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History of 05th Dec – कार्टून की दुनिया के बादशाह ‘वाल्ट डिज़्नी’ का जन्म

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'वाल्ट डिज़्नी'

'वाल्ट डिज़्नी'

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आज 5 दिसंबर का दिन है और हम आज इस दिन के इतिहास के बारे में बात करेंगे। वैसे तो इस दिन को इतिहास के पन्नों में कई बड़ी घटनाओं के लिए याद किया जाता है लेकिन सबसे ज्यादा इस दिन को याद किया जाता है कार्टून की दुनिया के बादशाह के नाम से पहचाने जानेवाले शख्स ‘वाल्ट डिज़्नी’। आपके घरों में बच्चे होगे तो इस बात को आप अच्छी तरह से समझ सकते हैं कि कार्टून बच्चों को कितना भाता है। वैसे सिर्फ बच्चों को नहीं बड़ों को भी यह भाता है…. क्योंकि कभी—कभी इसे देखकर बड़ों को भी अपने बचपन की याद आ जाती है।

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‘वाल्ट डिज़्नी’ ने रचा था मिकी माउस का कैरेक्टर

मिकी माउस के कैरेक्टर से आप सब भली भांती परिचित तो होगे। इस कार्टून ने दुनिया भर के लोगों के दिलों में अपना घर बनाया। इस कैरेक्टर को रचने वाले इंसान कोई और नहीं ‘वाल्ट डिज़्नी’ ही थे। उनका जन्म आज ही के दिन साल 1909 में हुआ था। वॉल्ट डिज़्नी एक अमेरिकी एंटरप्रेन्योर, एनीमेटर, वॉइस ओवर आर्टिस्ट और फिल्म निर्माता के साथ ही एक एक्टर भी थे। अमेरिका अगर एनीमेशन के सेक्टर में आगे बढ़ा तो वो केवल वॉल्ट के कारण्र ही हो सका। हर सफल इंसान के पीछे एक बड़ी संघर्ष की कहानी होती है। डिज़्नी की कहानी भी कुछ ऐसी ही रही। घर में चार भाइयों में छोटे वाल्ट अपने पिता का खेती में हाााि बटाते तो वहीं सुबह में अखबार बेचा करते थे।

स्कूल के दौरान ही उन्हें कार्टून से प्यार हो गया। तब से वे कार्टून बनाने लगे थे। जब बड़े हुए तो विश्वयुद्ध छिड़ा हुआ था, तो उन्होंने भी जर्मन के खिलाफ लड़ाई में उतरने का मन बनाया लेकिन किसी कारण जा नहीं सके। इसके बाद उन्होंने अपने बर्थ सर्टिफिकेट पर कुछ बदलाव कराकर रेड क्रॉस में एंबुलेंस चलाने की नौकरी कर ली। इसके बाद इसी काम के लिए उन्हें फ्रांस भेज दिया गया।

कहा जाता है कि वे अपने एम्बुलेंस को कार्टूनों से सजा कर रखते थे। लेकिन जल्द ही उनका मन इस जॉब से ऊब गया। वे अपने मन मुताबिक काम करना था…इसी वक्त उन्हें आर्टिस्ट का काम मिला तो उन्होंने यह काम चुन लिया। लेकिन कुछ समय बाद उन्हें यह कह कर काम से निकाल दिया गया कि वे क्रिएटिव नहीं हैं।… जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए फिर डिज़्नी ने अपने भाइयों संग मिलकर ‘बॉल्ट डिज़्नी ब्रदर्स’ नाम की कंपनी खोली। जिसका नाम बाद में वॉल्ट डिज़्नी पड़ गया।

वॉल्ट ने अपनी कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए अपनी ही कंपनी में आर्टिस्ट के तौर पर काम भी किया। जिस मिकी माउस का कैरैक्टर इतना लोकप्रिय हुआ उसे वॉल्ट डिज़्नी ने एक ट्रेन के सफर के दौरान किया था। अपनी पत्नी के सजेशन के बाद उन्होंने इसका नाम ‘मिकी माउस’ रखा। वॉल्ट डिज़्नी की मौत 1966 में कैंसर के कारण हुई।

वॉल्ट डिज़्नी के अलावा आज के दिन का इतिहास कई और ऐतिहसिक घटनाओं से भरा है जैसा कि….

