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History of 15th Nov- 1875 में हुआ था बिरसा मुण्डा का जन्म

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History of 15th Nov

History of 15th Nov

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History of 15th Nov-

  • 15 नवंबर है, यह साल का 319वां दिन है। इस दिन का इतिहास भी महीने के बाकी दिनों की तरह ही कई ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। दुनिया के साथ ही भारत के इतिहास पर गौर करें तो आज का दिन कई मायनों में महत्वपूर्ण है। जैसे कि… आज के दिन ही भगवान बिरसा मुण्डा का जन्म हुआ था। आज बिरसा मुण्डा जयंती है। वे भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ ही आदिवासी समाज के नेता और उनकी अवाज थे। भगवान बिरसा का जन्म साल 1875 में हुआ था। ऐसा नहीं है कि बिरसा से पहले आदिवासियों ने अंग्रेजों का विद्रोह नहीं किया था। 1766 के पहाड़िया-विद्रोह से लेकर 1857 के ग़दर के बाद भी आदिवासी अंग्रेजों के खिलाफ लड़ते रहे थे।

    सन् 1895 से 1900 तक बिरसा मुंडा का महाविद्रोह इतिहास के पन्नों में पढ़ने को मिलता है जिसे ‘ऊलगुलान’ कहा जाता है। आदिवासियों को उनकी जल-जंगल-ज़मीन और उनके प्राकृतिक संसाधनों से अंग्रेज लगातार बेदखल कर रहे थे, इसी के खिलाफ बिरसा और उनके लोग लगातार विरोध कर रहे थे। 1895 में बिरसा ने अंग्रेजों की लागू की गई ज़मींदारी प्रथा और राजस्व-व्यवस्था के साथ-साथ जंगल-ज़मीन की लड़ाई छेड़ी थी। उन्होंने सूदखोर महाजनों के ख़िलाफ़ भी जंग का ऐलान किया। यह सिर्फ एक विद्रोह नहीं था, यह आदिवासी अस्मिता और संस्कृति को बचाने की लड़ाई थी।

    बिरसा मुंडा को उनके पिता ने मिशनरी स्कूल में पढ़ने के लिए भेजा था। लेकिन ईसाइयत उन्हें रास नहीं आया और उन्होंने वहां जाना यह कहकर छोड़ दिया कि ‘साहेब साहेब एक टोपी है’। 1890 के आसपास बिरसा वैष्णव धर्म की ओर मुड गए. वे आदिवासियों को अंधविश्वास से बाहर लाने का काम करते। किसी महामारी को दैवीय प्रकोप माननेवालों को इसका उपाय समझाते। मुंडा आदिवासी हैजा, चेचक, सांप के काटने बाघ के खाए जाने को ईश्वर की मर्ज़ी मान लेते थे, लेकिन बिरसा ने उन्हें सिखाते कि चेचक-हैजा से कैसे लड़ा जाए। यहीं कारण है कि उन्हें आदिवासी ‘धरती आबा’ यानी धरती पिता मानते थे और भगवान कहते थे।

    बिरसा ने अंग्रेजों के खिलाफ हथियार इसलिए उठाया क्यों कि आदिवासी दो तरफ से पीस रहे थे। एक तरफ अभाव और गरीबी थी तो एक ओर ‘इंडियन फारेस्ट एक्ट’ 1882  जिसके कारण जंगल के दावेदार ही जंगल से बेदखल हो गए थे। बिरसा ने इसके विरोध में ‘उलगुलान’ शुरू किया और छापेमार लड़ाई शुरू कर दी। रांची और उसके आसपास के इलाकों में अंग्रेज बिरसा से आतंकित हो गए थे। अंग्रेजों ने उन्हें पकड़वाने के लिए पांच सौ रुपये का इनाम रखा था जो उस समय बहुत बड़ी बात थी। बिरसा मुंडा और अंग्रेजों के बीच अंतिम लड़ाई 1900 में रांची के पास दूम्बरी पहाड़ी पर हुई।

    हज़ारों की संख्या में मुंडा आदिवासी बिरसा के नेतृत्व में तीर-कमान और भाले के सहारे लड़े। लेकिन बंदूकों और तोपों के सामने नहीं टिके।  उस समय के स्टेट्समैन अखबार के मुताबिक इस लड़ाई में 400 लोग मारे गए थे। अंग्रेज़ जीत तो गए लेकिन बिरसा हाथ नहीं लगे। लेकिन जहां बंदूकें और तोपें काम नहीं आईं वहां पांच सौ रुपये ने काम कर दिया। बिरसा की ही जाति के लोगों ने उन्हें पकड़वा दिया! महाश्वेता देवी अपनी किताब ‘जंगल के दावेदार’ में लिखती हैं, ‘अगर उसे उसकी धरती पर दो वक़्त दो थाली घाटो, बरस में चार मोटे कपड़े, जाड़े में पुआल-भरे थैले का आराम, महाजन के हाथों छुटकारा, रौशनी करने के लिए महुआ का तेल, घाटो खाने के लिए काला नमक, जंगल की जड़ें और शहद, जंगल के हिरन और खरगोश-चिड़ियों आदि का मांस-ये सब मिल जाते तो बीरसा मुंडा शायद भगवान न बनते.’

