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History of 06th Nov-साउथ अफ्रिका में गांधी ने निकाला था ‘द ग्रेट मार्च’

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History of 06th Nov-साउथ अफ्रिका में गांधी ने निकाला था 'द ग्रेट मार्च'

History of 06th Nov-साउथ अफ्रिका में गांधी ने निकाला था 'द ग्रेट मार्च'

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आज 06 नवंबर का दिन है। आज का दिन साल का 310वां दिन है। इतिहास से जुड़ी घटनाओं के बारे में बात करें तो आज के दिन की कई ऐतिहासिक घटनाओं का दृश्य हमारे सामने होते हैं। इन्ही में एक घटना जुड़ी है राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से। बात उस समय की है जब महात्मा गांधी साउथ अफ्रिका में थे। आज ही के दिन साल 1913 में महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की नीतियों के खिलाफ ‘द ग्रेट मार्च’ का नेतृत्व किया। यह उनके क्रांतिकारी जीवन की दूसरी बड़ी उपलब्धि थी।दरअसर साल 1906 में ट्रैंसवॉल की सरकार ने एशिएटिक कानून संशोधन अध्यादेश पारित किया था इसके अनुसार हर भारतीय पुरुष, महिला और आठ साल से ज्यादा उम्र के बच्चों को एशिएटिक्स में अपना रजिस्ट्रेशन करवाना और रजिस्ट्रेशन का सर्टिफिकेट लेना जरूरी कर दिया गया।

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गांधीजी को 48 घंटे के अंदर ट्रैंसवॉल छोड़ने का आदेश दिया गया

इस काले कानून के खिलाफ सितंबर 1906 में जोहांसबर्ग में एक जनसभा हुई इसमें बड़ी संख्या में भारतीय लोग पहुंचे। इस दोरान सबने कानून का पालन नहीं करने की कसम खाई।जनवरी 1908 में गांधीजी को 48 घंटे के अंदर ट्रैंसवॉल छोड़ने का आदेश दिया गया लेकिन वे नहीं गए, इस पर उन्हें दो साल की सजा हुई। गांधी ने अपने इस विरोध को सत्याग्रह का नाम दिया।

1908 में काले कानून का विरोध और तेज हुआ तो करीब 2,000 लोगों को कानून की अवज्ञा की के लिए जेल भेजा गया और उनपर अत्याचार हुआ। इस बीच 1912 में गोपाल कृष्ण गोखले ने दक्षिण अफ्रीका पहुंचे और मंत्रियों से मुलाकात के बाद गांधी को भारत आने को कहा।

लेकिन गांधी को अंग्रेजों की नीयत पर शक था कि वे कानून खत्म नहीं करेंगे। जब वहां के मंत्रियों ने अपना वादा तोड़ा तो गांधीजी ने गोखले को लिखकर कहा कि वह अंतिम सांस तक लड़ेंगे।गांधी सत्याग्रह शुरू करने की तैयारी में थे कि इसी बीच मार्च 1913 में केप के सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि ईसाई रीति-रिवाजों के मुताबिक जो शादियां नहीं हुई हैं, वे सारी वैध नहीं मानी जाएंगी। जिसके कारण सरकार की नज़र में ज्यादातर भारतीयों का विवाह अवैध हो गया और बड़ी संख्या में बच्चों का विरासत में हक खतरे में पड़ गया।

इस कानून ने वहां रह रहे भारतीयों को आक्रोशित कर दिया। वे तब और भड़क गए जब नटाल की सरकार ने 3 पाउंड का वार्षिक टैक्स नहीं देने वाले भारतीयों पर मुकदमें चलाने शुरू कर दिए। इन सब परिस्थितियों की वजह से सितंबर 1913 में नटाल और ट्रैंसवॉल में फिर से सत्याग्रह शुरू किया गया। गांधी जी ने 6 नवंबर, 1913 को दमनकारी कानून के खिलाफ ‘ग्रेट मार्च’ निकाला। करीब 2,000 खदानकर्मियों ने गांधीजी के नेतृत्व में नटाल तक का मार्च किया।

गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया गया और जमानत पर छोड़ दिया गया। वह फिर से मार्च में शामिल हुए और फिर गिरफ्तार किए गए, लेकिन आखिरकार जीत गांधीजी की हुई। सरकार की ओर से समझौते की सहमति दी गई और गांधीजी एवं दक्षिण अफ्रीका सरकार के प्रतिनिधि जनरल जॉन स्मट्स के बीच बातचीत हुई। इसके बाद भारतीय राहत विधेयक पास हुआ।

गांधी जी के ‘ग्रेट मार्च’ के अलावा आज के दिन कई और भी ऐतिहासिक घटनाएं घटी हैं। जैसे कि

— साल 1763 में ब्रिटिश फौज ने मीरकासिम को हराकर पटना पर अपना कब्जा जताया था।

— साल 1998 में अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने डेट्रॉइन क्षेत्र को ‘ऑटोमोबाइल राष्ट्रीय स्मारक क्षेत्र’ के रूप में घोषित कर दिया।

— आज ही के दिन साल 1860 में अब्राहम लिंकन अमेरिका के साेलहवें राष्ट्रपति के रूप में चुने गए थे।

— साल 1943 में आज ही के दिन दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह सौंपा था।

— वहीं आज ही के दिन साल 2013 में महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर और वैज्ञानिक प्रो. सीएनआर राव को देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने की घोषणा की गई थी। सचिन पहले खिलाड़ी हैं जिन्हें खेल सम्मानों के अलावे भारत रत्न से भी नवाजा गया है।

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