— साल 1971 में भारत ने बंगलादेश को एक देश के रूप में मान्यता दी थी। बता दें कि पूर्वी पाकिस्तान से आजादी के लिए पश्चिमी पाकितान में बड़ा संघर्ष हुआ था। यह संघर्ष खूनी रह, वहीं इसी दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच भी 1971 की लड़ाई हुई थी।

— साल 1905 में आज ही के दिन शेख़ मोहम्मद अब्दुल्ला का जन्म हुआ था। वे जम्मू और कश्मीर के क्रांतिकारी नेता होने के साथ ही सूबे के पहले प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री थे। शेख़ अब्दुल्ला अजादी के समय कश्मीर के भारत के साथ जाने के पक्ष में थे और वे कश्मीर के सेक्यूलर छवि वाले नेता थे।

— साल 1958 में आज ही के दिन लंबी दूरी के टेलिफोन कॉल को हर घर तक पहुंचा देने वाली एसटीडी सेवा दुनिया के सामने आई। सबसे पहले यूनाइटेड किंगडम में इसकी शुरूआत हुई। 5 दिसंबर को एलिजाबेथ द्वितीय ने ब्रिस्टल से एडिनबर्ग कॉल किया था।

— ब्रिटेन के समलैगिंक लोगों के लिए आज का दिन काफी अहम माना जाता है। आज ही के दिन साल 2005 में एक नये क़ानून द्वारा ब्रिटेन में समलैंगिक पुरुष यानि ‘गे’ और समलैंगिक स्त्री यानि की ‘लेस्बियन’ का वैध सम्बन्ध स्थापित करने की मान्यता दी गई थी। ।

— जयललिता को कौन नहीं जानता है, आज ही के दिन साल 2016 में अपोलों अस्पताल में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली। वे 1991 से 2016 तक तमिलनाडू की मुख्यमंत्री रहीं। राजनीति में आने से पहले जयतलिता फिल्मों में अभिनेत्री के रूप में अपनी जगह बना चुकी थीं। जयललिता की मजबूत अंग्रेजी को देखते हुए एमजीआर ने उनको राजनीति में आने का मौका दिया। वे 1982 में राजनीति में उतरीं। एम करुणानिधि की पार्टी द्रमुक से टूटने के बाद एमजीआर ने अन्नाद्रमुक का गठन किया ओर साल 1983 में जयललिता को पार्टी का सचिव बना दिया और राज्यसभा भेजा।

इस बीच, जयललिता और एमजीआर के बीच मतभेद की खबरें भी आईं, लेकिन जयललिता ने 1984 में पार्टी के प्रचार अभियान का नेतृत्व किया। 1987 में रामचंद्रन की मौत के बाद अन्नाद्रमुक में भी दो फाड़ हो गई। एमजीआर की पत्नी जानकी रामचंद्रन और जयललिता दोनों के पक्ष में समर्थक-कार्यकर्ता बंट गए। 1988 में जानकी के 21 दिन तक मुख्यमंत्री बने रहने के बाद राष्ट्रपति शासन लग गया। जिसके बाद अगले चुनाव में हार के बाद जानकी ने इस्तीफा दे दिया और जयललिता को आगे आने का मौका मिल गया। जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाने के बाद जयललिता पहली बार साल 1991 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। जनता के बीच उनकी लोकप्रियता कुछ ऐसी थी कि लोग उन्हें अम्मा कहते थे। मौत के बाद उनकी बॉडी को मरीना बीच पर उनके राजनीतिक गुरु एमजीआर के बगल में ही दफनाया गया है।

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