    बिरसा मुंडा जयंती के अलावा और भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएं आज के दिन के इतिहास से जुड़ी हुई हैं, जैसे-

    — साल 1982 में भूदान आंदोलन का आधार रखने वाले आचार्य विनायक नरहरि भावे उर्फ विनोबा भावे का निधन आज ही के दिन हुआ था। वे ह्यूमन राइट और अहिंसा की वकालत करनेवाले नेता थे। उन्हें लोग मुख्य तौर पर अचार्य कहते थे।

    — आज के दिन ही देश की स्टार महिला टेनिस प्लेयर सानिया मिर्जा का जन्‍म 1986 में हुआ था। वे युगल मुकाबलों की रैंकिंग में विश्व की नंबर एक महिला टेनिस खिलाड़ी रह चुकी हैं।

    — आज ही के दिन परमाणु हथियारों को लेकर फैसला लेते हुए साल 1961 में संयुक्त राष्ट्र ने परमाणु हथियारों पर रोक लगा दी थी।

    — साल 1949 में महात्‍मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे और नारायण आप्‍टे को आज ही के दिन फांसी पर लटकाया गया था।

    — भारतीय वायु सेना के शहीद गरुड़ कमांडों ज्योति प्रकाश निराला का आज जन्मदिन है। आज ही के दिन 1986 मेूं उनका जन्म हुआ था। उन्हें उनके पराक्रम के लिए मरणोपरांत अशोक चक्र से भारत सरकार की ओर से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान पानेवाले वे वायु सेना के पहले और देश के तीसरे सैनिक थे। वे जम्मू कश्मीर में अपनी बटालियन के साथ ऑपरेशन रक्षक के तहत तैनात थे।

    18 नवंबर 2017 को जम्मू कश्मीर के बांदीपोरा जिले के चंदरनगर गांव में कुछ आतंकवादियों के छिपे होने की सूचना मिली थी।  इन आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाने का जिम्मा राष्ट्रीय राइफल्स को मिला था। जिसमें गरुड़ कमांडोज भी होते हैं। दोनों टीमें जब मौके पर पहुंची तो इस टुकड़ी का नेतृत्व ज्योति प्रकाश निराला ही कर रहे थे। जवानों ने चारों तरफ से उस घर को घेर लिया जहां आतंकवादी छिपे थे।  निराला उस घर के एकदम पास में घात लगाकर खड़े थे। जवानों ने आतंकवादियों को आत्मसमर्पण करने को कहा…लेकिन आतंकियों ने गोली चलानी शुरू कर दी। फिर सेना ने भी जवाबी फायरिंग की।

    इस बीच छह आतंकवादी फायरिंग करते हुए घर से भागने की कोशिश करने लगे… इसी बीच ज्योति प्रकाश निराला को भी गोली लगी। ज्योति प्रकाश ने भी गोलियों और हथगोलों से आतंकियों पर हमला कर दिया…अकेले ही उन्होंने तीन आतंकियों को मार गिराया। लेकिन आतंकियों की गोली लगने की वजह से वो शहीद हो गए।  श्रीनगर में इसी ऑपरेशन के दौरान सेना की तरफ से की गई कार्रवाई में आतंकी मसूद अजहर का भतीजे तल्हा रशीद मारा गया था।

    ज्योति प्रकाश निराला बिहार के रोहतास जिले के रहने वाले थे. 31 साल की उम्र में उनकी शहादत के बाद परिवार में बूढ़े मां-बाप हैं. इसके अलावा उनकी पत्नी और एक बेटी भी है. शहीद निराला की तीन बहनें हैं. हाल ही में 3 जून को बिहार में एक शादी थी जिसकी चर्चा हर जगह हुई। ये शादी शहीद गरुड़ कमांडो ज्योति प्रकाश निराला की बहन की थी। निराला की शहादत के बाद घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, ऐसे में बहन की शादी का जिम्मा निराला के साथियों ने उठाया। इस दौरान 100 कमांडो ने चंदा इकट्ठा कर बहन शशिकला की शादी करवाई।

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