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History of 07th Dec – आज मनाया जाता है Armed Forces Flag Day

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Armed Forces Flag Day

Armed Forces Flag Day

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आज 07 दिसंबर का दिन है और हम बात आज के दिन से जुड़े इतिहास की करने जा रहे हैं। वैसे आपको बता दें कि आज इस साल के 341 दिन पूरे हो गए हैं और नए साल के शुरू होने में 25 दिन और बचे हैं, यानि की आज के दिन जो भी कुछ होगा वो आगे इतिहास के रूप में दर्ज हो जाएगा। खैर बात आज के दिन की करते है…. भाारत में आज के दिन को Armed Forces Flag Day के रूप में मनाया जाता है। अब आपके मन में सवाल होगा कि यह Armed Forces Flag Day है क्या? वेसे नाम से इतना तो पता चल ही गया होगा कि सेना से जुड़ी हुई चीज है।…. तो आपको बता दें कि Armed Forces Flag Day या the Flag Day of India वह दिन होता है जो पूरे भारत को समर्पित है। इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य भारतीय आर्म्ड फोर्सेज के लिए भारत मे रहनेवाले लोगों की मदद से फंड जुटाना है ताकि आर्म्ड फोर्सेज के लोगों के लिए वेलफेयर के काम किए जा सकें।

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Armed Forces Flag Day को 1949 से मनाया जाता है

7 दिसंबर 1949 से ही इस दिन को Armed Forces Flag Day के रूप में मनाया जा रहा है और अब यह दिन सैनिकों को सम्मान देने दिवस के रुप में देखी जाती है। इस दिन के इतिहास के बारे में बात करें तो आजादी के तुरंत बाद सरकार को इस बात की जरूरत महसूस हुई। अगस्त 28 1949 को सरकार की ओर से डिफेंस मिनिस्टर की देख रेख में एक कमेटी बनाई गई। इसी कमेटी ने 7 दिसंबर के दिन को फ्लैग डे मनाने की बात कही। इस दिन आम लोगों को एक झंडा दिया जाता है और उसके बदले उनसे आर्म्ड फोर्सेज के लिए डोनेशन लिया जाता है। इस दिन को और ज्यादा महत्व इस लिए मिलता है क्यों कि आम लोग इस बात को समझने लगे हैं कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे देश के जवानों और उनके परिवार की देख रेख में अपना योगदान दें।

इस दिन को मनाने के तीन मुख्श् उद्देश्य हैं। पहला — जंग में जख्मी या मारे गए जवानों के लिए रिहैबिटेशन, दूसरा — सेवारत आर्म्ड फोर्सेज के जवानों और उनके परिवार के लिए वेलफेयर और तीसरा — भूतपूर्व सैनिक यानि की एक्स सर्विस मैन और उनके परिवारों के लिए रिसैटेलमेंट और उनके वेलफेयर की व्यवस्था। यह दिन आम भारतीय के लिए उस दिन की तरह है जिस दिन वे देश ओर देश की सुरक्षा में लगे जवानों के प्रति अपनी संवेदनाओं को बयां कर सकें।…. तो आप भी आज के दिन देश के जवानों के लिए डोनेशन देकर देश की सेवा में अपना योगदान दे सकते हैं।

फिलहाल बढ़ते हैं कुछ और ऐतिहासिक घटनाओं की ओर जो आज के इतिहास के पन्नों में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

— दूसरे विश्व युद्ध का जिक्र जब भी होता है तो आज के दिन को जरूर याद किया जाता है। क्यों कि आज के ही दिन साल 1941 में जापानी वायुसेना ने हवाई जहाजों से पर्ल हार्बर स्थित अमरीकी नौसैनिक अड्डे पर अचानक से हमला कर इस पूरे इलाके को पूरी तरह से तबाह कर दिया था। इस हमले से जापान ने ब्रिटेन और अमरीका के ख़िलाफ़ युद्ध की घोषणा कर दी थी। जापानी बमवर्षक विमानों ने अमरीकी जंगी जहाज़ों, विमानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इस हमले में 2403 अमेरिकी मारे गए ओर 1178 के करीब बुरी तरह से घायल हुए थे। इस हमले के बाद अमेरिका भी आॅफिशियल तरीके से विश्वयुद्ध में कूद पड़ा।

— साल 2001 में तालिबान शासन ने कंधार का अपना गढ़ छोड़ दिया था। इस घटना के बाद अफ़ग़ानिस्तान में 61 दिन की लड़ाई के अंत की शुरुआत हो गई। अफ़ग़ानिस्तान के नए अंतरिम प्रशासन के प्रमुख हामिद करज़ई और तालिबान शासन के बीच हुए समझौते के आधार पर ही कट्टरपंथी तालिबान अपने धार्मिक गढ़ कंधार को छोड़ने के लिए तैयार हुए थे। तालिबान का कधार छोड़ना अफगानिस्तान पर ऑर्गनाइज्ड तालिबान के कंट्रोल के ढ़ीले पड़ने के संकेत थे क्यों कि यह ही वो जगह थी जहां से तालिबान का पॉवर बेस था।

— 1825 में आज ही के दिन दुनिया का पहला ‘स्टीम इंजन’ से चलनेवाला पानी जहाज कोलकाता के बंदरगाह पर पहुंचा था। इस जहाज को 1814 में डेनियल फ्रेंच ने बनाया था। अवध के नवाब ने ही इसी की तरह एक छोट स्टीम इंजन बोट अपने लिए बनवाया था।

— आज ही के दिन साल 2004 में हामिद करजई अफगानिस्तान के पहले चुने गए राष्ट्रपति बने और उन्होंने शपथ ग्रहण किया। वे 4 दिसंबर 2004 से 2014 तक अफगानिस्तान के राष्ट्रपति के पद पर बने रहे। इससे पहले 2001 में तालिबान के पतन के बाद करजई अफगानिस्तान के सबसे बड़े पॉलिटिकल चेहरे के रूप में सामने आए। पहले तो उन्हें 6 महिने के लिए अंतरिम सरकार का मुखिया चुना गया वहीं बाद में इसी पर पर उन्हें अगले दो साल तक के लिए चुना। अफगानिस्तान में 2004 में जब चुनाव हुए तो हामिद करजई चुनाव में जनता की पहली पसंद बनकर सामने आए।

— आज ही के दिन साल 1889 में भारत के महान थिंकर और सोशल साइंटिस्ट राधाकमल मुखर्जी का जन्म हुआ था। वे लखनऊ यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर होने के साथ ही इकोनॉमिक्स और सोशियोलॉजी के भी प्रोफेसर थे। इसके अलावा उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम मे भी अहम रोल अदा किया था।

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