उनके बाहर आने का इंतज़ार कर रहे थे। ठीक उसी पल, एक सफेद एंबेस्डर कार जो अचानक से इस ओर मुड़ी थी वो उपराष्ट्रपति के कार से जा टकराती है।

कोई कुछ समझ पाता कि तभी एंबेस्डर के चारों दरवाजे एक साथ खुले और गाड़ी में बैठे पांच फिदायीन पलक झपकते ही बाहर निकले और अंधाधुंध फायरिंग कर शुरू कर दी। पांचों के हाथों में एके-47 थी। पहली बार आतंक लोकतंत्र की दहलीज पार कर चुका था. पूरा संसद भवन गोलियों की त़ड़तड़ाहट से गूंज उठा था। आतंकवादियों की कोशिश किसी तरह सदन के दरवाजे तक पहुंचने की थी। लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने उनके इरादों को पूरा नहीं होने दिया। सुरक्षाकर्मियों ने सुझ—बूझ के साथ आतंकवादियों से सामना किया और पांचों को ढ़ेर कर दिया। वहीं इस दौरान सुरक्षाकर्मियों ने सबसे पहले सदन के अंदर मौजूद लोगों को सेफ किया ताकी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

सदन पर हुआ हमला भारत के लोकतंत्र पर हुआ हमला था। लेकिन आतंकवादी अपने ईरादों में कामयाब नहीं हुए। इस घटना के अलावे आज के दिन से जुड़े कई और ऐतिहासिक बातें इतिहास में दर्ज है।

— साल 1232 में आज ही के दिन गुलाम वंश के शासक इल्तुतमिश ने ग्वालियर पर अपना कब्जा जमाया था।

— साल 1981 में आज ही दिन पोलैंड में आपात काल की घोषणा हुई। यह अपातकाल 22 जुलाई 1983 तक लागू रहा। दरअसल वहां की कम्यूनिस्ट सरकार ने विपक्ष को कुचलने के लिए अचानक से पूरे देश में मार्शल लॉ लागू कर दिया था।

— साल 1996 में आज ही के दिन कोफी अन्नान संयुक्त राष्ट्र के महासचिव चुने गए। वे 1997 से लेकर 2007 तक इस पद पर बने रहे। वे कोफी अन्नान फाउंडेशन के पाउंडर और The Elders, जो एक इंटरनेशनल संस्था है जिसे ननशेल मंडेला ने शुरू किया था, के चेयरमैन भी थे। साल 2001 में उन्हें नोबेल पीस प्राइज से सम्मानित किया गया था।

— साल 2003 में भूतपूर्व इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को उनके गृह नगर टिगरीट के निकट गिरफ्तार कर लिया गया था। अमेरिकी सेना ने ऑपरेशन रेड डाउन के चलाकर उसे गिरफतार किया था।

— आज के दिन ही देश के महान अर्थशास्त्री लक्ष्मीचंद जैन का जन्म साल 1925 में हुआ था। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के नेता होने के साथ ही अजादी के बाद वे देश के कई बड़े पदों पर रहें और देश की सेवा की। वे कई बार प्लानिंग कमीशन के मेंबर रहे, साउथ अफ्रिका में भारत के हाई कमीशनर के पद पर रहे और वर्ल्ड कमीशन फॉर डैम के भी मेंबर रहे। पब्लिक सविस के लिए उन्हें 1989 में रेमन मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित किया गया था। साल 2011 में उन्हें सरकार की ओर से पद्म विभूषण सम्मान से सम्मानित किया था लेकिन उनके परिवार ने यह सम्मान लेने से मना कर दिया क्यों कि वे किसी भी प्रकार से स्टेट ओन्ड अवार्ड लेने के खिलाफ थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *