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History of 14th Dec – आज है शो मैन राज कपूर की जयंती

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राज कपूर

राज कपूर

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आज 14 दिसंबर का दिन है। नए साल की शुरूआत में 17 दिन और बचीं हैं। नए साल की शुरूआत के बाद 2019 इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा। लेकिन वो आगे की बात है। पीछे बीते सालों में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं जो इतिहास में दर्ज हैं। आज के दिन भी ऐसी कईं ऐतिहासिक घटनाएं हुईं हैं। इन्हीं पर एक नज़र हम आज डालेंगे। आज के दिन साल 1924 में बॉलिवुड के शोमैन कहे जानेवाले डायरेक्‍टर, प्रोड्यूसर और एक्टर राजकपूर का जन्म आज ही के दिन हुआ था। बॉलीवुड में राजकपूर की नाम का मतलब ही एक अपनेआप में एक पूरी फिल्म इंडस्ट्री होती थी। पेशावर (पाकिस्तान) में पैदा हुए राजकपूर के पिता पृथ्वी राज कपूर एक जाने माने थियेटर और फ़िल्म कलाकार थे। वहीं तीन भाइयों में सबसे बड़े राज दिग्गज अभिनेता रहे हैं। उनका पूरा नाम ‘रणबीर राज कपूर’ था। उनके पोते यानी ऋषि कपूर-नीतू सिंह के बेटे का नाम अब रणबीर है।

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राज कपूर ने करियर की शुरुआत क्लैपर ब्वॉय के तौर पर की

बात उनके फिल्मी करियर की करें तो एक ‘अनाड़ी’, एक ‘आवारा’, एक ‘छलिया’ से शोमैन तक का उनका सफर आसान नहीं था। उनके पिता पिता पृथ्वीराज चाहते तो कहीं भी राज कपूर को आसानी से ब्रेक मिल जाता लेकिन अपने दम पे कुछ करने की नसीहत उन्होंने दी। जिसके बाद उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक क्लैपर ब्वॉय के तौर पर किया। इस दौरान ही कुछ ऐसा हुआ जो शायद ही किसी ऐसे एक्टर के संग हुई हो जिसके पास किसी बड़े फिल्म स्टार को बेटे का तमगा हो। यह फ़िल्म केदार शर्मा डायरेक्ट कर रहे थे। शूटिंग चल ही रही थी कि एक बार केदार शर्मा ने राज कपूर को जोरदार थप्पड़ लगा दिया। हुआ यह था कि राज सीन के वक्त हीरो के इतने करीब आ गए थे कि क्लैप देते ही हीरो की दाढ़ी क्लैप में फंस गई थी।

राज कपूर ने 24 साल की उम्र में अपना प्रोडक्शन स्टूडियो ‘आर के फ़िल्म्स’ शुरू किया और इंडस्ट्री के सबसे यंग डायरेक्टर बन गए। उनके प्रोडक्शन की पहली फ़िल्म थी ‘आग’। इस फ़िल्म में वो डायरेक्टर और एक्टर दोनों ही थे। उन्होंने कई टि फिल्में दीं। उन्हे तीन नेशनल अवार्ड और 11 फिल्म फेयर अवार्ड उस जमाने में मिले थे। फिल्म फेयर का लाइफटाइम अचिवमेंट अवार्ड उन्हीें के नाम पर दिया जाता है। उन्हें दो बार कैनन फिल्मस अवार्ड में Palme d’Or ग्रेंड प्राइज के लिए नॉमिनेट किया गया था। 1987 में उन्हें दादा साहब पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

राजकपूर की लाइफ में फिल्म के अलावा एक और इम्प्रोटेंट चीज थी और वो थी उनके फिल्मों की हिरोइन ‘नरगिस’। दोनों के बीच की प्रेम कहानी 1940-1960 के दशक की सबसे मशहूर लव स्टोरी हुआ करती थी। ये दोनों स्टार्स सिर्फ़ बड़े पर्दे पर ही नहीं असल जीवन में भी साथ थे। नर्गिस ने राजकपूर के साथ कुल 16 फ़िल्में की, जिनमें से 6 फ़िल्में आर.के.बैनर की थी। इस बीच दोनों में नजदीकियां भी बढ़ने लगीं और दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया और दोनों ने शादी करने का मन भी बना लिया। राजकपूर जब 1954 में मॉस्को गए तो अपने साथ नर्गिस को भी ले गए। कहते हैं यहीं दोनों के बीच कुछ मतभेद हुए और दोनों के बीच इगो की तकरार इतनी बढ़ी कि यात्रा अधूरी छोड़कर नर्गिस इंडिया लौट आईं। 1956 में आई फ़िल्म ‘चोरी चोरी’ नर्गिस और राजकपूर की जोड़ी वाली अंतिम फ़िल्म थी।

राजकपूर की जयंती के अलावा आज के दिन दुनिया के इतिहास में कई और घटनाएं हुईं जो ऐतिहासिक हैं।

— साल 1799 में आज के दिन ही अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन प्रथम का निधन हुआ था। वे सर्वसम्मति से अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए थे। ठंड के कारण उनकी तबियत बिगड़ी जो उनकी मौत का कारण बना।

— साल 1953 में आज के ही दिन भारत के पूर्व टेनिस खिलाड़ी और कमेंट्रेटर विजय अमृतराज का जन्‍म हुआ था। कमेंट्रेटर और टेनिस खिलाड़ी होने के साथ ही वे एक एक्टर भी हैं। उन्हें भारत सरकार की ओर से साल 1983 में पद्म श्री पुरस्कार से नवाज़ा गया था।

— साल 1995 में बोस्निया, सर्बिया और क्रोएशिया के नेताओं ने पेरिस में डेटन संधि पर दस्तखत किए थे। इस संधि के होने के बाद साढ़े तीन साल से जारी बोस्निया युद्ध जो योगोस्लाव युद्ध का ही एक प्रकार था, समाप्त हो गया।

— साल 2007 में एक एतिहासिक घटना कोरियन द्वीप में हुईं। 50 सालों में पहली बार साउथ कोरिया और नार्थ कोरिया के बीच रेलवे सेवा फिर से शुरू हुई। यह वह दौर था जब दोनों देशों के बीच सनसाइन पॉलिसी के जरिए शांति स्थापित करने की कवायद हो रही थी।

— योग भारतीय पुरातन संस्कृति का वो ज्ञान है जिसके जरिए आज आधुनिक युग में लोग स्वस्थ्य रहने की चाह रखते हैं। पूरी दुनिया में आज योग का क्रेज है। हर साल 21 जून को योग दिवस भी मनाया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि आधुनिक विश्व में योग इतना ज्यादा लोगों के बीच पहुंचा कैसे। तो आपको बता दें कि यह सब हुआ कर्नाटक के बेल्लूर में जन्मे बी के एस आयंगर के कारण। जिनका जन्म आज ही के दिन साल 1918 में हुआ था। उन्हें आधुनिक योग का पहला योग गुरू कहा जाता है। योग को दुनियाभर में प्रचारित करने की उपलब्धियों के कारण उन्हें 2002 में ‘पद्मभूषण’ और 2014 में ‘पद्मविभूषण’ से सम्मानित किया गया। ‘टाइम’ पत्रिका ने 2004 में दुनिया के सबसे प्रभावशाली 100 लोगों की सूची में उनका नाम भी शामिल किया था।

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